मां- बाप के लिए सीख - जहां बहू से ज्यादा दहेज से हो प्यार वहां कभी ना दो अपनी बेटी

punjabkesari.in Thursday, May 21, 2026 - 06:34 PM (IST)

नारी डेस्क: घर में बेटी के पैदा होती ही माता- पिता उसके लिए दहेज का सामान इक्ट्ठा करना शुरु कर देते हैं। क्योंकि हमारे समाज में माना जाता है कि लड़की को खाली हाथ ससुराल नहीं भेजा जाता। बेटी की शादी में माता-पिता कर्ज लेते हैं अपनी सारी जमा-पूंजी खर्च कर देते हैं, ताकी  शादी के बाद उनकी लाडली जिंदगी खुशहाल रहे और उसे कम दहेज लाने का ताना ना मिले। यानी जाने- अनजाने में माता- पिता ही अपनी बच्ची के रास्ते मुश्किल कर देते हैं। वह समाज के तानों से डर से अपनी बेटी को दलदल में धकेलते रहते हैं। 

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मां- बाप की चुप्पी ले लेती है बेटी की जान

माता-पिता के वे फ़ैसले जो सामाजिक मंज़ूरी और दहेज की चाहत से प्रेरित होते हैं, वे बेहद नुकसानदेह चक्रों को बढ़ावा देते हैं। इसका नतीजा निकलता है मानसिक आघात और घरेलू हिंस। तभी तो ट्विशा शर्मा और दीपिका जैसी लड़कियाें की आवाज अपनी मां- बाप की चुप्पी के कारण हमेशा के लिए दब गई। अगर उनके मां- बाप पहले ही अपनी बेटी को ऐसे घर में ना  भेजते जहां उनकी बच्ची से ज्यादा उसके साथ लाए गए सामान की इज्जत है तो इन बेटियों को बेमौत ना मरना पड़ता।  

 
दहेज ने ले लिया नया रूप

 दहेज ने नया रूप जो ले लिया है। शादी के वक्त लड़के वाले बड़े ही आराम से कह देते हैं हमें कुछ नहीं चाहिए, जो देना है आपने अपनी बेटी को देना है। उनके कहना का मतलब होता है कि जिस लड़की को वह अपने घर की बहू बनाकर लेकर जा रहे हैं उसके लिए उनकी तरफ से कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में लड़की वाले अपनी लाडली तो दे ही रहे हैं उसके रहने और सोने का सामान भी साथ दें रहे हैं।  बेटी की शादी के बाद मां- बाप का सिरदर्दी खत्म हो गई है ये बात बिल्कुल गलत है क्योंकि वह कुछ देने के बावजूद भी कुछ लोगों का पेट नहीं भरता ऐसे में या तो मां- बाप को कर्ज में डूबकर उनको खुश करना पड़ता है या फिर अपनी बेटी को पल- पल तड़पते हुए देखना पड़ता है। 
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अपनी  लड़कियों को ना भेजाे नर्क में 

मौजूदा दौर में ऐसे हालात बन गए हैं कि माता-पिता और लड़की का सम्मान दहेज में दिए गए धन-दौलत पर ही निर्भर करता है। लड़के वाले तो सरेआम अपने बेटे का सौदा करते हैं।  प्राचीन परंपराओं के नाम पर लड़की के परिवार वालों पर दबाव डाल कर उनको प्रताड़ित किया जाता है। बस सवाल यह है कि ऐसे लोगों को ये हक किसने दिया है? और लड़के को सौदा क्यों? अगर लड़का अपनी पत्नी को दो वक्त की रोटी खिलाने के लिए भी पैसों की मांग कर रहा है तो उसका खुद का अस्तित्व क्या है।  इस तरह की डिमांड पूरी करने से पहले हर लड़की के मां- बाप को एक बार तो यह जरूर सोचना चाहिए कि जो लड़का उनकी बेटी का  खर्चा नहीं उठा सकता वह उम्र भर उसका ख्याल क्या रखेगा। इस तरह के घर में बेटी को भेजने की बजाय उसे अपने पास ही रखें  ताकि यह डर तो नहीं रहेगा कि कुछ सामान के चलते आपके लाडली को कोई जला ना दे। 
 


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Content Writer

vasudha

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