बच्चों का मुंडन करवाना क्यों होता है जरूरी? बाल कटवाने के लिए ये दिन होते हैं सबसे शुभ
punjabkesari.in Saturday, Feb 14, 2026 - 05:41 PM (IST)
नारी डेस्क: हिंदू धर्म में मुंडन संस्कार (चूड़ाकर्म) 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है। यह शिशु के जन्म के बाद किए जाने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल है। मान्यता है कि जन्म के समय आए बाल पूर्व जन्म के संस्कारों और अशुद्धियों का प्रतीक होते हैं। मुंडन करने से नकारात्मकता दूर होती है और बच्चे का जीवन शुभ बनता है।

मुंडन के संभावित लाभ
मुंडन करने से बच्चे में की बल बुद्धि का विकास होता है। ज्योतिष शास्त्र में माना गया है कि यदि बच्चे के बाल नहीं कटवाएं गए हैं और बच्चा बाहर जाता है तो उसे पर ऊपरी साया लगने का खतरा रहता है. जिससे बच्चे को बहुत सी परेशानियां से गुजरना पड़ सकता हैं। मुंडन से बालों की गुणवत्ता और त्वचा में सुधार होता है, हमेशा चेहरा सूर्य की तरह चमकता रहता है। सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार का दिन मुंडन के लिए बिल्कुल सही है।. हीं अगर उत्तम माह की बात करें तो हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह, फाल्गुन माह मुंडन के लिए उत्तम माने जाते हैं।

मुंडन करवाने का सही समय
शास्त्रों में जन्मकालीन बालों का बच्चे के प्रथम, तीसरे या पांचवे वर्ष में या कुल की परम्परानुसार शुभ मुहुर्त में मुण्डन करने का विधान है । जन्म से तीसरे वर्ष में मुण्डन संस्कार उत्तम माना गया है । पांचवे या सातवें वर्ष में मध्यम और दसवें व ग्यारहवें वर्ष में मुण्डन संस्कार करना निम्न श्रेणी का माना जाता है । बच्चे का मुण्डन शुभ मुहुर्त में किसी देवी-देवता या कुल देवता के स्थान पर या पवित्र नदी के तट पर कराया जाता है । अपने गोत्र की परम्परानुसार मुुंडन करके बालों को नदी के तट पर या गोशाला में गाड़ दिया जाता है । कहीं-कहीं कुल देवता को ये बाल समर्पित कर फिर उन्हें विसर्जित किया जाता है ।
Note: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है

