नीले ड्रम वाली मुस्कान अब जेल में और भी 'स्मार्ट' दिखने लगी… गवाहों के मुंह से क्यों निकल रही ये बात

punjabkesari.in Thursday, Aug 28, 2025 - 11:35 AM (IST)

नारी डेस्क: सौरभ राजपूत हत्याकांड की आरोपी मुस्कान और साहिल की कहानी अब जेल के भीतर एक नया मोड़ ले रही है। जहां लोगों को लगा था कि जेल की सलाखों के पीछे ये दोनों टूट जाएंगे, वहीं अब कहा जा रहा है कि दोनों और भी निखर गए हैं। मार्च 2025 में उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में हुए सौरभ राजपूत मर्डर केस ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस केस में सौरभ की पत्नी मुस्कान पर अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर साजिशन हत्या करने का आरोप है। दोनों ने मिलकर सौरभ को मार डाला, फिर शव के टुकड़े कर उसे नीले ड्रम में भर दिया और ऊपर से सीमेंट डालकर छुपा दिया। यही "नीला ड्रम" इस पूरे मामले की सबसे बड़ी पहचान बन गया और मुस्कान को "नीले ड्रम वाली मुस्कान" कहा जाने लगा।

अब जेल में बदल गई है तस्वीर

इस मामले के आरोपी मुस्कान और साहिल इस वक्त जेल में बंद हैं। लेकिन जेल से आ रही खबरें अब चौंका रही हैं। जहां माना जाता है कि जेल की जिंदगी इंसान को तोड़ देती है, वहीं मुस्कान और साहिल का अंदाज़ कुछ और ही कहानी कह रहा है। गवाहों के मुताबिक, दोनों अब पहले से ज्यादा स्मार्ट, आत्मविश्वासी और सजग नजर आ रहे हैं।

 मुस्कान की प्रेग्नेंसी ने बदल दिया रूप

बताया जा रहा है कि मुस्कान गर्भवती है। इसी वजह से उसके चेहरे पर अलग-सी चमक आ गई है। चेहरे की थकावट और घबराहट की जगह अब आत्मविश्वास और निखार देखा जा रहा है। जेल में नियमित दिनचर्या, समय पर खाना, नींद और व्यायाम ने भी उसके शरीर को बेहतर बना दिया है। पहले जो मुस्कान कोर्ट में घबराई हुई नजर आती थी, अब वही बिलकुल संयमित, शांत और आत्मनिर्भर दिखाई देती है।

साहिल का नया रूप

साहिल ने भी अब अपना हेयरस्टाइल और दाढ़ी बदल ली है। उसके चेहरे और शरीर में भी पहले से बदलाव देखा जा रहा है। जेल के अनुशासन ने उसकी सेहत और हावभाव पर असर डाला है। वो अब ज्यादा साफ-सुथरा और व्यवस्थित नजर आता है। जेल स्टाफ तक मानता है कि मुस्कान और साहिल एक-दूसरे की ताकत बन गए हैं और दोनों एक साथ होने की वजह से मानसिक रूप से भी मजबूत हैं।

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 गवाह भी हो गए हैरान

जिन गवाहों ने मुस्कान को पहले देखा था, अब उनका कहना है कि यह वही लड़की है, लेकिन अब उसमें एक अलग ही तरह की स्मार्टनेस नजर आती है। कुछ गवाह कहते हैं कि उसका बर्ताव ऐसा लगता है जैसे वह जेल में नहीं, बल्कि किसी किरदार की तैयारी कर रही हो।उसकी चाल, उसकी नजरें, बात करने का ढंग  सब कुछ बदला हुआ है। वह न तो डरती है और न ही घबराती है।

 क्या यह सब 'प्लानिंग' है?

कुछ लोगों का मानना है कि मुस्कान का यह नया रूप कहीं न कहीं अदालत को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। हो सकता है कि वह खुद को मासूम और संतुलित दिखाकर नरमी की उम्मीद कर रही हो। जबकि कुछ का मानना है कि ये बदलाव जेल के माहौल और दिनचर्या की वजह से स्वाभाविक हैं।

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 नीले ड्रम की छाया अब भी बनी हुई है

लोग यह भी नहीं भूल सकते कि इस कहानी की शुरुआत एक नीले ड्रम से हुई थी वही ड्रम जिसमें सौरभ के टुकड़े छुपाए गए थे। वही ड्रम आज भी मुस्कान की पहचान बना हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब वही मुस्कान अलग रूप में लोगों की नजरों में है।

 समाज की मिली-जुली राय

मुस्कान और साहिल के बदले अंदाज को लेकर समाज की राय दो भागों में बंटी हुई है एक वर्ग का कहना है: जेल में रहकर भी मुस्कान ने खुद को निखार लिया है, वह मजबूत और आत्मनिर्भर बन गई है। वहीं दूसरा वर्ग मानता है: यह सब एक रणनीति है, ताकि अदालत के सामने खुद को एक बदली हुई, निर्दोष महिला के रूप में पेश किया जा सके।

समाजशास्त्रियों का मानना है कि गंभीर अपराधों में आरोपी का व्यवहार कोर्ट के फैसले को प्रभावित कर सकता है। यह सवाल उठता है कि क्या इंसान का असली रूप अपराध करते वक्त दिखता है या सजा काटते वक्त?

जैसे-जैसे मुकदमा आगे बढ़ेगा, सबकी नजर इस पर टिकी रहेगी कि मुस्कान और साहिल की यह "स्मार्टनेस" अदालत के फैसले को कैसे प्रभावित करती है। क्या यह मासूमियत का चेहरा साबित होगा, या चालाकी का सबूत?  


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Content Editor

Priya Yadav

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