जब Govinda की मां ने मुंडवा लिया था सिर और भौहें, बेटे ने सुनाया मां के त्याग का भावुक किस्सा
punjabkesari.in Wednesday, Oct 28, 2026 - 10:13 AM (IST)
नारी डेस्क: बॉलीवुड के हीरो नंबर 1 गोविंदा ने अपनी मां निर्मला देवी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा सुनाया, जिसे जानकर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं। परिवार की आर्थिक हालत खराब होने पर उनकी मां ने बच्चों की परवरिश के लिए ऐसा कदम उठाया था, जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान रह जाएगा। गोविंदा ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया था, जब उनकी मां ने अपना सिर और भौहें तक मुंडवा ली थीं। इसके पीछे वजह सिर्फ परिवार को संभालना और बच्चों को सम्मान के साथ बड़ा करना था।
जब परिवार ने खो दी थी अपनी जमा-पूंजी
हर मां चाहती है कि उसके बच्चों को जिंदगी में किसी चीज की कमी न हो। इसके लिए वह अपनी खुशियों और जरूरतों को भी पीछे छोड़ देती है। गोविंदा की जिंदगी से जुड़ा यह किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। आज भले ही वह बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता हैं, लेकिन उनके परिवार ने एक समय काफी मुश्किलें देखी थीं। एबीपी न्यूज के साथ बातचीत में गोविंदा ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि उनका परिवार एक ऐसे दौर से गुजरा था, जब उनकी सारी जमा-पूंजी खत्म हो गई थी। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और परिवार को संभालना आसान नहीं रह गया था। ऐसे समय में उनकी मां निर्मला देवी ने हार मानने के बजाय परिवार की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।

मां की खूबसूरती को लेकर पिता को थी चिंता
गोविंदा ने बताया कि परिवार की मदद करने के लिए जब उनकी मां काम की तलाश में बाहर जाने लगीं, तो उनके पिता ने उन्हें एक बात कही थी। गोविंदा के मुताबिक, उनके पिता ने मां से कहा था, 'निर्मला, तुम इतनी खूबसूरत हो। अगर तुम काम की तलाश में बाहर जाओगी, तो लोग तुम्हें गलत इरादों से देखेंगे।' उस समय के हालात और लोगों की सोच को देखते हुए यह बात उनकी मां के मन में बैठ गई। इसके बाद उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिसने गोविंदा को भी जिंदगी भर के लिए प्रभावित किया। उन्होंने अपना सिर और भौहें मुंडवा लीं और संतों की तरह रहना और कपड़े पहनना शुरू कर दिया। यह फैसला उनके लिए कितना कठिन रहा होगा, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं है। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के सामने उन्होंने अपनी सुंदरता और बाहरी पहचान की परवाह नहीं की। उनके लिए सबसे जरूरी था कि उनके बच्चे अच्छी तरह बड़े हों और परिवार किसी तरह इस मुश्किल दौर से बाहर निकल सके।
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बच्चों की परवरिश के लिए मां ने किया बड़ा त्याग
गोविंदा के इस किस्से से साफ पता चलता है कि उनकी मां के लिए बच्चों की परवरिश सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था, लेकिन वह चाहती थीं कि उनके बच्चे सम्मान के साथ जीवन जिएं। इसके लिए उन्होंने खुद कितनी परेशानियां झेलीं, इसका जिक्र करते हुए गोविंदा भावुक नजर आए। अक्सर लोग किसी इंसान को देखकर उसके बारे में राय बना लेते हैं, लेकिन उसके पीछे छिपे संघर्षों को नहीं जानते। गोविंदा की मां की कहानी भी यही बताती है कि कई बार परिवार को संभालने के लिए इंसान को ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जिन्हें बाहर से देखने वाले लोग शायद कभी समझ ही न पाएं।
मां के संघर्षों ने गोविंदा को बनाया ऐसा इंसान
गोविंदा ने बातचीत में यह भी बताया कि उनकी मां के संघर्षों ने उनकी सोच पर गहरा असर डाला है। यही वजह है कि आज जब कोई उनके बारे में कुछ कहता है या उनकी आलोचना करता है, तो वह हर बात को दिल से नहीं लगाते। एक्टर ने कहा, 'ऐसी मां का बेटा होने के नाते मेरे लिए यह सब क्या मायने रखता है? किसने क्या कहा, किसने क्या दिया? मैं इन सब चीजों में बिल्कुल नहीं पड़ता। कहीं भी नहीं, कभी भी नहीं।' उनकी बातों से समझ आता है कि मां के संघर्षों को करीब से देखने के बाद उन्होंने जिंदगी को एक अलग नजरिए से समझना सीखा। उनके लिए दूसरों की कही बातों से ज्यादा जरूरी यह जानना है कि कोई इंसान किन परिस्थितियों से गुजर रहा है।

किसी को जज करने से पहले हालात समझना जरूरी
गोविंदा ने यह भी कहा कि वह किसी व्यक्ति को उसकी परिस्थितियों को समझे बिना गलत नहीं ठहराना चाहते। उनके मुताबिक, इंसान का व्यवहार कई बार उसके आसपास के माहौल और जिंदगी में चल रही परेशानियों से प्रभावित होता है।उन्होंने कहा, 'मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैं उस दिशा में देखता ही नहीं। मैं क्यों नहीं देखता? क्योंकि मैं जानता हूं कि वह इंसान आज जैसा भी है, वैसा क्यों है। समय, परिस्थितियां, देश और हालात ही इंसान के रिएक्शन तय करते हैं। आज देश में हर कोई किसी न किसी परिस्थिति में कहीं न कहीं फंसा हुआ है।' गोविंदा की यह बात उनकी मां से मिले संस्कारों की झलक दिखाती है। उन्होंने अपनी मां को मुश्किल समय में परिवार के लिए संघर्ष करते देखा था। शायद यही वजह है कि वह आज भी लोगों के व्यवहार के पीछे की परिस्थितियों को समझने की कोशिश करते हैं।
अपने जमाने की मशहूर गायिका थीं निर्मला देवी
गोविंदा की मां निर्मला देवी सिर्फ एक समर्पित मां ही नहीं, बल्कि अपने जमाने की जानी-मानी हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका और अभिनेत्री भी थीं। उन्होंने कला की दुनिया में अपनी पहचान बनाई थी। हालांकि, उनकी जिंदगी में परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां भी उतनी ही अहम थीं। निर्मला देवी का निधन 15 जून 1996 को 69 वर्ष की उम्र में हुआ था। आज भले ही वह इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन गोविंदा के जीवन से जुड़ा यह किस्सा उनके त्याग और संघर्ष को याद दिलाता है।
मां का प्यार अक्सर शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। कई बार उनकी कुर्बानियों का एहसास बच्चों को बड़े होने के बाद होता है। गोविंदा की मां की यह कहानी भी बताती है कि परिवार के लिए किया गया त्याग इंसान के जीवन पर कितनी गहरी छाप छोड़ सकता है।

