LGBTQ समाज में क्या योगदान देता है?' अनुराधा पौडवाल के बयान पर, सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए तीखे जवाब

punjabkesari.in Sunday, Jul 19, 2026 - 10:46 AM (IST)

 नारी डेस्क: मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने LGBTQ समुदाय, शादी की संस्था और समाज में उनके योगदान को लेकर अपनी राय रखी। उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों के बीच इस विषय पर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया, जबकि बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी आलोचना करते हुए कहा कि LGBTQ समुदाय के बारे में उनकी जानकारी अधूरी है और ऐसे संवेदनशील विषय पर टिप्पणी करते समय अधिक समझ की जरूरत होती है।

पॉडकास्ट में क्या बोलीं अनुराधा पौडवाल

हाल ही में पत्रकार शुभांकर मिश्रा के यूट्यूब पॉडकास्ट में अनुराधा पौडवाल से भारत में बदलते सामाजिक मूल्यों और शादी की संस्था को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे जानना चाहा गया कि क्या उन्हें लगता है कि पिछले कुछ वर्षों में विवाह की पवित्रता और महत्व पहले जैसा नहीं रहा। इस सवाल के जवाब में अनुराधा पौडवाल ने कहा कि उनके अनुसार शादी की संस्था पहले जैसी नहीं रही है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि LGBTQ समुदाय को मिले अधिकारों के बाद समाज में कई बदलाव आए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि LGBTQ समुदाय समाज के लिए किस तरह का योगदान देता है। उनके शब्दों में, जब एक पुरुष और एक महिला शादी करके परिवार बसाते हैं तो वह समाज की सामान्य व्यवस्था का हिस्सा होता है, लेकिन LGBTQ समुदाय के संदर्भ में उन्हें यह समझ नहीं आता कि इससे समाज को क्या लाभ मिल रहा है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हो सकता है उनकी जानकारी पूरी न हो और उनसे कुछ बातें छूट रही हों।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस

जैसे ही अनुराधा पौडवाल का यह बयान इंटरनेट पर वायरल हुआ, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कई यूजर्स ने कहा कि किसी भी समुदाय के योगदान को केवल शादी या परिवार बसाने के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अगर किसी विषय की पूरी जानकारी न हो तो सार्वजनिक मंच पर उस पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

यूजर्स ने गोद लेने और कानूनी अधिकारों का दिया उदाहरण

एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि LGBTQ समुदाय के लोग भी कानूनी रूप से शादी करने और उन बच्चों को गोद लेने की इच्छा रखते हैं, जिन्हें उनके जैविक माता-पिता छोड़ देते हैं। यूजर ने कहा कि अगर उन्हें समान कानूनी अधिकार मिलें तो वे भी समाज में परिवार और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभा सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि हर व्यक्ति को किसी भी विषय पर बोलने से पहले पूरी जानकारी होनी चाहिए।

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'यौन रुझान कोई पेशा नहीं है'

एक अन्य यूजर ने अनुराधा पौडवाल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यह सवाल पूछना वैसा ही है जैसे किसी से पूछा जाए कि बाएं हाथ से काम करने वाले लोग समाज में क्या योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि समलैंगिक होना किसी व्यक्ति का यौन रुझान (Sexual Orientation) है, न कि कोई पेशा या सामाजिक भूमिका। किसी इंसान का मूल्य उसके काम, व्यवहार, प्रतिभा और चरित्र से तय होता है, न कि इस बात से कि वह किससे प्रेम करता है।

'LGBTQ समुदाय भी हर क्षेत्र में काम कर रहा है'

कई यूजर्स ने यह भी लिखा कि LGBTQ समुदाय के लोग भी बाकी नागरिकों की तरह डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, कलाकार, वैज्ञानिक, उद्यमी और टैक्स देने वाले जिम्मेदार नागरिक हैं। उनका कहना था कि समाज में योगदान केवल परिवार बढ़ाने से नहीं होता, बल्कि अपने काम, जिम्मेदारियों और सामाजिक भूमिका से भी होता है। इसलिए किसी समुदाय के योगदान को केवल एक नजरिए से नहीं आंकना चाहिए।

कुछ लोगों ने जनसंख्या का भी दिया तर्क

एक यूजर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि भारत पहले ही दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। ऐसे में LGBTQ समुदाय को केवल इस आधार पर सवालों के घेरे में खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने अनुराधा पौडवाल से अपील की कि ऐसे विषयों पर बोलने से पहले व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

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कुछ फैंस ने जताई निराशा

अनुराधा पौडवाल के बयान से उनके कुछ प्रशंसक भी निराश नजर आए। एक यूजर ने लिखा कि वह लंबे समय से उनकी आवाज और गीतों के प्रशंसक रहे हैं, लेकिन इस बयान ने उन्हें निराश किया है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि किसी कलाकार की निजी राय से असहमत होने के बावजूद उनके संगीत को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए।

अनुराधा पौडवाल का संगीत सफर

अनुराधा पौडवाल भारतीय संगीत जगत की सबसे लोकप्रिय गायिकाओं में गिनी जाती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1973 में फिल्म अभिमान में एक श्लोक गाकर की थी। इसके बाद उन्होंने कालीचरण, आपबीती और हीरो जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दी। हालांकि उन्हें सबसे बड़ी पहचान 90 के दशक में आशिकी, दिल है कि मानता नहीं और साजन जैसी फिल्मों के सुपरहिट गीतों से मिली। पिछले कई वर्षों से वह मुख्य रूप से भक्ति संगीत और धार्मिक गीतों के लिए जानी जाती हैं।

अनुराधा पौडवाल के बयान ने एक बार फिर LGBTQ समुदाय, विवाह और समान अधिकारों जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक बहस को तेज कर दिया है। जहां कुछ लोग उनके विचारों से सहमत दिखाई दिए, वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने उनके बयान को असंवेदनशील बताते हुए इसका विरोध किया। फि

 

 


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Content Editor

Priya Yadav

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