क्या निकलने वाली है बंपर भर्ती? NCERT में 1596 और CBSE में 933 पद पड़े हैं खाली

punjabkesari.in Thursday, Aug 13, 2026 - 02:27 PM (IST)

नारी डेस्क: एक संसदीय समिति ने बताया  कि स्कूल शिक्षा से जुड़ी दो अहम संस्थाओं नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) में कर्मचारियों की कमी है। NCERT में मंजूर किए गए आधे से ज़्यादा पद खाली हैं, जबकि CBSE में 44 प्रतिशत पद भरे नहीं गए हैं। ये बातें एस्टीमेट्स कमेटी (2026-27) की दसवीं रिपोर्ट (अठारहवीं लोकसभा) में कही गई हैं। यह रिपोर्ट 'देश में सस्ती और अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा देने के लिए बजट और नीतिगत पहलुओं, जिसमें CBSE की समीक्षा भी शामिल है' पर आधारित है और इसे बुधवार को लोकसभा में पेश किया गया था।
 

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अलग-अलग पदों पर सीटें खाली

समिति ने माना कि भारत में शिक्षा नीतियों को आकार देने में NCERT ने अहम भूमिका निभाई है, जिसमें नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 भी शामिल है, जिसका मकसद शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाना है। शिक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि NCERT ने फ़ाउंडेशनल स्टेज के लिए नेशनल करिकुलम फ़्रेमवर्क (NCFFS) और स्कूली शिक्षा के लिए नेशनल करिकुलम फ़्रेमवर्क (NCFSE) तैयार किया है। इसने NEP 2020 के विज़न के अनुसार इन फ़्रेमवर्क पर आधारित सिलेबस और पाठ्यपुस्तकें तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि, समिति ने NCERT में अलग-अलग पदों पर बड़ी संख्या में खाली जगहों को लेकर चिंता जताई।
 

खाली पद चिंता की बात

रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर 2025 तक, NCERT की अलग-अलग शाखाओं में मंज़ूर किए गए 2,844 पदों के मुकाबले असल में 1,248 लोग ही काम कर रहे थे, जिससे 1,596 पद खाली पड़े थे। इनमें से 145 पद एकेडमिक (शैक्षणिक) थे, 131 स्कूल टीचिंग के, 916 मिनिस्ट्रियल (प्रशासनिक) और 404 पद सहायक (ancillary) श्रेणी के थे। रिपोर्ट में कहा गया है- "समिति का मानना ​​है कि NCERT में इतनी बड़ी संख्या में पदों का खाली होना जबकि यह संस्था राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के स्वरूप को नए सिरे से सोचने और उसे बदलने में अहम भूमिका निभाती है मंत्रालय का तुरंत ध्यान आकर्षित करने वाला मामला है।"
 

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CBSE में स्थायी कर्मचारियों की भारी कमी

समिति ने देखा कि मंज़ूर किए गए 2,117 पदों में से 933 पद, यानी 44 प्रतिशत, खाली हैं। यह कमी खास तौर पर ग्रुप C के सपोर्ट स्टाफ़ में ज़्यादा है, जहां 595 पद खाली पड़े हैं। समिति ने यह भी देखा कि CBSE अभी अपने रोजमर्रा के काम के लिए अस्थायी और कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए कर्मचारियों पर निर्भर है। रिपोर्ट में कहा गया - "समिति का मानना ​​है कि स्थायी कर्मचारियों की ऐसी कमी से बड़े राष्ट्रीय बोर्ड एग्ज़ाम की सुरक्षा, क्वालिटी और सुचारू संचालन पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।" समिति ने यह भी देखा कि CBSE एक खुद से फंड जुटाने वाली स्वायत्त संस्था है और उसे मंत्रालय से कोई ग्रांट-इन-एड (सरकारी मदद) नहीं मिलती है। CBSE से जुड़े स्कूलों की संख्या 1992-93 में 3,787 से बढ़कर 2024-25 में (8 अक्टूबर, 2025 तक) 31,234 हो गई है।


छात्रों की बढ़ रही संख्या

इसमें कहा गया-"2025 तक छात्रों की संख्या कक्षा XII में 1.70 मिलियन से ज़्यादा और कक्षा X में 2.38 मिलियन से ज़्यादा हो गई।" पैनल द्वारा कर्मचारियों से जुड़ी चिंताएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब बोर्ड जुड़े हुए स्कूलों और लाखों छात्रों के बढ़ते नेटवर्क के लिए एग्ज़ाम और दूसरी एकेडमिक ज़िम्मेदारियां संभाल रहा है। समिति ने अब NCERT और CBSE दोनों में खाली पदों की समस्या को हल करने की मांग की है, जिसमें एग्ज़ाम से जुड़े संवेदनशील कामों के लिए CBSE में स्थायी कर्मचारियों को मज़बूत करने पर खास ज़ोर दिया गया है।


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Content Writer

vasudha

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