लंग कैंसर और मांसपेशियों की कमजोरी का एक साथ होगा इलाज, वैज्ञानिकों ने ढूंढा नया तरीका
punjabkesari.in Thursday, Apr 09, 2026 - 10:38 AM (IST)
नारी डेस्क: वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है, जो फेफड़ों के कैंसर यानी लंग कैंसर और उससे जुड़ी मांसपेशियों की कमजोरी (कैशेक्सिया) का एक साथ इलाज करने में मदद कर सकती है। यह रिसर्च ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की है और इसे जर्नल Journal of Controlled Release में प्रकाशित किया गया है। वैज्ञानिकों ने फेफड़ों के कैंसर यानी लंग कैंसर के इलाज के लिए एक नई तकनीक विकसित की है, जो सिर्फ कैंसर ही नहीं बल्कि उससे जुड़ी मांसपेशियों की कमजोरी को भी एक साथ ठीक करने की क्षमता रखती है। यह शोध ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है और इसे प्रसिद्ध वैज्ञानिक जर्नल Journal of Controlled Release में प्रकाशित किया गया है। शुरुआती नतीजे बताते हैं कि यह तकनीक भविष्य में कैंसर के इलाज का तरीका बदल सकती है।
mRNA आधारित नई तकनीक क्या है?
इस नई तकनीक में mRNA (मैसेंजर RNA) का उपयोग किया गया है, जिसे बहुत छोटे-छोटे कणों यानी लिपिड नैनोपार्टिकल्स में भरकर शरीर में भेजा जाता है। इन नैनोपार्टिकल्स के अंदर Follistatin protein बनाने वाला mRNA मौजूद होता है। जब ये कण शरीर के अंदर पहुंचते हैं, तो यह mRNA शरीर की कोशिकाओं को फोलिस्टैटिन प्रोटीन बनाने का संकेत देता है। यह प्रोटीन शरीर में दोहरी भूमिका निभाता है एक तरफ यह कैंसर के ट्यूमर की वृद्धि को रोकने में मदद करता है और दूसरी तरफ मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
🇷🇺 रूस की बड़ी उपलब्धि: पर्सनलाइज़्ड कैंसर वैक्सीन की सफल शुरुआत
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) April 3, 2026
रूस ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपनी पहली व्यक्तिगत (Personalized) कैंसर वैक्सीन “Neooncovac” एक मेलेनोमा (त्वचा कैंसर) के मरीज को सफलतापूर्वक दी है.
यह उपचार National Medical… pic.twitter.com/h0EI5cO2nV
यह तकनीक शरीर में कैसे काम करती है?
जब ये लिपिड नैनोपार्टिकल्स शरीर में प्रवेश करते हैं, तो वे खून में मौजूद विट्रोनेक्टिन नाम के प्रोटीन से जुड़ जाते हैं। यह प्रक्रिया इन्हें सही जगह तक पहुंचने में मदद करती है। इसके बाद ये सीधे फेफड़ों के ट्यूमर तक पहुंचते हैं, जहां ट्यूमर की सतह पर मौजूद इंटीग्रिन रिसेप्टर्स इन कणों को पहचानकर अपने अंदर ले लेते हैं। इस तरह दवा सीधे उसी जगह पर पहुंचती है जहां उसकी जरूरत होती है, जिससे इलाज ज्यादा प्रभावी बनता है और शरीर के बाकी हिस्सों पर असर कम पड़ता है।
ये भी पढ़ें: शुगर कंट्रोल करने वाली यह दवा छीन सकती है आंखों की रोशनी!
वैज्ञानिकों का क्या कहना है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, अब तक सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि mRNA आधारित दवाओं को सीधे फेफड़ों के ट्यूमर तक कैसे पहुंचाया जाए। पुरानी तकनीकों में दवाएं अक्सर लिवर में जमा हो जाती थीं, जिससे उनका असर कम हो जाता था। लेकिन इस नई तकनीक के जरिए दवा सही जगह तक पहुंच रही है। प्रयोगों में देखा गया कि इस विधि से ट्यूमर के आकार में लगभग 2.5 गुना ज्यादा कमी आई, जो इसे बेहद प्रभावी बनाता है।
ये भी पढ़ें: तांबे के बर्तन में पानी पीना कब हो सकता है जानलेवा? एक्सपर्ट्स से जानें
यह इलाज क्यों खास है?
लंग कैंसर के मरीजों में अक्सर कैशेक्सिया नाम की गंभीर समस्या देखी जाती है। इस स्थिति में मरीज का वजन तेजी से कम होने लगता है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, भले ही वह पर्याप्त भोजन कर रहा हो। यह समस्या मरीज की हालत को और खराब कर देती है और इलाज को मुश्किल बना देती है। इस नई थेरेपी की खास बात यह है कि यह एक साथ कैंसर और मांसपेशियों की कमजोरी दोनों पर काम करती है, जिससे मरीज को ज्यादा फायदा मिल सकता है।

क्या इसके साइड इफेक्ट हैं?
अब तक किए गए शुरुआती परीक्षणों में इस नई थेरेपी के कोई गंभीर साइड इफेक्ट सामने नहीं आए हैं, जो इसे और भी खास बनाता है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रिसर्च अभी शुरुआती चरण में है और इसे इंसानों पर इस्तेमाल करने से पहले और कई परीक्षणों की जरूरत होगी। अगर आगे भी इसके नतीजे अच्छे रहते हैं, तो यह तकनीक भविष्य में कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है।
सरल भाषा में समझें तो यह नई mRNA तकनीक एक “डबल फायदा” देने वाली थेरेपी है यह कैंसर को कम करने के साथ-साथ शरीर की ताकत भी बढ़ाती है। अभी यह शुरुआती स्टेज में है, लेकिन अगर आगे सफल रही, तो यह लंग कैंसर के मरीजों के लिए एक नई उम्मीद बन सकती है।

