जानें क्यों कुछ लोगों की लाश काशी में नहीं जलाई जाती !
punjabkesari.in Tuesday, Apr 14, 2026 - 07:29 PM (IST)
नारी डेस्क : वारानसी यानी काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जहां मृत्यु को भी एक पवित्र प्रक्रिया माना जाता है। यहां हर दिन सैकड़ों शवों का अंतिम संस्कार होता है, लेकिन एक ऐसी परंपरा भी है जो लोगों को हैरान कर देती है। कुछ खास लोगों के शवों को जलाया नहीं जाता, बल्कि सीधे गंगा में प्रवाहित किया जाता है।
क्यों खास है काशी?
Varanasi को दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित नगरी माना जाता है, जहां हर परंपरा और मान्यता सदियों पुरानी है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस पवित्र शहर में मृत्यु होने या यहां दाह संस्कार कराने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि देश-विदेश से लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए काशी आते हैं और इसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग मानते हैं।

किन लोगों की लाश नहीं जलाई जाती?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष श्रेणियों के लोगों का दाह संस्कार नहीं किया जाता। इनमें छोटे बच्चे (खासकर 5 साल से कम उम्र), साधु-संत, गर्भवती महिलाएं और कुछ विशेष परिस्थितियों में मृत्यु पाने वाले लोग शामिल हैं। माना जाता है कि बच्चे निष्पाप होते हैं और साधु-संत पहले से ही पवित्र और मोक्ष के करीब होते हैं, इसलिए उन्हें अग्नि संस्कार की आवश्यकता नहीं समझी जाती और अलग तरीके से विदाई दी जाती है।
सांप के काटने और कुछ बीमारियों में अलग परंपरा
मान्यता है कि सांप के काटने से मरने वाले व्यक्ति के शरीर में कुछ समय तक प्राण रह सकते हैं, इसलिए ऐसे शवों को जलाने के बजाय नदी में प्रवाहित किया जाता है। वहीं, पहले के समय में चर्म रोग या कुष्ठ रोग से मृत्यु होने पर भी शव को जलाने से बचा जाता था, ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम रहे।
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घाटों की अनंत अग्नि और परंपरा
काशी के प्रसिद्ध Manikarnika Ghat और Harishchandra Ghat पर 24 घंटे चिताएं जलती रहती हैं, जिन्हें “अनंत अग्नि” का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, जिन शवों का दाह संस्कार नहीं किया जाता, उन्हें कपड़े में लपेटकर और वजन बांधकर गंगा में प्रवाहित किया जाता है।

बदलते समय के साथ बहस
आज के समय में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस परंपरा पर सवाल भी उठते हैं और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। फिर भी यह परंपरा आस्था, संस्कृति और सदियों पुराने विश्वासों से जुड़ी हुई है।
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काशी की यह परंपरा भले ही चौंकाने वाली लगे, लेकिन इसके पीछे गहरी धार्मिक मान्यताएं और ऐतिहासिक कारण जुड़े हैं। यह शहर आज भी अपनी अनोखी परंपराओं और आस्था के कारण पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है।

