Cancer का कारण बन सकते हैं कुछ आम इंफेक्शन, समय पर ऐसे करें बचाव

punjabkesari.in Wednesday, Oct 14, 2026 - 10:19 AM (IST)

नारी डेस्क:   कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में तंबाकू, धूम्रपान, गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल जैसी बातें आती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ तरह के इंफेक्शन यानी संक्रमण भी कैंसर की वजह बन सकते हैं? शरीर में कुछ वायरस, बैक्टीरिया और परजीवी लंबे समय तक मौजूद रहें, तो वे कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। अच्छी बात यह है कि समय पर जांच, जरूरी टीकाकरण और सही इलाज की मदद से संक्रमण से जुड़े कई कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है। द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक वैश्विक विश्लेषण के मुताबिक, साल 2022 में दुनिया भर में करीब 23 लाख नए कैंसर के मामले ऐसे संक्रमणों से जुड़े थे, जिन्हें रोकने या जिनका इलाज करने की संभावना मौजूद है। यह आंकड़ा उस साल दुनिया में सामने आए कुल नए कैंसर मामलों का लगभग 12.2 प्रतिशत था। यानी कैंसर के कुछ मामलों को संक्रमण की समय पर पहचान और रोकथाम के जरिए कम किया जा सकता है।

किन संक्रमणों से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले संक्रमणों में कुछ वायरस और बैक्टीरिया प्रमुख हैं। इनके अलावा कुछ परजीवी भी खास तरह के कैंसर से जुड़े हुए हैं।

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया

हेलिकोबैक्टर पाइलोरी, जिसे आमतौर पर एच. पाइलोरी कहा जाता है, एक प्रकार का बैक्टीरिया है जो पेट की अंदरूनी परत में रह सकता है। कई लोगों में इसका संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है और उन्हें इसके बारे में पता भी नहीं चलता।यह बैक्टीरिया पेट में सूजन, गैस्ट्राइटिस और पेट के अल्सर जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। अगर संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो पेट के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। हालांकि, इस बैक्टीरिया से संक्रमित हर व्यक्ति को कैंसर नहीं होता। बचाव कैसे करें? अगर डॉक्टर को एच. पाइलोरी संक्रमण का संदेह हो, तो सांस, मल या अन्य जरूरी जांच की सलाह दी जा सकती है। संक्रमण की पुष्टि होने पर डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक दवाओं और एसिड कम करने वाली दवाओं का पूरा कोर्स लेना जरूरी है।

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ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV)

एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमावायरस कई प्रकार का वायरस है। इसके कुछ प्रकार जननांगों और आसपास की त्वचा को संक्रमित कर सकते हैं। ज्यादातर एचपीवी संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ हाई-रिस्क प्रकार लंबे समय तक शरीर में बने रहें, तो कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। यह वायरस महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का प्रमुख कारण है। इसके अलावा एचपीवी का संबंध गुदा, लिंग, योनि, वल्वा और गले के कुछ हिस्सों के कैंसर से भी है। यह संक्रमण मुख्य रूप से यौन संपर्क के जरिए फैल सकता है। बचाव कैसे करें? एचपीवी वैक्सीन इस वायरस के उन प्रकारों से बचाव में मदद करती है, जो कई कैंसर का कारण बनते हैं। इसके साथ ही महिलाओं के लिए उम्र और मेडिकल गाइडलाइन के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग जरूरी है। एचपीवी संक्रमण की जांच और स्क्रीनिंग का तरीका व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और स्थानीय दिशानिर्देशों के आधार पर तय किया जाता है।

हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी

हेपेटाइटिस बी और सी ऐसे वायरस हैं जो लिवर को प्रभावित करते हैं। इनका संक्रमण लंबे समय तक बना रहने पर लिवर में सूजन और नुकसान हो सकता है। समय के साथ कुछ लोगों में लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। हेपेटाइटिस बी संक्रमित खून, कुछ शारीरिक तरल पदार्थों और मां से बच्चे में फैल सकता है। वहीं हेपेटाइटिस सी मुख्य रूप से संक्रमित खून के संपर्क से फैलता है। बचाव कैसे करें? हेपेटाइटिस बी से बचने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। हेपेटाइटिस सी के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन नहीं है, लेकिन आधुनिक दवाओं से इसके ज्यादातर मामलों का इलाज किया जा सकता है। जोखिम होने पर जांच कराना, सुरक्षित इंजेक्शन का इस्तेमाल करना और संक्रमित खून के संपर्क से बचना जरूरी है। जिन लोगों को लंबे समय से हेपेटाइटिस बी या सी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिवर की नियमित निगरानी करानी चाहिए।

एपस्टीन-बार वायरस (EBV)

एपस्टीन-बार वायरस एक आम वायरस है, जो हर्पीस वायरस परिवार से संबंधित है। दुनिया के बहुत से लोग जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित होते हैं। अधिकतर लोगों में यह संक्रमण गंभीर समस्या पैदा नहीं करता, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में इसका संबंध कुछ प्रकार के कैंसर से पाया गया है। इस वायरस का संबंध कुछ लिम्फोमा और नासोफैरिंजियल कैंसर से है। हालांकि, सिर्फ इस वायरस से संक्रमित होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर हो जाएगा। कैंसर होने में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, आनुवंशिक कारण और अन्य परिस्थितियां भी भूमिका निभा सकती हैं। बचाव कैसे करें? फिलहाल एपस्टीन-बार वायरस से बचाव के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे रोकने का कोई निश्चित और आसान तरीका नहीं है। लंबे समय तक बने रहने वाले या असामान्य लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

कुछ परजीवी भी बढ़ा सकते हैं कैंसर का खतरा

कुछ परजीवी संक्रमण भी कैंसर से जुड़े हुए हैं। उदाहरण के लिए, ओपिस्टोरचिस विवरिनी नाम का लिवर फ्लूक परजीवी पित्त नली के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। यह संक्रमण कुछ क्षेत्रों में दूषित या ठीक से न पकाई गई मीठे पानी की मछली खाने से फैल सकता है। इसी तरह, कुछ अन्य परजीवी संक्रमणों का भी खास तरह के कैंसर से संबंध पाया गया है। लंबे समय तक बने रहने वाले संक्रमण शरीर में सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने और कैंसर का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है। बचाव कैसे करें? खाने-पीने की स्वच्छता का ध्यान रखें, मछली और अन्य खाद्य पदार्थों को अच्छी तरह पकाकर खाएं और जोखिम वाले क्षेत्रों में संक्रमण के लक्षण दिखने पर जांच कराएं।

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आखिर इंफेक्शन से कैंसर कैसे हो सकता है

हर संक्रमण कैंसर का कारण नहीं बनता। लेकिन कुछ संक्रमण शरीर में लंबे समय तक बने रहने पर ऐसी प्रक्रियाएं शुरू कर सकते हैं, जिनसे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान: कुछ वायरस कोशिकाओं के सामान्य कामकाज में बदलाव कर सकते हैं। इससे कोशिकाओं के बढ़ने और विभाजित होने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक सूजन रहना: कुछ बैक्टीरिया और परजीवी शरीर में लगातार सूजन पैदा करते हैं। लंबे समय तक रहने वाली सूजन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है और कैंसर का खतरा बढ़ा सकती है।

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 शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर: कुछ वायरस शरीर की इम्यूनिटी को प्रभावित कर सकते हैं। इससे शरीर के लिए असामान्य कोशिकाओं को पहचानना और नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।कोशिकाओं के सामान्य नियंत्रण में बदलाव: कुछ संक्रमण कोशिकाओं के बढ़ने और खुद को नष्ट करने की प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इससे असामान्य कोशिकाओं के जमा होने की आशंका बढ़ सकती है। ध्यान रखें कि संक्रमण से कैंसर बनने में अक्सर कई साल लग सकते हैं और हर संक्रमित व्यक्ति में ऐसा नहीं होता। इसके अलावा, सभी कैंसर संक्रमण के कारण नहीं होते।

क्या संक्रमण से होने वाले कैंसर से बचा जा सकता है

कई मामलों में इसका जवाब हां है। सही समय पर जांच, टीकाकरण और इलाज से संक्रमण से जुड़े कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है। इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

जरूरी वैक्सीन लगवाएं: एचपीवी और हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन संक्रमण से जुड़े कुछ कैंसर का खतरा कम करने में मदद करती हैं। अपनी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार डॉक्टर से वैक्सीन के बारे में सलाह लें।

 समय पर स्क्रीनिंग कराएं: सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग से कैंसर से पहले होने वाले बदलावों का पता लगाया जा सकता है। सही समय पर जांच और इलाज से बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। स्क्रीनिंग कितनी बार करानी चाहिए, यह उम्र और मेडिकल गाइडलाइन पर निर्भर करता है।

संक्रमण का पूरा इलाज कराएं: अगर एच. पाइलोरी या किसी अन्य ऐसे संक्रमण की पुष्टि होती है, जिसका इलाज उपलब्ध है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज पूरा करें। खुद से एंटीबायोटिक दवाएं न लें और न ही बीच में इलाज बंद करें।

सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएं: एचपीवी और कुछ अन्य संक्रमणों का खतरा कम करने के लिए कंडोम और अन्य उपयुक्त सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल मददगार हो सकता है। हालांकि, कंडोम एचपीवी से पूरी तरह सुरक्षा नहीं देता, क्योंकि वायरस त्वचा के उन हिस्सों से भी फैल सकता है जिन्हें कंडोम नहीं ढकता।

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खून और इंजेक्शन से जुड़े जोखिमों से बचें: हमेशा सुरक्षित और नई सुई का इस्तेमाल सुनिश्चित करें। टैटू, पियर्सिंग या किसी अन्य प्रक्रिया के दौरान साफ-सफाई और उपकरणों की सुरक्षा का ध्यान रखें। जरूरत पड़ने पर हेपेटाइटिस बी और सी की जांच कराएं।

 लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करें

पेट में लगातार दर्द, बिना वजह वजन कम होना, निगलने में परेशानी, असामान्य रक्तस्राव या लंबे समय तक बने रहने वाले अन्य लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करें। इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन उनकी सही वजह जानना जरूरी है।

क्या हर इंफेक्शन कैंसर में बदल जाता है

नहीं, यह समझना बहुत जरूरी है कि हर संक्रमण कैंसर का कारण नहीं बनता। ज्यादातर सामान्य वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण ठीक हो जाते हैं और उनसे कैंसर नहीं होता। कैंसर का खतरा कुछ खास संक्रमणों के लंबे समय तक बने रहने और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करता है। इसी तरह, किसी व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि होने का मतलब यह भी नहीं है कि उसे कैंसर जरूर होगा। सही जांच, समय पर इलाज और डॉक्टर की सलाह से जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

 


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Content Editor

Priya Yadav

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