हेमा मालिनी चाहती थीं बेटी ईशा देओल की शादी अभिषेक बच्चन से, पर ईशा ने कर दिया था साफ मना
punjabkesari.in Sunday, Aug 31, 2025 - 03:57 PM (IST)

नारी डेस्क: बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस हेमा मालिनी अपनी बेटी ईशा देओल की शादी अभिषेक बच्चन से कराना चाहती थीं। उन्हें लगता था कि अभिषेक जैसे समझदार और जिम्मेदार इंसान बेटी के लिए एक आदर्श दामाद होंगे। लेकिन ईशा ने अपनी मर्जी से यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। ईशा देओल ने 2012 में भारत तख्तानी से शादी की, लेकिन यह रिश्ता काफी समय तक नहीं चल पाया और साल 2024 में दोनों का तलाक हो गया। इस दौरान दोनों की दो बेटियां हुईं राध्या और मिराया। तलाक के बाद भारत तख्तानी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहे हैं और हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर मेघा लखानी के साथ एक तस्वीर शेयर की, जिसमें लिखा था 'Welcome to the family' जिससे इस बात की खबरें तेज हो गईं कि वे अब किसी नए रिश्ते में हैं। वहीं, ईशा अब अपने काम पर पूरा ध्यान दे रही हैं और अपनी निजी जिंदगी को शांतिपूर्ण रखना चाहती हैं।
हेमा मालिनी ने क्यों चाही थी अभिषेक से शादी?
हेमा मालिनी और धर्मेंद्र का बच्चन परिवार से पुराना और गहरा रिश्ता रहा है। उन्होंने ‘शोले’ जैसी सुपरहिट फिल्म में अमिताभ और जय बच्चन के साथ काम किया है, जिससे परिवार में घनिष्ठता है। हेमा को अभिषेक का स्वभाव बहुत पसंद है और वे चाहती थीं कि ईशा एक अच्छे और भरोसेमंद इंसान के साथ जीवन बिताए—इसलिए उन्होंने अभिषेक का नाम प्रस्ताव के रूप में दिए।
ईशा का स्पष्ट जवाब: "मैं नहीं चाहती थी…"
इंडिया-फोरम को दिए इंटरव्यू में जब ईशा से पूछा गया कि क्या उनकी मां सच में अभिषेक बच्चन को दामाद बनाना चाहती थीं? तो ईशा ने बड़ी ईमानदारी से जवाब दिया “मेरी मां बहुत प्यारी हैं। उन्होंने अभिषेक बच्चन का नाम इसलिए लिया था क्योंकि उस समय अभिषेक सबसे एलिजिबल बैचलर थे और वे चाहती थीं कि मैं एक अच्छे इंसान के साथ सेटल हो जाऊं। लेकिन मैं अभिषेक से शादी नहीं करना चाहती थी I always saw him as a big brother.” उनका कहना था कि मीडिया में यह भी खबरें थीं कि हेमा मालिनी ने विवेक ओबेराय का भी नाम सुझाया था, लेकिन ईशा ने उसका भी पूरी तरह से विरोध किया
“मां ये सब बातें सोचती रहती थीं… लेकिन विवेक मेरा टाइप नहीं है। मैंने हमेशा साफ मना किया।”
यह कहानी माता-पिता की मंशा और बच्चे की अपनी पसंद के बीच का अंतर दर्शाती है। हेमा मालिनी अपनी बेटी की खुशी और सुरक्षा चाहती थीं, लेकिन ईशा ने अपनी निजी भावनाओं और समझ को प्राथमिकता दी। यह कहानी हमें बताती है कि चाहे रिश्तों में कैसा भी प्यार या मजबूरी हो, अंततः खुद की पसंद और सम्मानित निर्णय लेना सबसे महत्वपूर्ण होता है।
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