आशा भोसले काे याद करने पर पाकिस्तान में मचा बवाल,  न्यूज चैनल को भेजा नोटिस

punjabkesari.in Tuesday, Apr 14, 2026 - 03:13 PM (IST)

नारी डेस्क:  पाकिस्तान की मीडिया निगरानी संस्था ने गायिका आशा भोसले के निधन की खबर के प्रसारण के दौरान 'भारतीय सामाग्री' के इस्तेमाल को लेकर एक समाचार चैनल 'जियो न्यूज' को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पाकिस्तान में भारतीय सामग्री पर 2018 से प्रतिबंध हैं। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पीईएमआरए) ने सोमवार को 'जियोन्यूज' को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है कि उसने भोसले के निधन की खबर के साथ भारतीय सामग्री क्यों प्रसारित की। 
 

यह भी पढ़ें:  सुशांत सिंह राजपूत की बहन को महसूस हुई अपनी भाई की मौजूदगी
 

इस प्रमुख समाचार चैनल को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान का करीबी माना जाता है। 'जियोन्यूज़' के प्रबंध निदेशक अजहर अब्बास ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा- ''प्रतिष्ठित कलाकारों के बारे में रिपोर्टिंग करते समय उनके कार्यों को याद करना और उनकी सराहना करना हमेशा से एक परंपरा रही है। वास्तव में आशा भोसले जैसी कलाकार के लिए हमें उनके सदाबहार और यादगार गीतों को और भी अधिक साझा करना चाहिए था। फिर भी पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पीईएमआरए) ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है।''


यह भी पढ़ें:  बार-बार पेट फूलना गैस नहीं इस बीमारी की है निशानी
 

पीईएमआरए ने कहा कि भोसले के निधन की खबर प्रसारित करते समय 'जियोन्यूज' द्वारा भारतीय गीत और भारतीय फिल्मों के दृश्य प्रसारित करना, पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का जानबूझकर उल्लंघन है जिसमें भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया है। नोटिस में कहा गया कि 'जियोन्यूज़' ने पीईएमआरए नियम, 2009 के नियम 15(1), पीईएमआरए (टेलीविजन प्रसारण स्टेशन संचालन) विनियम 2012 के विनियम 18 1 (जी) और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (कार्यक्रम और विज्ञापन) नियम 2015 के खंड 4(10), 5, 17, 20 और 24 का उल्लंघन किया है। 'मेसर्स इंडिपेंडेंट मीडिया कॉर्पोरेशन' (जियो न्यूज) के सीईओ को 27 अप्रैल को तलब किया गया है और उन्हें 14 दिनों के भीतर लिखित में स्पष्टीकरण देना है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी सीनेटर शेरी रहमान ने पीईएमआरए की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ''कृपया, पीईएमआरए, यहां हम अपना परिप्रेक्ष्य न खोएं और सांस्कृतिक परिवर्तनों पर पुलिसिंग शुरू नहीं करें।" 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

vasudha

Related News

static