धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान कृष्ण को बताया ''तीन जगह से टेढ़ा'' , विवाद के बाद बोले- जोश-जोश में कह दी ये बात
punjabkesari.in Tuesday, Nov 03, 2026 - 01:43 PM (IST)
नारी डेस्क: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई अपनी टिप्पणी पर विवाद बढ़ने के बाद माफी मांग ली। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के बीच किसी तरह का अंतर बताने की नहीं थी और यदि उनकी बातों से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं।
इस बयान से मचा बवाल
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित रामकथा के दौरान शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए कहा था कि श्रीराम सीधे हैं, जबकि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण की त्रिभंग मुद्रा, बांसुरी और वृंदावन का उल्लेख करते हुए अयोध्या और वृंदावन की तुलना भी की थी। उनकी इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मथुरा-वृंदावन के संतों और कृष्ण भक्तों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों समान रूप से पूजनीय हैं और उनकी तुलना इस तरह करना उचित नहीं है।
शास्त्री जी ने खुद को बताया भगवान कृष्ण का भक्त
विवाद के बाद शास्त्री ने केन्या के नैरोबी से सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा- ''उनकी टिप्पणी भक्ति परंपरा और ब्रज की प्रेमपूर्ण अभिव्यक्ति के संदर्भ में थी। उनका उद्देश्य किसी भगवान का अपमान करना या दोनों के बीच भेद करना नहीं था।'' बाबा बागेश्वर के रूप में मशहूर शास्त्री ने कहा कि भगवान राम और कृष्ण एक ही परम सत्ता के स्वरूप हैं। उन्होंने स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए कहा कि वह भागवत कथा भी करते हैं और कृष्ण भक्ति में उनकी पूरी आस्था है। उन्होंने कहा कि भावावेश में कही गई बात से यदि किसी को ठेस पहुंची है तो वह विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगते हैं।
दो बार मांगी माफी
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दो बार माफी मांगी। कथा के दौरान उन्होंने कहा- "भाव में कह तो दी ये भी नहीं कहना चाहिए था लेकिन क्या करें हम ना थोड़े जोश-जोश में आकर कई बार ऐसा कर जाते हैं। भाव-भाव में आकर कुछ भी कह जाते हैं। पर हमारा इंटेंशन ऐसा नहीं रहता कि किसी के विरोध में अब हम खुद ठाकुर जी के भक्त हैं, हमने इतना भर कह दिया कि ठाकुर जी टेढ़े हैं, रामजी सीधे हैं, इतने में ही लोग लिखने लगे कि बाबा कृष्ण विरोधी हैं। महापुरुषों ऐसा मत करो, ऐसा मत करो, हम समझ सकते हैं आपकी भावनाओं को, पर एक ही बात है। हम थोड़े ही ठाकुरजी के विरोधी हैं। हमने तो भाव में, इसको व्यास स्थिति कहते हैं, आपसे हमारी प्रार्थना है कि अर्थ का अनर्थ ना निकाला करो। राष्ट्र प्रेम या राम प्रेम की बात करते हैं तो हम आपसे ये नहीं कहते हैं कि हम आपको भारत का बनाना चाहते हैं, हम कहते हैं कि आप नैरोबी में ही रहो पर भारत के बनकर रहो।"

