Shweta Kawatra को 40 की उम्र में हुआ मेनोपॉज, थेरेपी के बाद शरीर में आया बड़ा बदलाव

punjabkesari.in Saturday, Jul 18, 2026 - 02:04 PM (IST)

नारी डेस्क : टीवी के सुपरहिट शो 'कहानी घर-घर की' से घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री श्वेता क्वात्रा ने हाल ही में अपनी सेहत से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने कई महिलाओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। अभिनेत्री ने बताया कि 40 साल की उम्र में उन्हें पता चला कि वह मेनोपॉज की अवस्था में पहुंच चुकी हैं। यह खबर उनके लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। हालांकि, उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी सेहत को बेहतर बनाने के लिए वैकल्पिक उपचार और सकारात्मक सोच का सहारा लिया।

40 की उम्र में चला मेनोपॉज का पता

शाइनी नारंग के साथ बातचीत में श्वेता क्वात्रा ने बताया कि उन्होंने 36 साल की उम्र में अपनी बेटी को जन्म दिया था। कुछ वर्षों बाद जब उन्होंने नियमित स्वास्थ्य जांच कराई, तो उनकी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) ने बताया कि उन्हें समय से पहले मेनोपॉज हो चुका है। यह सुनकर वह पूरी तरह टूट गई थीं और उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि इतनी कम उम्र में उनके साथ ऐसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि उस वक्त उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी जिंदगी अचानक बदल गई हो। इस स्थिति को स्वीकार करना उनके लिए बेहद मुश्किल था।

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हार नहीं मानी, अपनाई एक्यूपंक्चर (Acupuncture) थेरेपी

श्वेता ने बताया कि उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए दूसरे विकल्प तलाशने शुरू किए। इसी दौरान उन्हें एक्यूपंक्चर थेरेपी के बारे में जानकारी मिली। विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद उन्होंने यह उपचार शुरू किया। अभिनेत्री के मुताबिक, डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उनके शरीर में ऊर्जा का असंतुलन और एक ऑटोइम्यून समस्या हार्मोनल बदलाव की वजह बन रही थी। नियमित थेरेपी और देखभाल के बाद उन्हें धीरे-धीरे अपनी सेहत में सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगे।

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'मेरे पीरियड्स फिर से शुरू हो गए'

श्वेता क्वात्रा ने दावा किया कि थेरेपी के बाद उनके शरीर में सुधार हुआ और कुछ समय बाद उनके मासिक धर्म (Periods) भी दोबारा शुरू हो गए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और किसी भी उपचार का असर सभी लोगों पर एक जैसा नहीं होता। अभिनेत्री का कहना है कि इलाज के साथ-साथ उनकी सकारात्मक सोच और मानसिक मजबूती ने भी इस पूरे सफर में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने नियमित रूप से ध्यान (Meditation), मंत्र जाप और आध्यात्मिक अभ्यास किए, जिससे उन्हें मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिली। उनके अनुसार, किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण भी बेहद जरूरी होता है।

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महिलाओं को दी खास सलाह

श्वेता क्वात्रा ने महिलाओं से अपील की कि मेनोपॉज को लेकर घबराने या निराश होने की बजाय समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें। उन्होंने कहा कि किसी भी वैकल्पिक उपचार को अपनाने से पहले चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए किसी एक व्यक्ति के अनुभव को सभी पर लागू नहीं किया जा सकता। सही इलाज, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस दौर को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।


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Content Editor

Monika

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