लड़के के लिए मां ने पैदा की 10 लड़कियां, पिता को सभी बेटियों के नाम तक नहीं याद
punjabkesari.in Wednesday, Jan 07, 2026 - 06:13 PM (IST)
नारी डेस्क: भारतीय समाज आज भी बेटे की चाहत और सामाजिक मानदंडों के लिए एक महिला के जीवन को कैसे जोखिम में डाल देता है, वह हरियाणा के फतेहाबाद जिले के एक छोटे से गांव में देखने को मिला। भूना क्षेत्र के ढाणी भोजराज गांव के दिहाड़ी मजदूर संजय 11 बच्चों के पिता हैं। शादी के 19 साल और 10 बेटियों के बाद उनकी पत्नी सुनीता ने आखिरकार एक बेटे को जन्म दिया है, जिसका नाम उन्होंने दिलखुश रखा है।
बेहद मुश्किल से पाला 10 लड़कियों को
‘दिलखुश' नाम परिवार की खुशी को तो दर्शाता ही है, लेकिन समाज के दोहरे चरित्र को भी दर्शाता है, जो बेटियों के ऊपर बेटों को प्राथमिकता देता है। संजय ने यूनीवार्ता को बताया कि- 'डॉक्टरों ने मुझे बताया कि मेरी पत्नी सुनीता का हीमोग्लोबिन केवल पांच ग्राम बचा था। उन्होंने हमसे लिखित सहमति मांगी कि अगर डिलीवरी के दौरान कुछ भी गलत हुआ, तो हम जिम्मेदार होंगे।' यह पूछे जाने पर कि क्या बेटे की इच्छा उनकी पत्नी की जिंदगी से बढ़कर थी, संजय ने कहा- 'मेरी बेटियों ने भाई के लिए बहुत प्रार्थना की थी।' संजय ने अपनी आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वह दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। जी-राम-जी/ मनरेगा का काम वर्तमान में बंद होने के कारण एक बड़े परिवार का भरण-पोषण करना एक चुनौती बना हुआ है।
17 साल में महिला ने 10 बेटियों को दिया जन्म
संजय ने कहा- 'मैंने अब तक कड़ी मेहनत से अपने परिवार को पाला है और भविष्य में भी मजदूरी करके ऐसा करना जारी रखूंगा।' इस जोड़े की शादी 2007 में हुई थी। उनकी पहली बेटी दो साल बाद हुई। विगत 17 वर्षों में नौ और बेटियों का जन्म हुआ। संजय का कहना है कि उनकी सभी बेटियों का पालन-पोषण समान रूप से किया गया है। वे सरकारी स्कूलों में पढ़ती हैं। सबसे बड़ी बेटी (18) कक्षा 12 में है। वह अपनी बेटियों के बारे में गर्व से बात करते हैं। डिलीवरी के लिए परिवार जींद जिले के उचाना तक लगभग 50 किलोमीटर की यात्रा करके गया, जहां सुनीता को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मामले को संभालने वाले डॉक्टर नरवीर और संतोष ने पुष्टि की कि यह एक गंभीर स्थिति थी। जींद से आपातकालीन रक्त की व्यवस्था की गई और महिला की 11वीं डिलीवरी होने के बावजूद, सामान्य प्रसव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अब मां और बच्चा दोनों स्थिर हैं और उन्हें छुट्टी दे दी गई है।
वायरल हो रहा ये परिवार
परिवार की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, खासकर एक वीडियो सामने आने के बाद, जिसमें पिता अपनी दस बेटियों के नाम याद रखने के लिए संघर्ष करते दिख रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज लड़कियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में पूरी तरह सक्षम हैं। गौरतलब है कि अभी हाल में हरियाणा में लिंगानुपात में कुछ सुधार हुआ है, जो 2025 में 923 तक पहुंच गया है। यह 2024 की तुलना में 13 अंकों की छलांग है। अधिकारियों ने इस वृद्धि का श्रेय प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण और अवैध गर्भपात की प्रथा को रोकने के लिए उठाए गए कई कदमों को दिया है। अधिकारियों के मुताबिक हरियाणा में 2025 में जन्म के समय लिंगानुपात 923 दर्ज किया गया, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है।

