अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, मारे गए 400 से ज्यादा लोग और 250 हुए घायल
punjabkesari.in Tuesday, Mar 17, 2026 - 10:12 AM (IST)
नारी डेस्क: टोलो न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार अफगान अधिकारियों ने बताया कि काबुल में एक ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर पर पाकिस्तानी सेना के हवाई हमले में 400 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों अन्य घायल हो गए। यह हमला हाल के वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान में आम नागरिकों पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक बन गया है। टोलो न्यूज़ ने अफ़ग़ान अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह हमला देर रात हुआ और इससे रिहैबिलिटेशन सेंटर को भारी नुकसान पहुंचा। हमले के समय सेंटर में मौजूद कई पीड़ित मरीज़ और स्टाफ़ थे।
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बढ़ सकती है मरने वालों की संख्या
अफ़ग़ानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के उप प्रवक्ता, हमदुल्ला फितरत के अनुसार, घटना के बाद से हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। टोलो न्यूज़ ने फितरत के हवाले से बताया- "कल रात काबुल में एक ड्रग रिहैबिलिटेशन सेंटर पर पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई बमबारी के बाद, शहीदों की संख्या अब तक बढ़कर 400 हो गई है, जबकि घायलों की संख्या 250 तक पहुंच गई है।" स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि धमाके के बाद आपातकालीन टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। काबुल भर के अस्पतालों में बड़ी संख्या में घायल लोगों को भर्ती कराया गया। अधिकारियों को आशंका है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है।
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आम नागरिकों पर हमला करता है पाकिस्तान
अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक लंबी और संवेदनशील सीमा है। सुरक्षा से जुड़े मुद्दों और सीमा पार होने वाले ऑपरेशन्स की वजह से इन दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में बार-बार तनाव आया है। TOLOnews के अनुसार, पहले भी सीमा पार से होने वाले हमलों में पाकिस्तानी सेना ने मुख्य रूप से अफ़गानी आम नागरिकों को ही निशाना बनाया है। पहले हुई कुछ घटनाओं में सीमावर्ती प्रांतों में महिलाएं और बच्चे भी प्रभावित हुए थे, जिसकी वजह से अफ़गानिस्तान के अंदर विरोध प्रदर्शन हुए थे और इस पर कड़ी निंदा की गई थी। इस घटना की वजह से काबुल और इस्लामाबाद के बीच पहले से ही नाज़ुक रिश्तों में और ज़्यादा तनाव आने की संभावना है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय जानकारों ने अफ़गानिस्तान में स्थिरता बनाए रखने की कोशिशों पर इस तरह के हमलों के दूरगामी परिणामों के बारे में चेतावनी दी है। अफ़गानिस्तान में 2021 में अमेरिका और NATO की सेनाओं के हटने के बाद से ही कई सालों तक संघर्ष जारी रहा है।

