फेफड़ों के साथ- साथ पेट के लिए भी खतरनाक है कोविड, ठीक होने के बाद भी मरीज को रहती है ये दिक्कतें
punjabkesari.in Monday, Oct 12, 2026 - 05:21 PM (IST)
नारी डेस्क: लंबे समय तक कोविड के लक्षणों से जूझने वाले लोगों के मुंह और फेफड़ों में मौजूद बैक्टीरिया के प्रकार और उनकी मात्रा में अंतर हो सकता है। एक नए शोध में यह बात सामने आई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, फेफड़ों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की संरचना में अंतर का संबंध सांस संबंधी लक्षणों के साथ-साथ लंबे समय तक कोविड से प्रभावित लोगों में देखी जाने वाली संज्ञानात्मक और पाचन संबंधी समस्याओं से भी है। 'यूरोपियन रेस्पिरेटरी' जर्नल में प्रकाशित शोध के निष्कर्ष लंबे समय तक कोविड के लक्षण विकसित होने के कारणों को समझने में मदद कर सकते हैं और इस स्थिति के उपचार के नए तरीके खोजने का रास्ता दिखा सकते हैं।
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फेफड़ों को प्रभावित वाली बीमारी है कोविड
ब्रिटेन के डुंडी विश्वविद्यालय की प्रमुख शोधकर्ता ने कहा- ''शुरुआती अध्ययनों में लंबे समय तक कोविड से पीड़ित लोगों की आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों में कुछ बदलाव देखे गए हैं। लेकिन कोविड-19 फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी है, इसलिए यह देखना उचित है कि क्या लंबे समय तक कोविड के मामलों में फेफड़ों में मौजूद सूक्ष्मजीवों में भी बदलाव होता है। दुनियाभर में लाखों लोग अब भी लंबे समय तक कोविड के लक्षणों से प्रभावित हैं और इसका कारण अभी भी अज्ञात है। यह बीमारी शरीर के कई अंगों को प्रभावित करती है। सूक्ष्मजीव शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए वे लंबे समय तक कोविड के लक्षणों में योगदान देने वाले संभावित कारक हो सकते हैं।''
ठीक होने के बाद भी मरीजों में दिखा खतरा
अध्ययन में फरवरी 2020 से मार्च 2021 के बीच ब्रिटेन के 38 अस्पतालों में से किसी एक में कोविड-19 का उपचार कराने वाले 771 लोगों को शामिल किया गया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के पांच महीने बाद उनके लक्षणों की गंभीरता के आधार पर प्रतिभागियों को चार समूहों में बांटा गया। इनमें एक समूह में गंभीर शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक समस्याओं से जूझ रहे लोग थे, जबकि दूसरे छोर पर ऐसे लोग थे जिनमें लक्षण कम थे और जो अच्छी तरह ठीक हो रहे थे। अस्पताल से छुट्टी मिलने के छह महीने बाद मरीजों के मुंह से लार और फेफड़ों से बलगम के नमूने लिए गए। डीएनए अनुक्रमण तकनीक की मदद से इन नमूनों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की पहचान की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि लंबे समय तक कोविड के गंभीर लक्षणों से प्रभावित लोगों के मुंह और फेफड़ों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की संरचना उन लोगों से काफी अलग थी, जिन्हें बीमारी के गंभीर लक्षण नहीं थे। अध्ययन में कुछ विशिष्ट लक्षणों से जुड़े बदलाव भी सामने आए। इनमें फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी शामिल है, जिसमें फेफड़े सामान्य की तुलना में कम हवा रोक पाते हैं या उनमें हवा का आना-जाना मुश्किल हो जाता है।
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ब्रेन फॉग का भी संकट
शोधकर्ताओं ने मुंह और फेफड़ों में मौजूद सूक्ष्मजीवों में अंतर का संबंध अलग-अलग तरह के तंत्रिका-संज्ञानात्मक लक्षणों और आंत संबंधी समस्याओं से भी पाया। तंत्रिका-संज्ञानात्मक लक्षणों में 'ब्रेन फॉग' यानी सोचने-समझने में धुंधलापन, याददाश्त, ध्यान और एकाग्रता संबंधी कठिनाइयां शामिल हैं। वहीं, आंत संबंधी समस्याओं में दर्द, मितली, दस्त और भूख न लगना शामिल हैं। लंबे समय तक कोविड के लक्षणों से जुड़े बदलावों में लैक्टिक एसिड बनाने वाले बैक्टीरिया की अधिकता भी शामिल थी। इसका संबंध मरीजों के रक्त के नमूनों में सूजन के संकेतों से भी पाया गया। कोविड संक्रमण के पांच से छह महीने बाद जिन लोगों में सबसे गंभीर लक्षण थे, उनके मुंह और फेफड़ों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की संरचना में बड़े बदलाव देखे गए। श्वसन मार्ग में मौजूद सूक्ष्मजीवों में बदलाव का संबंध न केवल फेफड़ों की समस्याओं, बल्कि ब्रेन फॉग और आंत संबंधी लक्षणों से भी था। इससे संकेत मिलता है कि फेफड़ों में मौजूद सूक्ष्मजीव व्यापक रूप से स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

