Chhinnamasta Jayanti आज, ऐसे करें माता की पूजा, हर कष्ट से मिलेगा छुटकारा
punjabkesari.in Thursday, Apr 30, 2026 - 02:11 PM (IST)
नारी डेस्क: सनातन धर्म में छिन्नमस्ता जयंती (Chhinnamasta Jayanti) का बहुत महत्व है। हर साल वैशाख महीने की शुक्ल चतुर्दशी तिथि पर छिन्नमस्ता जयंती मनाई जाती है। इस साल छिन्नमस्ता जयंती 30 अप्रैल, 2026 यानी आज के दिन मनाई जा रही है। इस दिन मां की पूजा करने से मन चाहा फल मिलता है। चतुर्दशी तिथि आज रात 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगी। इस दौरान साधक विशेष पूजा और साधना कर सकते हैं।
मां की पूजा करने के साथ रख सकते है व्रत
छिन्नमस्ता दस महाविद्याओं में से एक हैं। मां छिन्नमस्ता को प्रचंड चंडिका भी कहा जाता है। यह दिन विशेष रूप से तांत्रिक साधना, मानसिक शक्ति और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। दस महाविद्याओं में शामिल यह देवी अपने अनोखे और विचित्र स्वरूप के कारण साधकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। इस दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा करने और व्रत रखने के साथ उनके मंत्रों का जाप करना भी बहुत फलदायी माना जाता है।

मां छिन्नमस्ता की पूजा कैसे करें?
इस दिन मां छिन्नमस्ता की पूजा करना बहुत फलदायी माना जाता है। मां की पूजा सामान्य पूजा से थोड़ी अलग और विशेष विधि से की जाती है। इस दिन सुबह स्नान कर साफ लाल वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें लाल फूल, सिंदूर, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद उनके मंत्रों का जाप करें। साधक अगर तांत्रिक विधि जानते हैं तो विशेष साधना भी कर सकते हैं, लेकिन सामान्य भक्तों को केवल श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और किसी भी प्रकार की नकारात्मक भावना से दूर रहें। मां की उपासना से आत्मबल, साहस और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
मां छिन्नमस्ता की पूजा करने से मिलेंगे ये लाभ
छिन्नमस्ता जयंती के दिन मां की पूजा करना और मंत्रों का जाप करना बहुत फलदायी माना जाता है। अगर इस दिन सही विधि के साथ मां की पूजा की जाए तो मां खुश होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। ये दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो जीवन में भय, तनाव या शत्रुओं से परेशान हैं। मां की कृपा से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और साधक को आत्मविश्वास मिलता है। यह पूजा हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में सबसे बड़ी जीत अपने मन और अहंकार पर नियंत्रण पाना है। इस तरह आप मां की पूजा कर अपना आत्मबल, साहस और मानसिक स्थिरता को बढ़ा सकते है।

