किचन में भूलकर भी न रखें टूटा चकला-बेलन, वरना झेलने पड़ सकते हैं ये गंभीर परिणाम
punjabkesari.in Monday, Jun 29, 2026 - 05:03 PM (IST)
नारी डेस्क : भारतीय रसोई में चकला-बेलन सिर्फ एक रसोई उपकरण नहीं, बल्कि अन्न और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई घर की हर वस्तु घर की सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित करती है। ऐसे में अगर रसोई में टूटा, चटका या खराब चकला-बेलन रखा हो, तो यह घर की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकता है। आइए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र में टूटे हुए चकला-बेलन को क्यों अशुभ माना जाता है और इससे जुड़े कौन-कौन से नियम बताए गए हैं।
घर में बढ़ सकती है आर्थिक तंगी
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोई में टूटा या चटका हुआ चकला-बेलन रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं, जिससे आर्थिक परेशानियां, धन हानि और दरिद्रता का सामना करना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य पर पड़ सकता है बुरा प्रभाव
मान्यता है कि अगर चकला या बेलन अचानक टूट जाए, तो इसका असर घर के सदस्यों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। ऐसे में टूटे हुए चकला-बेलन को तुरंत बदल देना चाहिए और उसकी जगह नया चकला-बेलन इस्तेमाल करना चाहिए।
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ग्रह दोष बढ़ने की मान्यता
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, टूटे हुए चकला-बेलन का इस्तेमाल करने से राहु, केतु और शनि के नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं। इससे नौकरी और कारोबार में रुकावटें, मानसिक तनाव और बार-बार असफलता जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

इन बातों का भी रखें खास ध्यान
अगर रोटी बेलते समय चकले से चर-चर की आवाज आने लगे, तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है। यह चकले के टूटने या असंतुलित होने का संकेत हो सकता है।
रात में चकला-बेलन को गंदा छोड़ना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता। इस्तेमाल के बाद इसे साफ करके ही रखें।
चकला कभी भी उल्टा करके नहीं रखना चाहिए, इसे हमेशा सीधा रखें।
बेलन को चकले के ऊपर लिटाकर रखने के बजाय अलग और सीधा रखने की सलाह दी जाती है।
नया चकला-बेलन बुधवार या गुरुवार को खरीदना शुभ माना जाता है।
मंगलवार और शनिवार को नया चकला-बेलन खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।
वास्तु के अनुसार, लकड़ी या मार्बल का चकला-बेलन शुभ माना जाता है, जबकि प्लास्टिक के चकला-बेलन के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी जाती है।

ध्यान रखें : वास्तु शास्त्र से जुड़ी ये मान्यताएं पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। इन्हें धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से देखा जाता है। किसी भी तरह की समस्या का समाधान केवल वास्तु उपायों पर निर्भर न होकर व्यावहारिक और आवश्यक कदमों के साथ करना चाहिए।

