किसी को भी हो सकता है गुर्दे का कैंसर, कमर दर्द भी है इस जानलेवा बीमारी का लक्षण
punjabkesari.in Monday, Jun 22, 2026 - 07:22 PM (IST)
नारी डेस्क: किडनी कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाना खास तौर पर मुश्किल हो सकता है क्योंकि अक्सर इस बीमारी के बढ़ने तक लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। ट्यूमर होने पर भी किडनी नॉर्मल तरीके से काम करती रहती है नतीजतन, कई मामलों का पता रूटीन हेल्थ चेक-अप या किसी दूसरी मेडिकल समस्या के लिए किए गए इमेजिंग टेस्ट के दौरान अचानक चलता है। इस बीमारी का ज़्यादातर रिस्क फ़ैक्टर लाइफ़स्टाइल की आदतों और पहले से मौजूद हेल्थ कंडीशन से जुड़ा होता है।
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किडनी कैंसर का कारण
HT लाइफ़स्टाइल में छपे आर्टिकल में डॉक्टर की तरफ से समझाया गया कि आजकल की लाइफ़स्टाइल, जिसमें तंबाकू का इस्तेमाल, शरीर का ज़्यादा वज़न, शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना और मेटाबोलिक हेल्थ का खराब होना शामिल है, किडनी कैंसर जैसी क्रोनिक बीमारियों के बढ़ते बोझ में योगदान दे रही है। इन रिस्क फैक्टर को समझने से लोगों को अपनी लंबे समय की सेहत के बारे में सही फ़ैसले लेने में मदद मिल सकती है। किडनी कैंसर का सबसे बड़ा कारण है तंबाकू का इस्तेमाल, मोटापा और शरीर का ज़्यादा वजन, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ और मेटाबोलिक सिंड्रोम, क्रोनिक किडनी की बीमारी, लंबे समय तक डायलिसिस यह किडनी कैंसर का पारिवारिक इतिहास।
इन लक्षणों पर रखें नजर
डॉक्ट बताते हैं कि किडनी कैंसर के जोखिम का एक पहलू जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता, वह है मेटाबोलिक हेल्थ। मोटापा, डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन जैसी स्थितियां अक्सर एक साथ होती हैं और शरीर में लंबे समय तक रहने वाली हल्की सूजन (क्रोनिक लो-ग्रेड इन्फ्लेमेशन) पैदा कर सकती हैं। समय के साथ ये मेटाबोलिक गड़बड़ियां कैंसर के विकास से जुड़ी सेलुलर प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि किडनी कैंसर के शुरुआती लक्षण शायद न दिखें, लेकिन कुछ संकेतों पर डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है। जैसे पेशाब में खून आना, कमर के निचले हिस्से या बगल में लगातार दर्द, बिना किसी वजह के वज़न कम होना, लगातार थकान और भूख न लगना। हालांकि ये लक्षण कई वजहों से हो सकते हैं, लेकिन लगातार बने रहने वाले या बिना वजह होने वाले बदलावों की जांच हमेशा किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल से करवानी चाहिए।
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कब पड़ती है जांच की जरूरत?
डॉक्टर बताते हैं कि अभी किडनी कैंसर के लिए कोई स्टैंडर्ड स्क्रीनिंग प्रोग्राम नहीं है। हालांकि, जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी रही हो, जिन्हें क्रोनिक किडनी की बीमारी हो या जो लंबे समय से डायलिसिस पर हों, उन्हें समय-समय पर जांच करवाने से फ़ायदा हो सकता है। किडनी के कई ट्यूमर पेट के अल्ट्रासाउंड के दौरान अचानक पता चल जाते हैं, जबकि संदिग्ध चीज़ों की आगे जांच के लिए CT स्कैन और MRI का इस्तेमाल किया जाता है। गंभीर या एडवांस बीमारी के मामलों में, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी ने इलाज के विकल्पों को काफी बढ़ाया है और कई मरीज़ों के लिए बेहतर नतीजे दिए हैं। एक हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखना, संभावित चेतावनी के संकेतों को पहचानना और समय पर मेडिकल जांच करवाना, किडनी की सेहत को बचाने और नतीजों को बेहतर बनाने के सबसे असरदार तरीकों में से हैं।
नोट: यह आर्टिकल सिर्फ़ जानकारी देने के मकसद से है और यह प्रोफेशनल मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है।

