इस बार शुभ दुर्लभ संयोग में होगी चैत्र नवरात्रि की शुरुआत, कलश स्थापना के बन रहे दो शुभ मुहूर्त
punjabkesari.in Tuesday, Mar 10, 2026 - 09:49 AM (IST)
नारी डेस्क: सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। साल 2026 में 19 मार्च से 27 मार्च तक चलने वाली चैत्र नवरात्रि कई मायनों में बेहद खास मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार नवरात्रि की शुरुआत ऐसे दुर्लभ संयोग के साथ हो रही है जो करीब 72 वर्षों बाद बन रहा है।

72 साल बाद बन रहा विशेष संयोग
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च को तड़के 4 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। हालांकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए पूरे दिन अमावस्या तिथि का प्रभाव माना जाएगा और इसी दिन से नवरात्रि का शुभारंभ होगा। करीब 72 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जब कलश स्थापना अमावस्या तिथि में की जाएगी। 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पहला शुभ समय सुबह 6 बजकर 02 मिनट से 8 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 16 मिनट से 10 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
घटस्थापना का विशेष महत्व
अमावस्या का समय पितरों की शांति और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है। इसलिए इस अवधि में दान-पुण्य, जप और पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू होता है। इसी दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है, जिसे पूरे नवरात्रि पर्व की शुरुआत माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करने और मां दुर्गा की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।

क्या करें नवरात्रि में
घर में साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। मां दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा करें। दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का जाप करें। जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में सच्चे मन से की गई मां दुर्गा की आराधना भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लेकर आती है। इसलिए इस बार बनने वाले दुर्लभ संयोग में पूजा-पाठ और साधना का महत्व और भी बढ़ जाता है।

