गले में मैंडल, आंखों में आंसू: ''जन गण मन'' सुन फूट-फूटकर रो पड़ीं भारत को गोल्ड दिलाने वाली Mirabai Chanu
punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 11:43 AM (IST)
नारी डेस्क: मीराबाई चानू का राष्ट्रमंडल खेलों में जीत गया स्वर्ण पदक देशभक्ति से ओतप्रोत था। तीन बार की चैंपियन मीराबाई ने रविवार को जब भारोत्तोलन खेलों में मंच पर कदम रखा, तो उन्होंने तिरंगे रिबन से बनी तितली के आकार की हेयर क्लिप पहनी हुई थी। यह देश की प्रति उनका सम्मान था, जिसे गौरवान्वित करने के लिए वह प्रतिबद्ध थी।
GOLD HAT-TRICK FOR MIRABAI CHANU!🥇🇮🇳
— Mind da Gap (@awaazzz) July 27, 2026
2018 📍 Gold Coast
2022 📍 Birmingham
2026 📍 Glasgow
Unmatched strength, absolute royalty! Rise up for our National Anthem as the Tricolour flies highest in Glasgow! 🇮🇳🫡🔥
#MirabaiChanu #CWG2026 #IndiaAtCWG #GoldMedal #Glasgow2026 pic.twitter.com/iFpmUAY95U
भारतीय राष्ट्रगान सुन भावुक हुई मीराबाई
महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मीराबाई ने पीटीआई से कहा- ''मैं भारत के लिए कुछ करना चाहती थी, इसलिए मैंने कल रात भारतीय ध्वज के रंगों वाले रिबन से ये तितली की तरह के क्लिप बनाए।'' प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद भी तिरंगा उनके पास ही रहा। जब पूरे स्टेडियम में भारतीय राष्ट्रगान गूंज रहा था, तब पोडियम पर खड़ी मीराबाई के लिए अपनी भावनाओं को काबू में रखना आसान काम नहीं था। उन्होंने कहा, ''तिरंगे को देखना और अपना राष्ट्रगान सुनना स्वाभाविक रूप से आंखों में आंसू ला देता है।''
राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को मिला पहला गोल्ड
मीराबाई ने कहा- ''ये खुशी के आंसू थे क्योंकि मैंने इन राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था। मैं भारत के सभी लोगों का आभार व्यक्त करना चाहती हूं जिन्होंने मेरे लिए तहेदिल से प्रार्थना की। ये खुशी के आंसू थे।'' मीराबाई महिलाओं के 48 किग्रा वेटलिफ्टिंग इवेंट में हमेशा से ही प्रबल दावेदार थीं, और टोक्यो ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट ने गोल्ड जीतने के लिए अपने प्रतिद्वंद्वियों पर पूरी तरह दबदबा बनाए रखा। उन्होंने स्नैच में 85 किग्रा वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड बनाया, और फिर क्लीन एंड जर्क में 105 किग्रा वजन उठाकर एक और गेम्स रिकॉर्ड बनाया, जिससे उन्होंने भारत के लिए कॉमनवेल्थ गोल्ड की हैट्रिक पूरी की।
मीराबाई ने चौथा CWG मेडल किया अपने नाम
कुल मिलाकर, यह उनका चौथा CWG मेडल था। इससे पहले उन्होंने ग्लासगो 2014 में 48 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता था, और फिर गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 में गोल्ड मेडल जीता था। मीराबाई ने पहली बार 19 साल की उम्र में इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था और इंचियोन में 2014 एशियाई खेलों में नौवें स्थान पर रही थीं। बाद में पीठ की चोट के कारण उन्हें जकार्ता में 2018 एशियाई खेलों से हटना पड़ा था। वह मेडल के सबसे करीब हांग्जो में 2023 एशियाई खेलों में पहुंची थीं, जहां चौथे स्थान पर रहकर पोडियम फिनिश के बेहद करीब पहुंचने के बाद कूल्हे की चोट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। महीनों की कड़ी तैयारी और शारीरिक चुनौतियों से उबरने के बाद पोडियम पर सबसे ऊपर खड़ा होना एक भावुक पल था।

