पंकज भदौरिया को हुआ ब्रेस्ट कैंसर! महिलाओं से की अपील, ये 3 Test जरूर करवाएं

punjabkesari.in Wednesday, Jun 03, 2026 - 01:55 PM (IST)

 नारी डेस्क:  मास्टरशेफ इंडिया सीजन 1 की विजेता और मशहूर शेफ पंकज भदौरिया ने हाल ही में सोशल मीडिया पर बताया  कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर डायग्नोज हुआ है। इस खबर के बाद फैंस और इंडस्ट्री में चिंता का माहौल है। पंकज ने अपनी पोस्ट और वीडियो के जरिए महिलाओं से खास अपील की है कि वे समय-समय पर प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप जरूर करवाएं और किसी भी लक्षण का इंतजार न करें। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में फुल बॉडी चेकअप करवाया था, जिससे यह साफ हो जाता है कि नियमित जांच कई बार बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ लेती है। उनके अनुसार, जागरूकता और समय पर जांच ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा तरीका है।

शुरुआती जांच जरूरी 

ब्रेस्ट कैंसर आज महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक बन चुका है। अक्सर महिलाएं तब तक जांच नहीं करवातीं जब तक शरीर में गांठ या कोई असामान्य बदलाव महसूस न हो जाए। लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि कई मामलों में बीमारी शुरुआती स्टेज में बिना किसी साफ लक्षण के भी विकसित हो सकती है। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग और कुछ खास टेस्ट समय रहते बीमारी का पता लगाने में मदद करते हैं, जिससे इलाज आसान और असरदार हो जाता है।

 मैमोग्राम (Mammogram) – सबसे जरूरी स्क्रीनिंग टेस्ट

मैमोग्राम को ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए सबसे प्रभावी टेस्ट माना जाता है। इसमें ब्रेस्ट का एक्स-रे किया जाता है, जिससे किसी भी तरह की असामान्य गांठ या टिश्यू बदलाव का पता लगाया जा सकता है। डॉक्टर आमतौर पर 40 साल या उससे ज्यादा उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राम कराने की सलाह देते हैं। यह प्रक्रिया कुछ ही मिनटों की होती है, लेकिन इस दौरान ब्रेस्ट को हल्का दबाव दिया जाता है, जिससे थोड़ी असुविधा महसूस हो सकती है। कई रिसर्च के अनुसार, नियमित मैमोग्राम स्क्रीनिंग से ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड – अंदरूनी स्थिति की स्पष्ट तस्वीर

ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड एक और महत्वपूर्ण जांच है, जिसमें हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स के जरिए ब्रेस्ट के अंदर की तस्वीर तैयार की जाती है। इस टेस्ट में डॉक्टर या रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड प्रोब की मदद से ब्रेस्ट की जांच करते हैं। पहले त्वचा पर एक जेल लगाया जाता है, फिर हल्के दबाव के साथ स्कैन किया जाता है। यह प्रक्रिया लगभग 10 से 15 मिनट में पूरी हो जाती है। यह टेस्ट खासकर उन मामलों में ज्यादा उपयोगी होता है, जहां मैमोग्राम में कोई अस्पष्ट या संदिग्ध परिणाम मिलता है।

 ब्रेस्ट बायोप्सी – अंतिम पुष्टि का टेस्ट

अगर मैमोग्राम या अल्ट्रासाउंड में किसी तरह की गांठ या असामान्य बदलाव नजर आता है, तो डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं। इस प्रक्रिया में प्रभावित हिस्से से थोड़ा टिश्यू लिया जाता है और उसे लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। वहीं से यह तय किया जाता है कि वह बदलाव कैंसर है या नहीं। हालांकि यह टेस्ट थोड़ा संवेदनशील होता है, लेकिन बीमारी की सटीक पहचान के लिए यह सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है।

पंकज भदौरिया की अपील – जागरूक रहें, समय पर जांच करवाएं

पंकज भदौरिया ने अपने संदेश में कहा कि लोगों को सिर्फ लक्षण दिखने का इंतजार नहीं करना चाहिए। 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए नियमित प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि अगर बीमारी की पहचान शुरुआती स्टेज पर हो जाए, तो इलाज आसान हो जाता है और रिकवरी की संभावना भी काफी बढ़ जाती है।
  

  


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Content Editor

Priya Yadav

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