एक तरफ पर्दे पर दमदार राेल, दूसरी तरफ राजनीति ....जानिए स्मृति ईरानी के दिलचस्प सफर के बारे में
punjabkesari.in Wednesday, Aug 19, 2026 - 06:35 PM (IST)
नारी डेस्क: कुछ किरदार ऐसे होते हैं, जिन्हें दर्शक सिर्फ देखते हैं। कुछ ऐसे होते हैं, जिन्हें वे याद रखते हैं और फिर कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। तुलसी विरानी ऐसा ही एक किरदार है।‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की केंद्रीय नायिका के रूप में तुलसी ने एक ऐसी महिला की छवि पेश की, जो संवेदनशील होने के साथ द्दढ़ थी, भावुक होने के बावजूद मज़बूत थी और अपनी परंपराओं से जुड़ी होने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर पुरानी सोच को चुनौती देने से भी पीछे नहीं हटती थी।

तुलसी विरानी रहा सबसे यादगार किरदार
उनका साहस, द्दढ़ता और अपने फैसलों पर अडिग रहने का जज़्बा उन्हें भारतीय टेलीविज़न के सबसे यादगार किरदारों में से एक बनाता है। लेकिन जब पर्दे पर तुलसी की कहानी आगे बढ़ रही थी, उसी दौरान उन्हें जीवंत करने वाली अभिनेत्री स्मृति ईरानी अपनी एक अलग कहानी लिख रही थीं, जो आगे चलकर उन्हें टेलीविज़न की दुनिया से कहीं आगे ले जाने वाली थी। स्मृति ईरानी ने मनोरंजन जगत में कदम रखा और तुलसी के किरदार से उन्हें अपार लोकप्रियता मिली। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई और भारतीय टेलीविज़न को उसकी सबसे प्रभावशाली महिला नायिकाओं में से एक दी।
स्मृति ने टेलीविज़न से राजनीति की ओर रखा कदम
परिवार के लिए खड़े होने से लेकर रिश्तों की उलझनों को सुलझाने और मुश्किल परिस्थितियों का डटकर सामना करने तक, तुलसी के व्यक्तित्व ने देशभर के दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई। लेकिन ऐसे समय में, जब टेलीविज़न की इतनी बड़ी सफलता किसी के लिए भी मंज़लि बन सकती थी, स्मृति ने खुद को एक नई दिशा देने का फैसला किया। टेलीविज़न से राजनीति की ओर उनका कदम उनके पेशे और सार्वजनिक पहचान, दोनों के लिए बड़ा बदलाव था। एक ओर वे पर्दे पर एक काल्पनिक किरदार निभा रही थीं, तो दूसरी ओर वास्तविक दुनिया में राजनीतिक संवाद, चुनावी अभियानों और चुनावी मुकाबलों का हिस्सा बन रही थीं। इस बदलाव के लिए सिफर् लोकप्रियता ही काफी नहीं थी। इसके लिए निरंतर प्रयास, लोगों से जुड़ने की क्षमता और सार्वजनिक जीवन की लगातार बढ़ती निगरानी का सामना करने का साहस भी ज़रूरी था।

चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में बनाई पहचान
समय के साथ स्मृति की राजनीतिक यात्रा ने उन्हें उनकी टेलीविजन पहचान से आगे एक अलग और प्रभावशाली सार्वजनिक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया। उनका सफर सीधा और चुनौतियों से मुक्त नहीं था, लेकिन मुश्किलों और असफलताओं के बावजूद आगे बढ़ते रहने का उनका जज़्बा उनकी सार्वजनिक पहचान का अहम हिस्सा बन गया। पीछे मुड़कर देखें तो तुलसी और स्मृति के बीच का यह रिश्ता और भी दिलचस्प नज़र आता है। एक ओर तुलसी काल्पनिक दुनिया में परिवार, रिश्तों और ज़दिंगी की जटिलताओं से जूझ रही थीं, वहीं दूसरी ओर स्मृति वास्तविक दुनिया के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही थीं।
खास था स्मृति ईरानी का सफर
दोनों की दुनिया भले ही अलग थी, लेकिन तुलसी से जुड़ी ताकत, द्दढ़ता, जुझारूपन और अपने लिए आवाज उठाने का साहस कहीं न कहीं स्मृति के सफर का भी हिस्सा बनता दिखाई देता है। यही बात स्मृति ईरानी के सफर को खास बनाती है। यह सिर्फ एक टेलीविज़न अभिनेत्री के राजनीति में आने की कहानी नहीं है, बल्कि उस महिला की कहानी है, जिसने अपनी एक सफल पहचान को अपने पूरे भविष्य की सीमा नहीं बनने दिया। टेलीविज़न के सेट से लेकर राजनीतिक मंचों तक, स्मृति ईरानी का सफर लगातार खुद को नए रूप में गढ़ने और अपनी पहचान को विस्तार देने की कहानी रहा है। तुलसी साहसी थीं, मज़बूत थीं और अपने फैसलों पर अडिग रहती थीं। सालों बाद भी ये वही खूबियां हैं, जो उस महिला की कहानी का हिस्सा बनी हुई हैं, जिसने तुलसी को पर्दे पर जीवंत किया था।

