सिर्फ सिगरेट नहीं, ये आदतें भी घटा देती हैं स्पर्म काउंट; बढ़ सकती है पिता बनने में मुश्किल

punjabkesari.in Saturday, Jul 04, 2026 - 02:04 PM (IST)

नारी डेस्क:  पुरुषों की फर्टिलिटी से जुड़ी एक आम समस्या है लो स्पर्म काउंट, जिसे मेडिकल भाषा में ओलिगोस्पर्मिया कहा जाता है। जब एक मिलीलीटर वीर्य में स्पर्म की संख्या 1.5 करोड़ से कम हो जाती है, तो इसे सामान्य से कम माना जाता है। वहीं अगर वीर्य में स्पर्म बिल्कुल न हों, तो इस स्थिति को एजूस्पर्मिया कहा जाता है। ऐसी स्थिति में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है।

क्या होते हैं इसके लक्षण

लो स्पर्म काउंट का सबसे बड़ा संकेत यही है कि लंबे समय तक कोशिश करने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो पाता। कई मामलों में इसके अलावा कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि कुछ पुरुषों में हार्मोन असंतुलन की वजह से यौन इच्छा में कमी, इरेक्शन से जुड़ी समस्या, टेस्टिकल में दर्द, सूजन या गांठ जैसी परेशानियां भी देखने को मिल सकती हैं।

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सिर्फ धूम्रपान नहीं, ये कारण भी जिम्मेदार

अक्सर लोग मानते हैं कि स्पर्म काउंट कम होने की वजह सिर्फ सिगरेट या तंबाकू है, लेकिन इसके पीछे कई और कारण भी हो सकते हैं। मोटापा, लगातार तनाव, ज्यादा शराब का सेवन और नशीले पदार्थ भी पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर डालते हैं। इसके अलावा हार्मोन असंतुलन, थायरॉयड की समस्या, वैरिकोसील जैसी बीमारी, कुछ इंफेक्शन और लंबे समय तक कुछ दवाओं का सेवन भी स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या को प्रभावित कर सकता है।

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कब करानी चाहिए जांच

अगर कोई कपल एक साल तक बिना किसी गर्भनिरोधक के नियमित प्रयास के बाद भी गर्भधारण नहीं कर पाता, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है। जिन लोगों को पहले से टेस्टिकल या प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या रही है, उन्हें भी समय पर जांच करानी चाहिए ताकि सही कारण का पता लगाया जा सके।

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क्या इसे ठीक किया जा सकता है

अच्छी बात यह है कि हर केस में लो स्पर्म काउंट का मतलब बांझपन नहीं होता। कई मामलों में लाइफस्टाइल सुधार और सही इलाज से स्थिति बेहतर की जा सकती है। संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल, तनाव कम करना और धूम्रपान-शराब से दूरी बनाना स्पर्म की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है। इसके अलावा आधुनिक फर्टिलिटी ट्रीटमेंट्स की मदद से भी गर्भधारण की संभावना बढ़ाई जा सकती है।
  
 


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Content Editor

Priya Yadav

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