जहां से कभी आती थी सिर्फ बंदूकों की आवाजें वहां अब महिलाएं चला रही हैं अपना Cafe

punjabkesari.in Monday, Sep 28, 2026 - 11:39 AM (IST)

नारी डेस्क: दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में सुकमा ज़िला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित केरलपाल अब अपने मुश्किल भरे अतीत से उबर रहा है। यहां महिलाओं द्वारा चलाया जा रहा एक कैफे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का जरिया बन गया है। केरलपाल दशकों तक माओवादी हिंसा से प्रभावित रहा है। 2012 में यहां एक ज़िला कलेक्टर का अपहरण कर लिया गया था, जबकि जंगल के पुलों और दूर-दराज़ पहाड़ी इलाकों में हुए IED धमाकों ने इस क्षेत्र के विकास को प्रभावित किया था।

यह भी पढ़ें:  LPU के कमरा नंबर 504 में क्या हुआ था? हॉस्टल की 3 लड़कियों ने वीडियो जारी कर बताई पूरी बात
 

 15 लाख रुपये की लागत से शुरू हुआ कैफे

आज 'जीवन संदेश' स्वयं-सहायता समूह (SHG) की महिला सदस्यों द्वारा चलाया जा रहा केरलपाल पंचायत कैफे एक कम्युनिटी स्पेस बन गया है। यह कैफे डिस्ट्रिक्ट मिनरल फ़ंड (DMF) फ़ाउंडेशन, नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (NRLM) और स्वच्छ भारत मिशन से मिले फ़ंड को मिलाकर 15 लाख रुपये की लागत से शुरू किया गया था। इस कैफ़े में समोसे, मूंग बड़ा, अदरक वाली चाय, आलू गुंडा, इडली और बेसन के पकौड़े जैसी चीज़ें मिलती हैं। यहां रोज़ाना 2,500 से 3,000 रुपये की कमाई होती है।


यह भी पढ़ें: LPU में छात्रों ने तोड़ी पुलिस की गाड़ियां कैंपस में लगाई.... 10 दिन के लिए क्लास सस्पेंड
 

बिज़नेस पर जोर दे रही हैं ग्रामीण महिलाएं 

सुकमा कलेक्टर अमित कुमार का कहना है कि यह कैफ़े एक बड़ी उम्मीद की शुरुआत है। उन्होंने कहा- "ग्रामीण महिलाएं एक फलते-फूलते नए बिज़नेस के काबिल चेहरे के तौर पर आगे आईं। अगले कुछ महीनों में जगरगुंडा, पोलमपल्ली और एर्राबोर जैसे पहले के लाल गढ़ों में सात और पंचायत कैफ़े खुलेंगे।" उन्होंने कहा-"जिले में 8,300 से ज़्यादा महिलाएं पहले ही 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं। यह पहल साबित करती है कि विकास का मतलब सिर्फ़ पक्की सड़कें और कंक्रीट के खंभे बनाना नहीं होता।" SHG की महिलाओं को शुरुआती ट्रेनिंग दी गई है, वे कैफ़े में ऑर्डर लेने के साथ-साथ खाने-पीने की अलग-अलग चीज़ें भी तैयार करती हैं।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

vasudha

Related News

static