शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं है? तो क्या तलाक नहीं मिलेगा? हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
punjabkesari.in Saturday, Aug 30, 2025 - 04:19 PM (IST)

नारी डेस्क: अगर आपने अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है और अब तलाक की प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं, तो इलाहाबाद हाई कोर्ट का ताजातरीन फैसला आपके लिए बड़ी राहत लेकर आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस वजह से कि आपकी शादी रजिस्टर्ड नहीं है, इसे अवैध नहीं माना जा सकता और न ही इस कारण तलाक की प्रक्रिया में कोई रुकावट आएगी।
यह मामला आजमगढ़ के निवासी सुनील दुबे और उनकी पत्नी मीनाक्षी का था। इन दोनों ने 23 अक्टूबर 2024 को आपसी सहमति से फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दी थी। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने इस अर्जी को मंजूर करते हुए एक शर्त रखी उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट जमा करना होगा, जो कि दोनों पक्षों के पास नहीं था। सुनील ने अदालत में बताया कि उनकी शादी 27 जून, 2010 को हुई थी, जब शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं था। उनकी पत्नी भी इस बात से सहमत थीं, लेकिन फैमिली कोर्ट ने रजिस्ट्रेशन न होने के कारण तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया। इसके बाद, सुनील ने इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया।
रजिस्टर्ड न होने से अमान्य नहीं होता हिंदू विवाह
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) August 30, 2025
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलाक के मामले में निचली अदालत का आदेश किया रद्द
कहा- अनिवार्य नहीं रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेटhttps://t.co/fig6279VPc pic.twitter.com/pHj3RDaZLD
इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट की जस्टिस मनीष कुमार निगम की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और फैसला सुनाया कि शादी के रजिस्ट्रेशन की न होने पर भी यह वैध मानी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि शादी का रजिस्ट्रेशन केवल एक दस्तावेज़ है, जो शादी के प्रमाण के रूप में काम करता है, और यह शादी की वैधता का आधार नहीं है।
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हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि जब कानून खुद यह कहता है कि बिना रजिस्ट्रेशन के भी शादी वैध मानी जाती है, तो तलाक के लिए इसे अनिवार्य बनाना गलत है।
क्या है इसका मतलब आम जनता के लिए?
इस फैसले से उन लाखों जोड़ों को राहत मिलेगी, जिनकी शादी कई साल पहले हुई थी और जिनके पास मैरिज सर्टिफिकेट नहीं है। अब फैमिली कोर्ट तलाक की अर्जी में रजिस्ट्रेशन न होने के कारण अड़चन नहीं डाल सकेगी। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है और कहा है कि इस मामले में सुनील और मीनाक्षी के तलाक पर जल्द फैसला लिया जाए।
यह फैसला यह भी दर्शाता है कि शादी का रजिस्ट्रेशन केवल सुविधा के लिए है और इसका उद्देश्य लोगों के रास्ते में कोई रुकावट नहीं डालना है।