बिना चले भी फूलने लगे सांस तो समझ जाएं हार्ट हो गया ब्लॉक, 50% से ज्यादा ब्लॉकेज है खतरे की घंटी
punjabkesari.in Wednesday, Feb 26, 2025 - 07:26 PM (IST)
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नारी डेस्क: पिछले कुछ सालों से हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक और हार्ट ब्लॉकेज से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं, खासकर युवा इसके चपेटे में ज्यादा आ रहे हैं। जब धमनियों (Arteries) में ब्लॉकेज बढ़ जाता है तो हृदय तक रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिससे हार्ट अटैक या अन्य हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। ब्लॉकेज के स्तर के आधार पर डॉक्टर स्टेंट डालने की सलाह देते हैं। आज आपको बताते हैं कि कितने फीसदी ब्लॉकेज में स्टेंट डालने की जरूरत पड़ती है।
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किस कारण होती है ब्लॉकेज
धमनियां (Arteries) हमारे शरीर में रक्त प्रवाह को बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। जब ये कोलेस्ट्रॉल, फैट और कैल्शियम के जमाव से संकीर्ण (Narrow) हो जाती हैं, तो इसे धमनी ब्लॉकेज (Artery Blockage) या एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहा जाता है। अगर इस ब्लॉकेज का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर हृदय रोगों का कारण बन सकता है।
स्टेंट कब डाला जाता है?
50% से कम ब्लॉकेज को आमतौर पर दवाओं और लाइफस्टाइल सुधार से कंट्रोल किया जाता है, इसमें स्टेंट की जरूरत नहीं होती, लेकिन अगर सीवियर एंजाइना (Severe Chest Pain) या सांस फूलने की समस्या है, तो एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) और स्टेंट की जरूरत हो सकती है।अगर ब्लॉकेज 70% या उससे अधिक हो और मरीज को सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत या चलने में कठिनाई हो, तो स्टेंट लगाना जरूरी हो जाता है।9 0% - 100% ब्लॉकेज होने पर स्टेंट के बजाय बायपास सर्जरी (Bypass Surgery) की जरूरत पड़ सकती है, क्योंकि धमनियां पूरी तरह बंद हो चुकी होती हैं।
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स्टेंट डालने की प्रक्रिया
एंजियोग्राफी (Angiography) से जांच की जाती है कि धमनियों में ब्लॉकेज कितना है। फिर एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) के जरिए ब्लॉकेज वाली धमनी तक एक गुब्बारा (Balloon) पहुंचाया जाता है और उसे फुलाकर धमनी को चौड़ा किया जाता है। फिर धमनी को खुला रखने के लिए एक धातु की जालीदार ट्यूब (Stent)लगाई जाती है, जिससे रक्त प्रवाह सुचारू रूप से बना रहे।
ब्लॉकेज के ये हैं संकेत
छाती में दर्द (Angina): खासकर तब, जब आप चल रहे हों या व्यायाम कर रहे हों।
सांस लेने में दिक्कत: मामूली गतिविधि के बाद भी सांस फूलना।
थकान और कमजोरी: शरीर में रक्त प्रवाह कम होने के कारण।
हाथ-पैरों में ठंडक या सुन्नता: खराब रक्त संचार के कारण।
हृदय गति में अनियमितता: ब्लॉकेज के कारण हृदय पर अधिक दबाव पड़ता है।
माइग्रेन या चक्कर आना: मस्तिष्क में पर्याप्त रक्त न पहुंचने के कारण।
पैरों में दर्द या ऐंठन:परिधीय धमनी रोग (Peripheral Artery Disease - PAD) का संकेत।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन (Erectile Dysfunction): पुरुषों में यह संकेत हो सकता है कि रक्त प्रवाह में समस्या हो रही है।
अगर आपको ये लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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धमनी ब्लॉकेज से बचाव के तरीक
-रोजाना कम से कम 30 मिनट चलें या योग करें।
-वजन नियंत्रित करें क्योंकि मोटापा धमनी ब्लॉकेज का प्रमुख कारण है।
-ध्यान (Meditation) और गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं।
-ग्रीन टी (Green Tea) एंटीऑक्सीडेंट्स धमनी को हेल्दी रखते हैं।
नोट: अगर आपको छाती में दर्द, सांस फूलना, या कमजोरी महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।