भारत की समुद्री शक्ति: AI-सक्षम INS सूरत ने निभाई Operation Sindoor में अहम भूमिका
punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 08:01 PM (IST)
नारी डेस्कः भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस सूरत के नौसेना में शामिल होने के एक वर्ष पूरे हो चुके हैं और यह अवधि भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुई है। हिंद महासागर और अरब सागर में निरंतर तैनाती के साथ आईएनएस सूरत ने न केवल नौसेना की युद्ध-तत्परता को सुदृढ़ किया है बल्कि भारत की समुद्री सीमाओं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और ‘नीली अर्थव्यवस्था’ की सुरक्षा को भी नया आत्मविश्वास प्रदान किया है। समंदर की लहरों पर तिरंगे के साथ इसकी उपस्थिति आज आत्मनिर्भर और सशक्त समुद्री भारत की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करती है।

PIB चंडीगढ़-मुंबई टीम के इस विशेष मीडिया दौरे में विभिन्न महिला पत्रकार को INS सूरत को निकट से देखने का अवसर मिला।
शक्तिशाली युद्धपोतः भारतीय नौसेना शक्ति का प्रतीक
भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो चंडीगढ़, पूना व मुंबई द्वारा महिला पत्रकारों के लिए आयोजित विशेष मीडिया दौरे के दौरान इस युद्धपोत को निकट से देखने का अवसर मिला। करीब 7,600 टन वजनी, 164 मीटर लंबे, 4 शक्तिशाली गैस टर्बाइनों से संचालित, यह जहाज 30 नॉट की गति से चलता है। इस अत्याधुनिक युद्धपोत की मारक क्षमता ही इसे भारतीय नौसेना का एक चलता-फिरता समुद्री दुर्ग बनाती है।ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम, एंटी-सबमरीन टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर से लैस INS सूरत हवा, समुद्र की सतह और समुद्र के भीतरतीनों स्तरों पर एक साथ युद्ध करने में सक्षम आधुनिक युद्धपोत है।
🛑 @PIBMumbai facilitated an All Women Journalist Delegation from Chandigarh, Himachal Pradesh and Punjab to INS Surat at the Naval Dockyard.
INS Surat holds the record for the shortest build time amongst indigenous warships, showcasing the advanced ship building techniques.… pic.twitter.com/uIyYKatofd
— PIB in Maharashtra 🇮🇳 (@PIBMumbai) January 21, 2026
जहाज पर तैनात लगभग 300 नौसैनिकों और अधिकारियों के लिए उपलब्ध आधुनिक सुविधाएं इसे लंबे समय तक समुद्र में आत्मनिर्भर बनाए रखती हैं। लगातार 45 दिनों तक समुद्र में तैनाती और बहु-उद्देशीय हेलीकॉप्टरों के संचालन की क्षमता ने बीते एक वर्ष में इसे नौसेना के सबसे भरोसेमंद युद्धपोतों में शामिल कर दिया है। एक वर्ष की सक्रिय सेवा के बाद आईएनएस सूरत अब केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरी तरह सक्रिय समुद्री योद्धा के रूप में सामने आता है। इसके डेक पर खड़े होकर यह सहज अनुभव होता है कि यह युद्धपोत केवल हथियारों का मंच नहीं, बल्कि अनुशासन, रणनीति और आधुनिक नौसैनिक युद्ध कौशल का सजीव प्रतीक है।
आधुनिक हथियारों से लैस स्वदेशी युद्धपोत
MF-STAR रडार: यह जहाज़ की आंख और दिमाग है, जो दूर से दुश्मन की मिसाइल, फाइटर जेट और ड्रोन को पहचान लेता है।
RAWL-02 MK एयर अर्ली वार्निंग रडार: यह आसमान में आने वाले खतरे को बहुत पहले पकड़कर अलर्ट देता है।
हेलीकॉप्टर हैंगर : जहाज़ पर दो हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं, जो खोज, बचाव और पनडुब्बी रोधी मिशन में काम आते हैं।
HUMSA-NG सोनार: यह पानी के अंदर छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने वाला सिस्टम है।
ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल: यह बेहद ताकतवर मिसाइल दुश्मन के जहाज़ या जमीन पर मौजूद ठिकानों को पलक झपकते नष्ट कर देती है।
MRSAM मिसाइल सिस्टम: यह हवा में ही दुश्मन की मिसाइल और लड़ाकू विमान को मार गिराता है।
इंडिजिनस रॉकेट लॉन्चर: यह नजदीकी समुद्री खतरों और पनडुब्बियों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल होता है।
ट्विन ट्यूब टॉरपीडो लॉन्चर: यह पानी के अंदर मौजूद दुश्मन की पनडुब्बियों को खत्म करता है।
AK-630 क्लोज रेंज गन: यह आखिरी सुरक्षा दीवार है, जो बहुत पास आ चुकी मिसाइल को तुरंत गिरा देती है।
मीडियम रेंज गन (सुपर रैपिड): INS सूरत में 76 मिमी सुपर रैपिड गन माउंट (76 mm SRGM) लगी है, जिसे आम तौर पर मीडियम रेंज गन कहा जाता है। यह तेज़ फायरिंग वाली तोप है, जो हवा और समुद्र दोनों के लक्ष्यों पर सटीक हमला करती है। इसका काम दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल, हेलीकॉप्टर और छोटे जहाज़ों को निशाना बनाना और समुद्री युद्ध में तेज़ और सटीक फायर सपोर्ट देना है।
SSR (Surface Surveillance Radar): यह रडार समुद्र की सतह पर मौजूद जहाज़ों और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी कर संभावित खतरे की पहचान करता है।

ऑप्रेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका, AI आधारित टूल्स से मिली बड़ी मददः कैप्टन संदीप शौरी
INS सूरत के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन संदीप शौरी ने जानकारी देते बताया कि जनवरी 2025 में कमीशन किए गए युद्धपोत जहाज ने ऑपरेशन सिंदूर में सक्रिय भूमिका निभाई। गहन निगरानी, खतरे की पहचान और ऑपरेशनल तालमेल में जहाज का प्रदर्शन बेहद प्रभावी रहा। AI आधारित टूल्स की मदद से बड़ी मात्रा में मिलने वाले सेंसर डेटा को तेजी से प्रोसेस किया गया, जिससे कमांडरों को तेज और सटीक निर्णय लेने में मदद मिली। ये भारत का पहला ऐसा युद्धपोत माना जा रहा है जिसे AI सिस्टम सपोर्ट के साथ डिजाइन किया गया है।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण
आईएनएस सूरत का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है और यह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के अंतर्गत समुद्री आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण है। परियोजना 15-बी (विशाखापत्तनम क्लास) के तहत निर्मित इस चौथे और आखिरी युद्धपोत की लगभग 75 प्रतिशत प्रणालियां स्वदेशी हैं। इस जहाज में जो हथियार व सेंसर लगे हैं वो भी भारत में ही विकसित व निर्मित किए गए हैं। 7 नवंबर साल 2019 को इस युद्धपोत का निर्माण शुरू हुआ था और साल 2022 में इसे लॉन्च किया गया। साल 2024 में नौसेना को सौंपा जाना भारत की बढ़ती जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है। 15 जनवरी 2025 को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड (Naval Dockyard) पर इस युद्धपोत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय नौसेना में कमिशन किया गया। इसी दिन से इसे नौसेना की सेवा में शामिल माना जाता है।

साहस, तकनीक और राष्ट्र गर्व का प्रतीक
यह एक युद्धपोत नहीं बल्कि साहस, तकनीक और राष्ट्र गर्व का प्रतीक है। यह नौसेना का पहला ऐसा युद्धपोत है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियों को व्यापक रूप से शामिल किया गया है। इसकी उन्नत युद्ध प्रबंधन प्रणाली खतरों की त्वरित पहचान और तत्काल जवाबी कार्रवाई को संभव बनाती है, जिससे आधुनिक नौसैनिक युद्ध में भारत की सामरिक बढ़त और अधिक सशक्त हुई है। आईएनएस सूरत यह प्रमाणित करता है कि भारत अब समुद्र में भी आत्मविश्वास के साथ नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर है।

