मकर संक्रांति पर भगवान राम ने उड़ाई थी पहली पतंग, सीधे पहुंची थी इंद्रलोक
punjabkesari.in Wednesday, Jan 14, 2026 - 06:36 PM (IST)
नारी डेस्क: मकर संक्रांति का पर्व भारत में सिर्फ फसल और सूर्य उपासना तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी कई रोचक धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं भी हैं। इन्हीं में से एक प्रसिद्ध मान्यता यह है कि मकर संक्रांति के दिन भगवान श्रीराम ने पहली बार पतंग उड़ाई थी, और तभी से इस पर्व पर पतंग उड़ाने की परंपरा शुरू हुई।
स्वर्ग लोक में पहुंची थी पतंग
तमिल के तन्दनान रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा शुरू की थी। बताया जाता है कि जो पतंग भगवान राम ने उड़ाई थी, वह सीधे स्वर्ग लोक पहुंच गई थी। स्वर्ग लोक में पतंग इंद्र के पुत्र जयंत की पत्नी को मिली। उनको पतंग काफी पसंद आई और उसको अपने पास रख लिया। उधर भगवान राम ने हनुमानजी को पतंग लाने के लिए भेजा। जब हनुमानजी ने जयंत की पत्नी से पतंग वापस करने के लिए कहा, तब उन्होंने भगवान राम के दर्शन की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि दर्शन के बाद ही वह पतंग वापस करेंगी।
हनुमानजी वापस लेकर आए थे पतंग
उनकी इच्छा जानने के बाद भगवान राम ने कहा कि वह मेरे दर्शन चित्रकूट में कर सकती है। हनुमानजी ने स्वर्ग लोक में जयंत की पत्नी को भगवान राम का आदेश दिया, जिसके बाद उन्होंने पतंग वापस कर दी। मान्यता है इस दिन से ही मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा चली आ रही है। वहीं इस पावन पर्व परपवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से पुण्य हजार गुना हो जाता है
पतंग उड़ाने का महत्व
ऐसा माना जाता है कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने से: सूर्य की किरणें सीधे शरीर पर पड़ती हैं, शरीर को विटामिन D मिलता है और मन प्रसन्न और ऊर्जावान होता है। यह पर्व नई शुरुआत का प्रतीक है, अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संकेत है। ठंड के मौसम के अंत और फसल की खुशी का पर्व है। मकर संक्रांति पर उड़ती हर पतंग, खुशियों और उम्मीदों का संदेश देती है।

