घने ब्रेस्ट वाली महिलाओं पर Breast Cancer का संकट!  हर साल करवानी चाहिए जांच

punjabkesari.in Saturday, Aug 08, 2026 - 09:57 AM (IST)

नारी डेस्क: ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं की ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग का तरीका बदल रहा है। हाल ही में जारी एक समीक्षा के अनुसार, इसका मतलब है कि अब स्क्रीनिंग सिर्फ़ उम्र के आधार पर नहीं होगी। इसके बजाय, स्क्रीनिंग उनके व्यक्तिगत जोखिम (risk) के हिसाब से तय की जाएगी। इसका मतलब ब्रेस्ट डेंसिटी (घनेपन), पारिवारिक इतिहास, जेनेटिक टेस्ट और/या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी जानकारी का इस्तेमाल करके उन महिलाओं की पहचान करना और उन पर ध्यान देना हो सकता है जिन्हें ब्रेस्ट कैंसर का ज़्यादा खतरा है। इसे अगले दस सालों में धीरे-धीरे लागू किया जाएगा। तो उन महिलाओं के लिए इसका क्या मतलब हो सकता है जिन्हें अनजाने में ज़्यादा खतरा हो सकता है?

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क्या है risk ?


महिला किस जोखिम श्रेणी (risk category) में है, इसके आधार पर स्क्रीनिंग करने से कैंसर का जल्दी पता लगाने और ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए इमेजिंग के प्रकार और आवृत्ति (frequency) को व्यक्तिगत रूप से तय किया जा सकता है। इसे जोखिम-आधारित स्क्रीनिंग (risk-stratified screening) कहा जाता है। लेकिन अभी, ब्रेस्टस्क्रीन प्रोग्राम में जोखिम-आधारित स्क्रीनिंग सिर्फ़ उन महिलाओं के लिए सिफारिशों तक सीमित है, जिनके परिवार में ब्रेस्ट और/या ओवेरियन कैंसर का महत्वपूर्ण इतिहास रहा है; उन्हें हर दो साल के बजाय हर साल स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। हम बहुत कुछ जानते हैं कि किन वजहों से किसी को ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा ज़्यादा होता है। 


कैसे किया जाएगा जानकारी का इस्तेमाल

घने ब्रेस्ट (Dense breasts): ब्रेस्ट कैंसर के सबसे बड़े और आम जोखिम कारकों में से एक है ब्रेस्ट डेंसिटी (ब्रेस्ट का घनत्व) मैमोग्राम पर दिखने वाले सफेद हिस्से जो फाइब्रोग्लैंडुलर टिश्यू को दिखाते हैं। घने ब्रेस्ट वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने और स्क्रीनिंग के दौरान कैंसर का पता न चल पाने का खतरा काफी ज़्यादा होता है। ब्रेस्टस्क्रीन की सिफारिश है कि स्क्रीनिंग के समय सभी महिलाओं को उनके ब्रेस्ट डेंसिटी के बारे में बताया जाए। इसने घने ब्रेस्ट वाली महिलाओं से सलाह-मशविरा करते समय GP (डॉक्टरों) के लिए गाइडेंस भी जारी की है। 

पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक टेस्ट: ऑनलाइन जोखिम का आकलन करने वाले टूल, ब्रेस्ट डेंसिटी (स्तन के घनत्व) को ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम से जुड़ी अन्य जानकारी - जैसे पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक टेस्ट के नतीजोंके साथ मिलाकर किसी महिला के व्यक्तिगत जोखिम का हिसाब लगाते हैं। इनमें iPrevent शामिल है, जिसका इस्तेमाल महिलाएं कर सकती हैं और फिर नतीजों पर अपने GP (डॉक्टर) से चर्चा कर सकती हैं। 

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 AI के बारे में क्या?

AI का इस्तेमाल कैंसर का पता लगाने के लिए मैमोग्राफी इमेजिंग को समझने में मदद के लिए किया जा सकता है। यह बीमारी के भविष्य के जोखिम का अनुमान लगाने में भी मदद कर सकता है। इससे रेडियोलॉजिस्ट का काम का बोझ कम हो सकता है और यह पता चल सकता है कि आगे की जांच के लिए किसे वापस बुलाना है। ऑस्ट्रेलियाई डेटा का इस्तेमाल करके ट्रेन किए गए AI मॉडल का अभी BreastScreen Victoria में ट्रायल किया जा रहा है, और जल्द ही South Australia में भी किया जाएगा।


महिलाओं के लिए जरूरी बात 

दुर्भाग्य से, जोखिम से जुड़ी इस ज़्यादातर जानकारी को पाने और इस्तेमाल करने के तरीके अभी तक विकसित नहीं किए गए हैं।
जोखिम का अनुमान लगाने के नए तरीकों और नई स्क्रीनिंग तकनीकों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत है। अलग-अलग जोखिम कैटेगरी वाले लोगों को मैनेज करने के लिए साफ़ और एक जैसे तरीके बनाने के लिए कंज्यूमर और स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर काम करने की भी ज़रूरत है। महिलाओं को सलाह दी जाती है कि जब अगली बार समय हो तो वे BreastScreen में अपना अगला मैमोग्राम करवाएं। 40 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाएं हर दो साल में मुफ़्त मैमोग्राम करवा सकती हैं और 50-74 साल की महिलाओं को स्क्रीनिंग के लिए बुलाया जाता है। महिलाओं को यह भी सलाह दी जाती है कि वे अपने ब्रेस्ट की सेहत के बारे में नियमित रूप से डॉक्टर से बात करें और अगर उन्हें कोई नए लक्षण दिखें, तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं। इन लक्षणों में ब्रेस्ट में गांठ, निप्पल से डिस्चार्ज, ब्रेस्ट के आकार या त्वचा में बदलाव, या ब्रेस्ट में नया और लगातार दर्द शामिल हो सकते हैं।
 


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Content Writer

vasudha

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