बच्चेदानी में रसौली होने के 7 संकेत, बिना सर्जरी के मिलेगा आराम, एक चीज बिलकुल छोड़ दें!

punjabkesari.in Thursday, Feb 27, 2025 - 09:05 PM (IST)

नारी डेस्कः अनहैल्दी लाइफस्टाइल और खाना हमें कई तरह की हैल्थ प्रॉब्लम्स दे रहा है। महिलाओं को हार्मोनल समस्याएं पीसीओडी, थायराइड और वजन बढ़ने जैसी कई दिक्कतें होना अब आम हो गया है इसी के जैसे बच्चेदानी में गांठ (Fibroids) यानि रसौली होना भी खराब लाइफस्टाइल से जुड़ा ही रोग है। अगर इस रसौली का समय पर इलाज ना किया जाए तो नौबत सर्जरी तक भी पहुंच सकती है लेकिन इसे कुछ बातों का ध्यान रखकर समय पर खत्म भी किया जा सकता है। चलिए आज इसी पर बात करते हैं। रसौली की समस्या होना महिलाओं में काफी सामान्य है जिसके कई कारण हो सकते हैं जैसे हार्मोनल असंतुलन, अनुवांशिक कारण या जीवनशैली। वैसे ज्यादातर इन गांठों को ज्यादा सीरियस नहीं माना जाता लेकिन 1 प्रतिशत मामलों में बच्चेदानी की ये गांठें आकार में बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है और नजरअंदाज करने से कैंसर का रूप भी ले सकती है। 

बच्चेदानी की गांठ के शुरुआती 7 लक्षण पहचान लें

बच्चेदानी की गांठ से होने वाले लक्षणों को शुरूआत में ही पहचान लिया जाए तो अच्छा है। इसे खानपान और हैल्दी लाइफस्टाइल की मदद से ही रोका जा सकता है। अक्सर महिलाओं को गर्भाशय में फाइब्रॉइड्स (गांठ) होने का पता नहीं चलता, क्योंकि इनमें लक्षण दिखाई नहीं देते लेकिन अगर लक्षण होते हैं, तो ये गांठ के आकार, संख्या और स्थान पर निर्भर करते हैं। यहां कुछ आम लक्षण दिए गए हैं।

1. गर्भाशय में गांठ होने पर पीरियड्स में बहुत ज्यादा खून आ सकता है, जिससे एनीमिया (खून की कमी) हो सकता है। हैवी ब्लीडिंग होना रसौली होने का सबसे बड़ा और आम संकेत हैं इसके अलावा पीरियड्स बहुत कम और दर्द भरे भी हो सकते हैं। 

2. पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द और भारीपन रहना भी रसौली का संकेत है। अगर गांठ बड़ी हो जाए तो पेट के निचले हिस्से (पेल्विस) में दर्द और भारीपन लंबे समय से महसूस हो रहा है तो जांच जरूरी है। 
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3. बार-बार पेशाब आना। गांठ मूत्राशय (ब्लैडर) पर दबाव डालती है, जिससे बार-बार पेशाब करने की जरूरत महसूस होती है।

4. कब्ज की समस्या रहना भी रसौली के संकेत हो सकते हैं। अगर गांठ, आंतों पर दबाव डालती है तो कब्ज और पेट फूलने की परेशानी हो सकती है।

5. पीठ और पैरों में दर्द रहना। गर्भाशय के पीछे बनी गांठ रीढ़ की नसों पर दबाव डाल सकती है, जिससे पीठ और पैरों में दर्द होता है।

6. खून की कमी और कमजोरी, ज्यादा रक्तस्राव के कारण शरीर में खून की कमी हो सकती है, जिससे कमजोरी, चक्कर आना और जल्दी थकान महसूस होती है।

7. गर्भाशय में गांठ होने से कंसीव करने में कठिनाई आ सकती है। यह गर्भाशय की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है, जिससे गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें। समय पर इलाज से इस समस्या को रोका जा सकता है।

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जानिए बच्चेदानी में गांठ होने पर क्या नहीं खाना चाहिए?

विशेषज्ञ डॉक्टर के अनुसार, बच्चेदानी की गांठ को ठीक करने में सबसे जरूरी है कि आप खान-पान का विशेष ध्यान रखें। सही आहार खाने से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है और कुछ चीजों का सेवन बिलकुल बंद करना भी जरूरी होता है जैसे कि मैदा। 

मैदा खाना बंद करना बहुत जरूरी

सिर्फ बच्चेदानी की रसौली ही बल्कि औऱ कई बीमारियों की वजह मैदा और उससे बनी फूड आइटम्स है। इसलिए सबसे पहले खाने में मैदा को बाहर निकाले क्योंकि मैदा को रिफाइन करने से उसके सारे पोषक तत्त्व जैसे फाइबर और विटामिन निकल जाते हैं, फिर इसे खाने से आपको उर्जा तो मिलती है लेकिन पोषण नहीं। मैदा में फाइबर की भी कमी होती है, जिससे यह आसानी से पचता भी नहीं है इसलिए यदि आपको बच्चेदानी में गांठ की समस्या है तो मैदा से बनी हुई चीजें जैसे ब्रेड, बिस्कुट, केक, पिज़्ज़ा, आदि खाने से बचना चाहिए। इतना ही नहीं मैदा आपके इन्सुलिन level में भी वृद्धि करती है जिससे हार्मोंन असंतुलन तथा अन्य समस्याएं जैसे गाँठ का आकार बढ़ सकता है। इसी तरह चीनी और मीठी ड्रिंक्स पीने से भी परहेज करें।

उड़द की दाल

उड़द की दाल भी धीरे-धीरे पचने वाली होती है। ज्यादा सेवन करने से पाचन तंत्र पर दबाव डाल सकता है, जिससे गैस, एसिडिटी, और पेट फूलने जैसी हैल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।  उड़द की दाल के बजाय हल्की और आसानी से पचने वाली दालों का सेवन करें जैसे मूंग और अरहर। 

खट्टे फल और खट्टे खाद्य पदार्थ

खट्टे फलों में एसिड की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए खट्टे फल जैसे निम्बू, संतरा, टमाटर और खट्टे खाद्य पदार्थ जैसे अचार, केचप ना खाएं। ये एसिडिटी और पेट में जलन का कारण बनता है। बच्चेदानी में गांठ है तो यह खाने से दर्द और सूजन बढ़ सकती है। खट्टे फलों की जगह मीठे फल जैसे केला, सेब, या पपीता का सेवन करें।

बैंगन और आलू जैसी सब्ज़ियां

बैंगन और आलू जैसी सब्जियां सोलानेसी (Solanaceae) परिवार की सब्ज़ियां हैं, यानि इनमें सोलानिन नामक यौगिक पाया जाता है जो शरीर में  सूजन, गैस, और पाचन समस्याओं का कारण बन सकता है इसलिए इन सब्जियों का या तो सेवन बिलकुल न करें या फिर सीमित मात्रा में करें ताकि आपकी बच्चेदानी की गाँठ की समस्या और अधिक गंभीर न हो।

अम्ल बढ़ाने वाले भोजन

अगर बच्चेदानी में गांठ है तो हलका और ताज़ा भोजन करें। अम्लीय भोजन जैसे तला-भुना, मांस, चीनी, और खट्टे खाद्य पदार्थ पेट में अम्ल की मात्रा को बढाते हैं तथा इससे जलन, सूजन, दर्द, और ऐसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चेदानी में गांठ है तो अम्लीय भोजन आपकी तकलीफ को और अधिक बढ़ा सकते हैं।

कैफीन युक्त चीजें

चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन पाया जाता है, जो शरीर में हार्मोनल असंतुलन (hormonal imbalance) पैदा कर सकता है। इससे एस्ट्रोजन बढ़ सकता है, जिससे बच्चेदानी की गांठ (fibroids) और बड़ी हो सकती है।

फास्ट फूड

आजकल फास्ट फूड का क्रेज बहुत बढ़ गया है लेकिन यह सेहत के लिए नुकसानदायक है। इनमें पोषण की कमी होती है और ट्रांस फैट बहुत अधिक जो शरीर में सूजन और हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं। यह फाइब्रॉइड को बढ़ा सकता है।

शराब और धूम्रपान

शराब और सिगरेट पीने से शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ते हैं, जो बच्चेदानी में गांठ की समस्या को और खराब कर सकते हैं। यह आदतें न केवल फाइब्रॉइड को बढ़ाती हैं, बल्कि प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) पर भी बुरा असर डालती हैं।

डेयरी और सोया प्रोडक्ट्स

दूध, पनीर, दही और सोया उत्पाद आमतौर पर फायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन फाइब्रॉइड होने पर इनसे बचना चाहिए। इनमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो शरीर में एस्ट्रोजन को बढ़ा सकते हैं और फाइब्रॉइड की समस्या को गंभीर बना सकते हैं।

कैसे रखें सेहत का ध्यान?

ऊपर बताए गए खाद्य पदार्थों से बचें।
ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज को आहार में शामिल करें।
यदि बच्चेदानी में गांठ के कारण गर्भधारण में समस्या आ रही हो, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

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बच्चेदानी में गांठ का इलाज 

गर्भाशय में गांठ का इलाज कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि लक्षणों की गंभीरता, गांठ का आकार और जगह और मरीज की प्रजनन क्षमता को बनाए रखने की इच्छा। अगर स्थिति गंभीर है तो सर्जरी की मदद ली जा सकती है। वहीं डॉक्टर की बताई दवाइयों की मदद से भी इसे ठीक किया जा सकता है। 
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बच्चेदानी में गांठ होने पर क्या खाएं?

अगर बच्चेदानी में गांठ (रसौली) है, तो सही खानपान से इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। डॉक्टर की सलाह के साथ-साथ हेल्दी डाइट लेना भी जरूरी है।

सेबः सेब में फाइबर और विटामिन होते हैं, जो शरीर में सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। रोजाना 1 सेब खाना फाइब्रॉइड को बढ़ने से रोक सकता है।

कच्ची हल्दीः हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने और कोशिकाओं को ठीक रखने में मदद करते हैं। इसे दूध या गर्म पानी में मिलाकर पी सकते हैं।

बादामः बादाम में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो यूट्रस (गर्भाशय) की सेहत के लिए फायदेमंद है। यह शरीर में हार्मोन संतुलित रखता है और सूजन कम करता है। रोजाना 7-8 बादाम खाना लाभकारी हो सकता है।

हरी पत्तेदार सब्जियांः यह शरीर में हार्मोन संतुलित रखने में मदद करती हैं।

साबुत अनाजः दलिया, ब्राउन राइस, और जौ फाइबर से भरपूर होते हैं और फाइब्रॉइड को बढ़ने से रोकते हैं।

फ्लैक्स सीड (अलसी के बीज): इसमें मौजूद ओमेगा-3 हार्मोन बैलेंस बनाए रखते हैं।

डिस्कलेमरः इसके लिए आपको हेल्दी और संतुलित आहार लेना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह से सही खानपान अपनाएं। नियमित रूप से व्यायाम करें और लक्षण दिखे तो बिना देरी किए डॉक्टरी चेकअप जरूर करवाएं। 


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Content Writer

Vandana

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