कब है चैत्र पूर्णिमा 2026? जानें  किस दिन करें स्नान, दान

punjabkesari.in Saturday, Mar 28, 2026 - 02:50 PM (IST)

नारी डेस्क:  चैत्र पूर्णिमा हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कहा जाता है। साल 2026 में यह पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल से शुरू होकर 2 अप्रैल तक रहेगी। हालांकि धार्मिक अनुष्ठान और व्रत के लिए मुख्य दिन माना जाएगा 2 अप्रैल 2026 (गुरुवार)। इस दिन सूर्योदय से लेकर अगली सुबह तक पूर्णिमा की तिथि प्रभावी रहती है, इसलिए स्नान, पूजा और दान-पुण्य करने के लिए यह दिन सबसे शुभ माना जाता है।

 शुभ मुहूर्त और पूजा का समय

चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान और पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे उपयुक्त होता है। साल 2026 में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:38 बजे से 5:24 बजे तक रहेगा। इस समय स्नान करने से न केवल शरीर की शुद्धि होती है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी मिलती है। पूजा और व्रत के लिए सुबह का समय सूर्योदय के बाद 6:11 बजे से 9:18 बजे तक सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा, दिन में दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक अभिजीत मुहूर्त भी आता है, जो विशेष पूजा-अर्चना के लिए शुभ माना जाता है।

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 पूजा और व्रत का महत्व

चैत्र पूर्णिमा पर व्रत रखना और पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन सुबह से लेकर चाँद निकलने तक उपवास किया जाता है। व्रत रखने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और आत्म-अनुशासन का अभ्यास होता है। व्रत का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक शुद्धि और मानसिक शांति प्राप्त करना होता है। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। इसे करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

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दान-पुण्य का महत्व

चैत्र पूर्णिमा के दिन दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को धन, भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुएँ दान में देने से विशेष फल प्राप्त होता है। दान से न केवल समाज में सहयोग बढ़ता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन किया गया दान दैवीय कृपा को आकर्षित करता है और पापों से मुक्ति दिलाता है।

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 आध्यात्मिक महत्व

चैत्र पूर्णिमा को हिन्दू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह साल की पहली पूर्णिमा है। इस दिन कई लोग भगवान विष्णु, हनुमानजी और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। चाँद की पूर्ण रोशनी अहंकार को कम और ध्यान, ध्यानस्थता तथा आत्म-विश्लेषण को बढ़ाती है। साथ ही, व्रत और दान-पुण्य के कारण व्यक्ति का मन और जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।

 पूजा कैसे करें  

इस दिन सबसे पहले जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा की थाली में दीप, फूल, अक्षत, फल और कुमकुम रखें। भगवान का ध्यान लगाकर प्रार्थना करें और उपासना के बाद दान जरूर करें। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने से पूजा पूर्ण होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

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Content Editor

Priya Yadav

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