‘रोज मातम मनाने वालों के साथ कौन रोएगा’, Asha Bhosle के भाई ने आखिर क्यों कही थी ये बात?

punjabkesari.in Monday, Apr 13, 2026 - 01:59 PM (IST)

नारी डेस्क : भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और वर्सटाइल गायिका Asha Bhosle के जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं, जो उनके संघर्ष और दर्द को बयां करते हैं। इन्हीं में से एक बेहद भावुक किस्सा उस समय का है, जब उनकी बेटी के निधन के बाद वह पूरी तरह टूट गई थीं और उनके भाई Hridaynath Mangeshkar ने उन्हें संभाला।

बचपन से ही संघर्षों का सामना

आशा भोसले का जीवन आसान नहीं रहा। उनके पिता Deenanath Mangeshkar के निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया था। महज 9 साल की उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया और छोटी उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली। कम उम्र में की गई शादी और वैवाहिक जीवन में आई परेशानियों ने उन्हें काफी तकलीफ दी। आखिरकार उन्होंने अपने बच्चों की खातिर पति का घर छोड़ दिया और अकेले ही परिवार को संभाला।

बेटी Varsha Bhosle की मौत ने तोड़ दिया

साल 2012 में उनकी बेटी Varsha Bhosle का निधन उनके जीवन का सबसे बड़ा सदमा था। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उस वक्त वह देश से बाहर थीं और खबर मिलते ही पूरी तरह टूट गईं।

भाई ने दिया संभलने का सहारा

इस मुश्किल समय में उनके भाई Hridaynath Mangeshkar ने उन्हें संभाला। उन्होंने आशा भोसले के हाथ में तानपुरा थमाया और दोबारा गाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कलाकार “शापित गंधर्व” की तरह होते हैं। जिन्हें ईश्वर प्रतिभा तो देता है, लेकिन जीवन में दुख भी साथ आता है।

 रोज मातम मनाने वालों के साथ कौन रोएगा

भाई ने उन्हें समझाते हुए कहा, खुशी दुनिया के साथ बांटी जाती है, लेकिन दुख को दिल में ही रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो इंसान हर वक्त दुख में डूबा रहता है, उसके साथ कोई नहीं रोता। इसलिए जीवन में आगे बढ़ने के लिए अपने दर्द को ताकत में बदलना जरूरी है।

एक प्रेरणादायक विरासत

Asha Bhosle का जीवन सिर्फ सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, दर्द और हिम्मत की मिसाल है। उन्होंने हर मुश्किल के बावजूद संगीत का साथ नहीं छोड़ा और अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को छुआ। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और जीवन की कहानी हमेशा लोगों को प्रेरित करती रहेगी।


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Content Editor

Monika

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