क्या छींक लेते वक्त कुछ सेकेंड रुक जाती है दिल की धड़कन? जानें सच
punjabkesari.in Monday, Mar 30, 2026 - 01:51 PM (IST)
नारी डेस्क : छींक आना एक बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है, जो नाक में किसी तरह की जलन, धूल, एलर्जी या सर्दी के कारण होती है। जब नाक में इरिटेशन होती है, तो दिमाग को सिग्नल मिलता है और शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए छींक के रूप में उसे बाहर निकाल देता है। अक्सर यह माना जाता है कि छींक लेते समय दिल की धड़कन कुछ सेकेंड के लिए रुक जाती है, लेकिन यह पूरी तरह एक मिथक है।
असल में क्या होता है
छींक से पहले हम गहरी सांस लेते हैं
इससे सीने के अंदर दबाव (प्रेशर) बढ़ जाता है
फिर जब हम जोर से छींकते हैं, तो यह दबाव अचानक कम होता है
इस दौरान शरीर में ब्लड फ्लो में हल्का बदलाव आता है
इसी बदलाव की वजह से दिल की धड़कन की गति या रिद्म में क्षणिक परिवर्तन हो सकता है, लेकिन दिल कभी भी रुकता नहीं है। दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी लगातार चलती रहती है।
क्यों लगता है कि दिल रुक गया?
छींक के दौरान पूरा शरीर एक झटके से हिलता है और अचानक सांस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया बदल जाती है। इस वजह से कुछ पल के लिए अजीब सा एहसास होता है, सांस रुकती हुई लगती है और दिल की धड़कन भी जैसे थम गई हो ऐसा महसूस होता है। दरअसल, यह केवल शरीर में होने वाले अचानक बदलाव का असर होता है, जिसकी वजह से लोगों को लगता है कि दिल ने कुछ सेकेंड का ब्रेक ले लिया।
छींकते ही क्यों याद आता है भगवान?
छींक एक अचानक और तेज प्रतिक्रिया है, जो शरीर को झटका देती है। ऐसे में शरीर में अचानक बदलाव होता है, एक सेकेंड के लिए घबराहट या अजीब सा एहसास आता है और दिमाग तुरंत सुरक्षा और संतुलन की स्थिति में जाता है। वजह से बहुत से लोग छींकते ही भगवान का नाम ले लेते हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक आदत है, जो बचपन से सीखी जाती है।
छींकते समय दिल की धड़कन रुकना सिर्फ एक भ्रम है। असल में उस दौरान शरीर में दबाव और ब्लड फ्लो के बदलाव के कारण धड़कन की रिद्म थोड़ी देर के लिए बदल सकती है, लेकिन दिल कभी नहीं रुकता।

