40 की उम्र के बाद भी हार्ट को रखना है फिट, तो जरूर कराएं ये टेस्ट

punjabkesari.in Friday, Jun 12, 2026 - 12:53 PM (IST)

 नारी डेस्क: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी का असर सीधे दिल की सेहत पर पड़ रहा है। यही वजह है कि हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियां अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। 40 की उम्र पार करने के बाद इन समस्याओं का जोखिम और बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस उम्र के बाद नियमित हेल्थ चेकअप और कुछ जरूरी हार्ट टेस्ट करवाना बेहद जरूरी हो जाता है। समय रहते जांच कराने से दिल की बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है और शुरुआती चरण में ही समस्याओं की पहचान संभव हो जाती है।

ब्लड प्रेशर टेस्ट: सबसे जरूरी और आसान जांच

दिल की सेहत का सबसे महत्वपूर्ण संकेत ब्लड प्रेशर माना जाता है। हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से नजर नहीं आते। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने पर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहना चाहिए। सामान्य तौर पर 120/80 mmHg के आसपास का ब्लड प्रेशर स्वस्थ माना जाता है।

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लिपिड प्रोफाइल टेस्ट: कोलेस्ट्रॉल की सच्चाई जानना जरूरी

दिल की बीमारियों का एक बड़ा कारण बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल होता है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के जरिए शरीर में मौजूद अच्छे और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच की जाती है। अगर खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर बढ़ जाता है, तो यह धमनियों में जमा होकर ब्लॉकेज पैदा कर सकता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

ECG टेस्ट: दिल की धड़कनों पर नजर

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम यानी ECG एक ऐसा टेस्ट है, जो दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। इसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि दिल की धड़कन सामान्य है या नहीं। अगर किसी व्यक्ति को सीने में दर्द, घबराहट, सांस फूलने या धड़कनों में अनियमितता महसूस हो रही हो, तो डॉक्टर अक्सर ECG कराने की सलाह देते हैं। यह टेस्ट दिल से जुड़ी कई समस्याओं का शुरुआती संकेत दे सकता है।

इकोकार्डियोग्राम: दिल की अंदरूनी तस्वीर

इकोकार्डियोग्राम एक तरह का अल्ट्रासाउंड टेस्ट होता है, जिसके जरिए दिल की बनावट, वाल्व और पंपिंग क्षमता की जांच की जाती है। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, सांस लेने में दिक्कत या हार्ट से जुड़ी कोई शिकायत रहती है, उनके लिए यह जांच काफी उपयोगी मानी जाती है। ECG में किसी तरह की असामान्यता दिखने पर डॉक्टर अक्सर इकोकार्डियोग्राम कराने की सलाह देते हैं।

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स्ट्रेस टेस्ट या ट्रेडमिल टेस्ट

स्ट्रेस टेस्ट को ट्रेडमिल टेस्ट भी कहा जाता है। इस जांच में देखा जाता है कि शारीरिक गतिविधि के दौरान दिल किस तरह काम करता है। टेस्ट के दौरान व्यक्ति को ट्रेडमिल पर चलाया या दौड़ाया जाता है और उसी समय उसकी हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर और ECG को मॉनिटर किया जाता है। इससे हार्ट की क्षमता, ऑक्सीजन सप्लाई और संभावित ब्लॉकेज का पता लगाने में मदद मिलती है।

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hs-CRP टेस्ट: सूजन का खतरा पहचानने वाली जांच

हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP) टेस्ट शरीर में मौजूद सूजन के स्तर को मापता है। विशेषज्ञों के अनुसार दिल की धमनियों में होने वाली सूजन भविष्य में हार्ट डिजीज का संकेत हो सकती है। जिन लोगों को मोटापा, डायबिटीज, स्मोकिंग की आदत या परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास हो, उन्हें यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

केवल टेस्ट ही नहीं, लाइफस्टाइल भी है जरूरी

सिर्फ जांच करवाना ही पर्याप्त नहीं है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करना भी उतना ही जरूरी है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचना, वजन नियंत्रित रखना और नियमित हेल्थ चेकअप करवाना दिल की बीमारियों से बचाव में मदद कर सकता है।

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समय रहते जांच कराना है समझदारी

40 की उम्र के बाद शरीर कई बदलावों से गुजरता है। ऐसे में दिल की सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। नियमित ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल, ECG, इकोकार्डियोग्राम, स्ट्रेस टेस्ट और hs-CRP जैसी जांचें करवाकर आप अपने दिल की स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और समय रहते जरूरी कदम उठा सकते हैं।

एक छोटी-सी सावधानी भविष्य में बड़े खतरे से बचा सकती है।
 
 
 
 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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