35 की उम्र पार करते ही शुरू हो जाते हैं हड्डियों में ये बदलाव, जानें कैसे करें बचाव
punjabkesari.in Saturday, Jun 27, 2026 - 12:44 PM (IST)
नारी डेस्क : महिलाओं के शरीर में एक बदलाव ऐसा भी आता है, जो न तो बाहर से दिखाई देता है, न ही शुरुआत में कोई दर्द देता है और न ही रोजमर्रा की जिंदगी को अचानक प्रभावित करता है। लेकिन यह बदलाव धीरे-धीरे अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है। 35 की उम्र के बाद हड्डियों की मजबूती कम होने लगती है। जो हड्डियां युवावस्था में तेजी से बनती और मजबूत होती थीं, अब उनका बनना धीमा और टूटना थोड़ा तेज हो जाता है। सबसे चिंता की बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के चलती रहती है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
डॉक्टर के अनुसार, ज्यादातर महिलाएं 30 की उम्र के बाद भी अपनी हड्डियों की सेहत के बारे में ज्यादा नहीं सोचतीं, लेकिन असल बदलाव यहीं से शुरू हो जाता है। उनके मुताबिक, 35 की उम्र के बाद शरीर जितनी तेजी से नई हड्डियां बनाता है, उससे अधिक तेजी से पुरानी हड्डियां टूटने लगती हैं। इसका असर धीरे-धीरे हड्डियों की घनता (Bone Density) पर पड़ता है और वे कमजोर होने लगती हैं।

शुरुआत में क्यों नहीं दिखते लक्षण?
हड्डियों की कमजोरी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बेहद हल्के होते हैं, इसलिए ज्यादातर महिलाओं को लंबे समय तक इसका पता ही नहीं चलता। शुरुआत में महिलाएं पूरी तरह सामान्य महसूस करती हैं, लेकिन धीरे-धीरे कुछ संकेत नजर आने लगते हैं, जैसे बार-बार पीठ दर्द होना, कद का थोड़ा कम होना, मामूली चोट या हल्की गिरावट में भी हड्डी टूट जाना और शरीर में कमजोरी या जोड़ों में दर्द महसूस होना। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में कई महिलाओं में यह समस्या तब तक सामने नहीं आती, जब तक उन्हें कोई फ्रैक्चर न हो जाए, खासकर 40 की उम्र के बाद।
यें भी पढ़ें : सावधान! ठंडे और सुन्न पैर हो सकते हैं इन गंभीर बीमारियों का संकेत
आखिर हड्डियां कमजोर क्यों होने लगती हैं?
यह सिर्फ हड्डियों का कमजोर होना नहीं है, बल्कि उनकी अंदरूनी बनावट में बदलाव होता है। हड्डियां धीरे-धीरे अंदर से खोखली और हल्की होने लगती हैं, जिससे उनकी मजबूती कम हो जाती है और वे दबाव या चोट को सहन नहीं कर पातीं।

महिलाओं में ज्यादा क्यों होती है यह समस्या?
महिलाओं में हड्डियों की कमजोरी का खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक होता है। इसकी एक बड़ी वजह हार्मोनल बदलाव हैं।
एस्ट्रोजन हार्मोन में कमी: एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका स्तर कम होने लगता है, जिससे हड्डियों की घनता भी घटने लगती है।
कैल्शियम और विटामिन डी की कमी: संतुलित आहार न लेने से शरीर को पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी नहीं मिल पाता, जो हड्डियों के लिए बेहद जरूरी हैं।
शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना भी हड्डियों को कमजोर बना सकता है।
प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग: गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ जाती हैं। यदि इस दौरान पर्याप्त पोषण न मिले, तो इसका असर हड्डियों पर भी पड़ सकता है।
यें भी पढ़ें : पेड़ पर उगने वाली ‘जलेबी’! सिर्फ 2 महीने बाजार में दिखती है, सेहत के लिए वरदान
जांच करवाना क्यों जरूरी है?
हड्डियों की स्थिति जानने के लिए बोन डेंसिटी स्कैन (DEXA Scan) किया जाता है। यह एक आसान और बिना दर्द वाला टेस्ट है, जिससे हड्डियों की मजबूती का पता लगाया जा सकता है। दुर्भाग्य से ज्यादातर महिलाएं यह जांच तब करवाती हैं, जब समस्या काफी बढ़ चुकी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही देखभाल से भविष्य में फ्रैक्चर और ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी समस्याओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें?
रोजाना कम से कम 30 मिनट टहलें।
हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
पर्याप्त धूप लें, ताकि शरीर को विटामिन डी मिल सके।
दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और मेवे अपने आहार में शामिल करें।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचें।
शरीर का वजन नियंत्रित रखें।
35 की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं।
35 की उम्र के बाद महिलाओं की हड्डियों में होने वाले बदलाव धीरे-धीरे और बिना किसी स्पष्ट संकेत के शुरू हो जाते हैं। इसलिए सिर्फ लक्षणों का इंतजार करना सही नहीं है। सही खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी, साथ ही समय-समय पर जांच करवाकर हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ रखा जा सकता है।

