जहां Periods में तुलसी को छूना भी माना जाता है गलत, वहीं उसी से सींचा गया पौधा खिल उठा
punjabkesari.in Tuesday, Sep 29, 2026 - 01:57 PM (IST)
नारी डेस्क : भारतीय घरों में पीरियड्स यानी मासिक धर्म को लेकर कई तरह की मान्यताएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इनमें से एक आम मान्यता यह भी है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं और लड़कियों को तुलसी के पौधे को नहीं छूना चाहिए। कई घरों में कहा जाता है कि अगर पीरियड्स में कोई महिला तुलसी को छू ले या उसमें पानी डाल दे तो पौधा सूख सकता है। लेकिन क्या वाकई मासिक धर्म के दौरान तुलसी को छूने से पौधे पर कोई असर पड़ता है? इसी सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर एक प्रयोग चर्चा में आया है, जिसमें इस मान्यता को परखने की कोशिश की गई।
क्या था यह प्रयोग?
साझा की गई जानकारी के मुताबिक, एक इंजीनियर ने तुलसी के एक छोटे पौधे पर यह प्रयोग किया। इसमें मासिक धर्म के दौरान निकलने वाले द्रव को पानी में मिलाकर काफी पतला किया गया और उससे तुलसी के पौधे को सींचा गया। इसके बाद करीब 4 से 5 सप्ताह तक पौधे पर नजर रखी गई। प्रयोग में दावा किया गया कि शुरुआत में लगभग 2 इंच का पौधा इस दौरान बढ़कर करीब 10 इंच का हो गया और स्वस्थ दिखाई दिया।

पौधा सूखने के बजाय बढ़ता गया
प्रयोग से जुड़ी तस्वीरों और जानकारी में बताया गया कि तुलसी के पौधे पर कोई ऐसा असर नजर नहीं आया, जैसा इस पारंपरिक मान्यता में कहा जाता है। पौधा धीरे-धीरे बढ़ता गया और एक स्वस्थ पौधे के रूप में विकसित हुआ। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी एक व्यक्ति का घरेलू प्रयोग वैज्ञानिक अध्ययन का विकल्प नहीं है। इससे यह निश्चित रूप से साबित नहीं होता कि मासिक धर्म के द्रव का पौधों पर कोई प्रभाव कभी नहीं पड़ सकता। पौधे की वृद्धि पर मिट्टी, पानी, धूप, तापमान और देखभाल जैसे कई कारकों का असर होता है।
यें भी पढ़ें : बड़े ब्रेस्ट वाली महिलाओं में आम हैं ये 4 परेशानियां, जानें कारण
मासिक धर्म का द्रव आखिर होता किससे है?
मासिक धर्म के दौरान निकलने वाला द्रव केवल रक्त नहीं होता। इसमें रक्त के साथ गर्भाशय की अंदरूनी परत से निकलने वाला ऊतक और गर्भाशय ग्रीवा से निकलने वाला श्लेष्मा भी शामिल होता है। मासिक धर्म शरीर की एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। इसे गंदा या अपवित्र मानना वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं है।

मान्यताओं पर सवाल करना क्यों जरूरी है?
मासिक धर्म को लेकर समाज में आज भी कई ऐसी धारणाएं मौजूद हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार स्पष्ट नहीं है। ऐसी मान्यताओं के कारण कई बार लड़कियों और महिलाओं की रोजमर्रा की गतिविधियों पर अनावश्यक रोक लग जाती है। तुलसी को लेकर धार्मिक आस्था और परंपराओं का अपना महत्व हो सकता है, लेकिन मासिक धर्म के दौरान किसी महिला के शरीर को अपवित्र मानना अलग विषय है। जरूरी है कि पीरियड्स को लेकर डर और शर्म के बजाय सही जानकारी और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया जाए। मासिक धर्म कोई गंदगी नहीं, बल्कि महिलाओं के शरीर की सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसलिए इससे जुड़े मिथकों को समझना और सवाल करना जरूरी है।

