महारानी जिंदा कौर का वो बेशकीमती हार जिसे अंग्रेज छीन ले गए थे, सालों बाद एक सिख ने लौटाई विरासत

punjabkesari.in Saturday, May 16, 2026 - 04:43 PM (IST)

नारी डेस्क: सिख इतिहास की खूबसूरत और साहसी रानी महारानी जिंद कौर जिसे रानी जिंदा भी कहते हैं और पंजाब के लोगों ने उन्हें रानी मां कहते हैं। एक ऐसी विद्रोही स्त्री जिसे नियंत्रित करना असंभव था इसलिए ब्रिटिश उन्हें “पंजाब की मेसलीना” कहते थे। महाराजा रणजीत सिंह की सबसे छोटी पत्नी और महाराजा दलीप सिंह की माता महारानी जिंद कौर (लगभग 1817-1863) सिख साम्राज्य (पंजाब) की अंतिम रानी थीं। 

लाहौर दरबार से जब्त हुआ था महारानी जिंदा कौर का अनमोल हार

रानी जिंदा ब्रिटिश विरोधी नेता थी, अंग्रेज भी विद्रोह भड़काने में उनके प्रभाव से डरते थे और अपने लिए एक बड़ा खतरा मानते थे,रानी जिंदा ने अपने पुत्र Maharaja Duleep Singh के माध्यम से अपने दिवंगत पति की शाही विरासत को जीवित रखने के लिए लंबा संघर्ष किया। जब महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु हुई तो सिख साम्राज्य के शासन में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया, पंजाब का ब्रिटिशों द्वारा विलय हो गया।

लंदन में हुई नीलामी, फिर सामने आए सिख उद्योगपति

 उनके सिंहासन पर कई दावेदार उत्तराधिकारी आए, लेकिन उनमें से कोई भी शाही दरबार में चल रही उत्तराधिकार की साज़िशों और षड्यंत्रों से बच नहीं सका। पूर्व उत्तराधिकारियों की मृत्यु के बाद, उनके 5 वर्षीय पुत्र दलीप सिंह का राज्याभिषेक हुआ, जिससे वे सक्रिय शासक बन गईं। वे सार्वजनिक रूप से उपस्थित होकर, घूंघट हटाकर और राज्य के मामलों और सेना का प्रत्यक्ष प्रबंधन करके परंपरा तोड़ने के लिए जानी जाती थीं। वर्ष  1843 से 1847 तक रीजेंट के रूप में कार्य किया। जब पंजाब पर अंग्रेजों ने कब्जा किया तो उन्हें कैद कर लिया गया और उनके बेटे को उनसे अलग कर दिया गया लेकिन सन 1849 में उन्होंने नौकरानी का वेश धारण करके चुनार किले से साहसिक पलायन किया और नेपाल में शरण ली। सन 1861 में वह इंग्लैंड में अपने बेटे दलीप सिंह से फिर मिलीं, जहां वह 1863 में अपनी मृत्यु तक वहीं रहीं।

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“इसे किसी भी कीमत पर अपने समुदाय से दूर नहीं जाने देंगे”

जानकारी के अनुसार, जब अंग्रेजों ने लाहौर दरबार पर कब्ज़ा किया था तो कई बेशकीमती चीजें भी जब्त कर ली गई थी, उन कीमती चीजों में रानी जिंदा का एक अमूल्य हार भी था जो ज़ब्त कर लिया गया था। सालों बाद यूके स्थित जाने-माने भारतीय सिख उद्योगपति सरदार पीटर सिंह विरदी (Sardar Peter Singh Virdee) ने सिख साम्राज्य की अंतिम रानी का ये विरासती हार फिर वापिस लिया। लंदन की रानी एल्जाबेथ द्वारा महारानी जिंदा जी के हार को नीलामी पर रखा गया तो सरदार पीटर सिंह ने विरदी ने जो कीमत लगाई, उसे सुनकर सब हैरान हो गए। उन्होंने सबसे ज्यादा 88000 डॉलर की नीलामी के साथ इस हार को खरीदा

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‘पंजाब की शेरनी’ के सम्मान में लौटाई गई ऐतिहासिक पहचान

इस ऐतिहासिक विरासत को वापस हासिल करने के बाद, पीटर सिंह विरदी ने गर्व से कहा, "यह हार हमारी सिख महारानी का है और उनकी बेशकीमती निशानी है।  हम 'शेर-ए-पंजाब' महाराजा रणजीत सिंह के बच्चे हैं इसलिए हम इसे किसी भी कीमत पर अपने समुदाय से दूर नहीं जाने दे सकते। अगर इसे किसी अंग्रेज ने खरीदा होता तो मुझे जीवन भर पछतावा रहता। महारानी जिंदा कौर हमारे लिए बहुत ही सत्कार योग है। "

पीटर सिंह विरदी दुनिया के सबसे अमीर सिखों में गिने जाते हैं और उनकी यह पहल सिख समुदाय के लिए बेहद गर्व और सम्मान का विषय है। एक बहादुर योद्धा रानी जिन्हें "पंजाब की शेरनी" कहा जाता है, जिन्होंने अपने बेटे के सिंहासन के अधिकार के लिए अपने अंतिम दिनों तक लड़ाई लड़ी।  


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Content Writer

Vandana

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