शिवलिंग पर क्यों वर्जित केतकी के फूल, भोलनाथ क्यों हो जाते हैं क्रोधित?
punjabkesari.in Monday, Aug 09, 2021 - 12:29 PM (IST)
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन शिवलिंग की भांग, दही, धतूरा और उनके प्रिय सफेद फूलों से पूजा करते हैं। मगर, भगवान शिव को सभी सफेद फूल प्रिय नहीं है। शिव पुराण में केतकी के फूल को भोलनाथ की पूजा के लिए वर्जित माना गया है। कहा जाता है कि शिवजी को केतकी के फूल अर्पित करने से वह नाराज हो जाते हैं। आज अपने इस आर्टिकल में हम आपको यही बताएंगे कि शिवलिंग पर केतकी के फूल चढ़ाने की मनाही क्यों होती है।
शिवपुराण में छिपा रहस्य
शिवपुराण में बताया गया है कि भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्माजी में एक बार विवाद हो गया था कि दोनों में से कौन अधिक बड़ा है। इस बात का फैसला करने के लिए उन्होंने भगवान शिव को न्यायकर्ता बनाया और तभी एक ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ। भगवान शिव ने कहा कि जो भी शिवलिंग का आदि और अंत बता देगा वही बड़ा माना जाएगा।

जब भगवान ब्रह्मा ने बोला झूठ
इसके बाद भगवान विष्णु ज्योतिर्लिंग को पकड़कर ऊपर अंत का पता लगाने गए और भगवान ब्रह्मा नीचे आदि का पता लगाने गए। जब भगवान विष्णु अंत का पता ना लगा सके तो वह वापिस आ गए और हार मान ली। मगर, भगवान ब्रह्मा अपने साथ केतकी के फूल को साक्षी बनाकर भगवान शिव के पास पहुंचे और कहा कि उन्होंने आदि ढूंढ लिया है।

भगवान ब्रह्मा के झूठ से क्रोधित हुए भोलेनाथ
ब्रह्माजी ने कहा कि मुझे पता चल गया है कि ज्योतिर्लिंग कहां से उत्पन्न हुआ। अपनी बात साबित करने के लिए उन्होंने केतकी के फूलों से झूठी गवाही दिलवाई। ब्रह्माजी के झूठ पर भगवान शिव क्रोधित हो गए और उनका एक सिर काट दिया। उसके बाद से ही भगवान ब्रह्मा पंचमुख से चार मुख वाले हो गए।
भोलेनाथ को क्यों नहीं चढ़ता है केतकी का फूल?
क्योंकि भगवान ब्रह्मा के झूठ में केतकी के फूल भी शामिल थे इसलिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी पूजा में से वर्जित कर दिया। यही वजह है कि शिवलिंग या भोलेनाथ मूर्ति पर भी केतकी के फूल अर्पित नहीं किए जाते।


