मां का दूध भी अब नहीं रहा Pure, Breast Milk से बच्चों में पहुंच रहा कीटनाशक!
punjabkesari.in Saturday, Sep 26, 2026 - 11:51 AM (IST)
नारी डेस्क: मां का दूध नवजात शिशु के लिए किसी जीवनदान या अमृत से कम नहीं है, क्योंकि यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करके उसे कई गंभीर संक्रमणों से बचाता है, हालांकि पिछले कुछ सालों से मां का दूध भी खतरनाक साबित हो रहा है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में हुए अध्ययन में स्तनपान करा रहीं महिलाओं के नमूनों में अफ्लाटॉक्सिन एम1 और ओक्राटॉक्सिन जैसे विषैले पदार्थों के साथ ही हानिकारक धातुएं मिली हैं, जो बच्चों के लिए नुकसानदायक है।
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नवजात शिशुओं पर मंडरा रहा खतरा
कीटनाशकों समेत 'परसिस्टेंट ऑर्गेनिक पॉल्यूटेंट्स' (POPs) शरीर के फैट वाले टिश्यू (adipose tissue) में जमा हो जाते हैं। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान ये टिश्यू सक्रिय हो जाते हैं और POPs को शिशु तक पहुंचा देते हैं। जांचे गए 1आर्टिफिशियल दूध के नमूनों में से आधे में कीटनाशकों के अंश पाए गए, जो ब्रेस्ट मिल्क में पाए जाने वाले कीटनाशकों से अलग थे; जैसे कि फंगीसाइड 'थियाबेंडाज़ोल'। हालांकि ब्रेस्ट मिल्क के विपरीत, इनमें कभी भी एक से ज़्यादा तरह के कीटनाशक नहीं पाए गए। यह रिसर्च नवजात शिशुओं के कीटनाशकों के संपर्क में आने के जोखिम और इनके लंबे समय तक रहने वाले असर को कम करने के लिए और अधिक स्टडी की ज़रूरत पर ज़ोर देती है।
खाने के जरिए शरीर में जाता है कीटनाशक
अध्यन्न में में स्तनपान करा रहीं 100 महिलाओं के दूध के नमूने लिए गए। महिलाओं के दूध के 26 फीसदी नमूनों में क्रोमियम, 49 फीसदी में मैगनीज, 42 फीसदी में आर्सेनिक, 34 फीसदी में कैडमियम और 12 फीसदी में सीसा मिला। डॉक्टरों ने समझाया कि फसल उगाने में कीटनाशकों का इस्तेमाल काफी अधिक हो रहा है। यह रसायन अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों के साथ हमारे शरीर में जा रहा है। महिलाओं के दूध में विषैले पदार्थ और हानि पहुंचाने वाली धातुएं मिलने के पीछे सबसे बड़ी वजह यही है। अन्य संभावित वजहों की भी जांच की जा रही है।
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कीटनाशक पर नियंत्रण की जरूरत
अफ्लाटॉक्सिन एम1 और 96 फीसदी में ओक्राटॉक्सिन' की मौजूदगी है। अपलाटॉक्सिन एम। दुधारू पशुओं में दूषित चारा खाने और ओक्राटॉक्सिन फफूंद की वजह से पैदा होने वाला जहरीला रसायन है। इसके साथ ही फफूंद से पैदा होने वाले अन्य रसायन जियरालेनोन, अल्फा-जियरालेनोल और बीटा-जियरालेनोल भी दूध में पाया गया। ये सभी पदार्थ भोजन और अन्य स्रोतों के जरिये शरीर में पहुंच सकते हैं और दूध के माध्यम से नवजात तक भी पहुंचने की आशंका रहती है। डॉक्टरों का कहना है कि हमें अपना खानपान सुधारने की जरूरत है। खाने-पीने की चीजों से ही जहरीला रसायन हमारे शरीर में जा रहा है। इसके साथ ही कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल पर नियंत्रण की जरूरत है। इसके लिए गाइडलाइन बनाई जानी चाहिए।

