बारिश के मौसम में Pregnant महिलाएं रहें सावधान! इन 5 बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

punjabkesari.in Wednesday, Jul 08, 2026 - 01:05 PM (IST)

नारी डेस्क : बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन अपने साथ कई तरह के वायरस और बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता और शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में मानसून के दौरान थोड़ी-सी लापरवाही भी मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर असर डाल सकती है। इसलिए इस मौसम में साफ-सफाई, खानपान और मच्छरों से बचाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। डॉक्टरों के अनुसार, मानसून में गर्भवती महिलाओं को डेंगू, मलेरिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), फंगल इंफेक्शन, टायफाइड और हेपेटाइटिस A व E जैसी बीमारियों से विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।

डेंगू का बढ़ जाता है खतरा

बारिश के मौसम में डेंगू फैलाने वाले मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है। गर्भावस्था में डेंगू होने पर तेज बुखार, प्लेटलेट्स में कमी, डिहाइड्रेशन और गंभीर मामलों में समय से पहले प्रसव जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। इससे मां और शिशु दोनों की सेहत प्रभावित हो सकती है।

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बचाव कैसे करें?
मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार प्रेग्नेंसी-सेफ मच्छर रिपेलेंट लगाएं।
पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
घर और आसपास पानी जमा न होने दें।

मलेरिया से रहें सावधान

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, गर्भावस्था में मलेरिया एनीमिया, गर्भपात, समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले शिशु के जन्म का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए मच्छरों से बचाव के सभी उपाय अपनाना जरूरी है।

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गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का वायरस)

मानसून में दूषित पानी और संक्रमित भोजन के कारण पेट का Infection होने का खतरा बढ़ जाता है। दस्त और उल्टी की वजह से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, जो गर्भावस्था में गंभीर समस्या बन सकती है।

बचाव के उपाय
केवल उबला हुआ या RO का फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।
ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाएं।
खुले में बिकने वाले या कटे हुए फल खाने से बचें।
स्ट्रीट फूड का सेवन न करें।

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यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)

प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव के कारण यूटीआई (UTI) का खतरा पहले से ही अधिक रहता है। मानसून में बढ़ी हुई नमी और साफ-सफाई की कमी इस जोखिम को और बढ़ा सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण किडनी तक पहुंच सकता है और समय से पहले प्रसव का कारण भी बन सकता है।

UTI के सामान्य लक्षण

पेशाब करते समय जलन या दर्द
बार-बार पेशाब आना
पेट के निचले हिस्से में दर्द
बदबूदार या धुंधला पेशाब।

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फंगल इंफेक्शन

बारिश के मौसम में नमी और पसीने के कारण त्वचा और प्राइवेट पार्ट में फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इससे खुजली, जलन, लालपन और असहजता हो सकती है।

बचाव कैसे करें?
शरीर को सूखा रखें।
कॉटन के ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें।
गीले कपड़े लंबे समय तक न पहनें।
व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

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टायफाइड और हेपेटाइटिस A व E

मानसून में दूषित पानी और भोजन के कारण टायफाइड और हेपेटाइटिस A व E जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ये संक्रमण गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर हो सकते हैं। इसलिए साफ और सुरक्षित भोजन व पानी का ही सेवन करें।

मानसून में गर्भवती महिलाएं कैसे रखें खुद को सुरक्षित?

हमेशा उबला हुआ या RO का फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।
घर का ताजा और गर्म भोजन ही खाएं।
सड़क किनारे मिलने वाले भोजन और खुले खाद्य पदार्थों से बचें।
हाथों को साबुन से नियमित रूप से धोएं।
मच्छरों से बचाव के सभी उपाय अपनाएं।
घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें।
नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप कराएं।
डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें।

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इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

अगर प्रेग्नेंसी के दौरान इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
100.4°F (38°C) या उससे अधिक बुखार
लगातार उल्टी या दस्त
पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द
शरीर में अत्यधिक कमजोरी
पेट में तेज दर्द या ऐंठन
भ्रूण की हलचल कम महसूस होना
योनि से असामान्य रक्तस्राव या पानी आना।

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मानसून का मौसम गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त सावधानी की मांग करता है। सही खानपान, स्वच्छता, सुरक्षित पानी, मच्छरों से बचाव और नियमित डॉक्टर की सलाह का पालन करके संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि कोई भी असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपचार करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।


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Content Editor

Monika

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