घने जंगलों के बीच 28 KM का सफर, 17 बच्चों को पोलियो पिलाकर ASHA वर्कर ने निभाया फर्ज
punjabkesari.in Tuesday, Aug 11, 2026 - 06:47 PM (IST)
नारी डेस्क : जब किसी बच्चे को वैक्सीन लगवाने के लिए अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो, तो स्वास्थ्यकर्मी खुद उसके दरवाजे तक पहुंचते हैं। मणिपुर की एक ASHA वर्कर ने इसी जज्बे की मिसाल पेश की। मेइदिनलिउ न्यूमैई ने दूरदराज के इलाके में रहने वाले 17 बच्चों तक पोलियो की खुराक पहुंचाने के लिए करीब 28 किलोमीटर का सफर पैदल तय किया। इस दौरान उन्हें घने जंगल, खराब रास्तों और कई नदियों को पार करना पड़ा।
17 बच्चों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए पैदल चलीं
यह मामला मणिपुर के तामेंगलॉन्ग जिले का है। 50 वर्षीय ASHA वर्कर मेइदिनलिउ न्यूमैई ने दूरस्थ गांव के बच्चों को पोलियो की ओरल वैक्सीन दिलाने के लिए यह मुश्किल यात्रा की। रिपोर्ट के मुताबिक, वह वैक्सीन कैरियर लेकर लगभग 28 किलोमीटर पैदल चलीं और करीब आठ घंटे तक कठिन रास्ते पर सफर किया। इस दौरान उन्हें घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और पांच नदियों को पार करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपना सफर जारी रखा ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रह जाए।

2007 से स्वास्थ्य सेवा में दे रही हैं योगदान
मेइदिनलिउ न्यूमैई वर्ष 2007 से तामेई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से जुड़ी हुई हैं। दूरदराज के इलाकों में सड़क और परिवहन की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना यहां बड़ी चुनौती है। ऐसे में ASHA कार्यकर्ता ग्रामीणों और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं। मणिपुर के कई पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान नहीं है। WHO के मुताबिक, राज्य के कुछ पहाड़ी जिलों में गांव दूर-दूर बसे हैं और बारिश के मौसम में भूस्खलन के कारण सड़कें भी प्रभावित होती हैं। ऐसे क्षेत्रों में ASHA और अन्य फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स घर-घर जाकर स्वास्थ्य एवं टीकाकरण सेवाओं से लोगों को जोड़ते हैं।
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क्यों जरूरी है हर बच्चे तक पोलियो वैक्सीन पहुंचाना?
भारत के Universal Immunization Programme के तहत बच्चों को कई वैक्सीन-प्रिवेंटेबल बीमारियों से बचाने के लिए मुफ्त टीकाकरण उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें पोलियो भी शामिल है। मणिपुर के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों सहित निर्धारित लाभार्थियों को टीकाकरण सेवाएं दी जाती हैं। पोलियो के खिलाफ लंबे समय से चल रहे टीकाकरण प्रयासों में दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण है। इसी वजह से मेइदिनलिउ न्यूमैई जैसी फ्रंटलाइन वर्कर्स की भूमिका सिर्फ वैक्सीन पहुंचाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे यह सुनिश्चित करने में मदद करती हैं कि दुर्गम इलाकों में रहने वाला कोई बच्चा स्वास्थ्य सेवाओं से छूट न जाए।
एक सफर, जो सिर्फ 28 किलोमीटर का नहीं था
मेइदिनलिउ न्यूमैई का यह सफर दिखाता है कि देश के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए फ्रंटलाइन वर्कर्स को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जंगल, नदियां और खराब रास्ते भी उनकी जिम्मेदारी के रास्ते में नहीं आए—क्योंकि मंजिल थी 17 बच्चों तक पोलियो की सुरक्षा पहुंचाना।
नोट: यह घटना अक्टूबर 2025 में मणिपुर के तामेंगलॉन्ग जिले में हुई थी और 2026 में इसकी कहानी दोबारा चर्चा में आई। उपलब्ध रिपोर्टों में यात्रा की दूरी और 17 बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स दिए जाने की जानकारी दी गई है।

