मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पाने के लिए की थी कठोर तपस्या, मां को शक्कर और चमेली के फूल से करें प्रसन्न

punjabkesari.in Sunday, Oct 11, 2026 - 07:21 PM (IST)

नारी डेस्क : चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, साधना, त्याग और संयम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी सच्चे मन से आराधना करने से भक्तों को धैर्य, आत्मबल और ज्ञान की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के इस पावन दिन भक्त मां की पूजा करके जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप, पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र, आरती और उनकी उपासना का महत्व।

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व 

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप  अत्यंत दिव्य और सौम्य है।  इनके एक हाथ में जप माला और दूसरे हाथ में कमंडलु होता है, जो उनकी तपस्या और साधना का प्रतीक है। मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी।  उन्होंने हजारों वर्षों तक केवल फल-फूल खाकर कठोर तप किया था। इस कठोर तपस्या के कारण उन्हें 'ब्रह्मचारिणी' नाम से जाना गया। उनकी तपस्या से ही प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। उनकी पूजा से भक्तों को संयम, आत्मबल और सिद्धि** प्राप्त होती है।  ऐसा माना जाता है कि मां की कृपा से भक्तों को किसी भी कठिनाई का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि-विधान से करने का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के लिए इन चरणों का पालन कर सकते हैं:
स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद मां का ध्यान करके पूजा का संकल्प लें।
पूजा स्थल की तैयारी: घर के मंदिर की सफाई करें और मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
पूजन सामग्री अर्पित करें: मां को कुमकुम, अक्षत, चंदन, गंगाजल और ताजे फूल अर्पित करें।
पुष्प अर्पित करें: मां को सफेद फूल चढ़ाकर उनका ध्यान करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार, अपनी श्रद्धा और उपलब्धता के अनुसार अन्य पुष्प भी अर्पित कर सकते हैं।
मंत्र जाप करें: मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
आरती और प्रसाद: पूजा के अंत में मां की आरती करें और भोग लगाकर प्रसाद सभी में बांटें।

भोग अर्पण

मां ब्रह्मचारिणी को गुड़ और शक्करका भोग लगाएं। मान्यता है कि मां को यह भोग अत्यंत प्रिय है, जिससे भक्तों को सुख-समृद्धि और आरोग्यता का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा, मां को दही, चीनी और मिश्रीभी अर्पित कर सकते हैं।  पूजा के बाद मां का आशीर्वाद लें और प्रसाद को सभी में बांटें। दिनभर मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र का जाप करें और उपवास रखें।

मां ब्रह्मचारिणी की आरती

जय अंबे ब्रह्मचारिणी माता।  
जय चतुरानन प्रिय सुखदाता।।  
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।  
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।। 
ब्रह्म तेज मूरत तुम्हारी।  
वन्दना करें यह दुनिया सारी।।  
रुद्र रूप धरि चंडी बन जाओ।  
पापियों का विनाश कर जाओ।।
देव, दनुज, मुनि, सब निहारें।  
कृपा मांग तेरे द्वार खड़े।।  
ध्यान लगाकर करे पुकार।  
जय ब्रह्मचारिणी माता अपार।।

मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के लाभ

मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से धैर्य, तप और आत्मबल की प्राप्ति होती है।  मां की कृपा से घर में सुख-समृद्धि और शांतिका वास होता है।  जो लड़कियां विवाह में विलंब या बाधा  का सामना कर रही हैं, उन्हें मां ब्रह्मचारिणी की आराधना अवश्य करनी चाहिए। मां की साधना से जीवन में आने वाले कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का संचार होता है।  इस दिन शिव-पार्वती की पूजा भी विशेष लाभकारी मानी जाती है।  मां को गुलाब या चमेली के पुष्प चढ़ाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।  


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Monika

Related News

static