दुश्मनों पर पाना है विजय? बगलामुखी जयंती पर इस विधि से करें पूजा
punjabkesari.in Thursday, Apr 23, 2026 - 05:16 PM (IST)
नारी डेस्क: हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष स्थान है और इनमें Maa Baglamukhi को आठवीं महाविद्या माना जाता है। उन्हें ‘पीतांबरा देवी’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उनका प्रिय रंग पीला है। मान्यता है कि मां बगलामुखी की उपासना करने से शत्रुओं पर विजय मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसी वजह से बगलामुखी जयंती का दिन साधकों और भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है।
बगलामुखी जयंती 2026 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल अष्टमी तिथि 23 अप्रैल 2026 को रात 8 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और 24 अप्रैल को शाम 7 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर Maa Baglamukhi जयंती 24 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। माना जाता है कि इस दिन रात्रि काल में पूजा और साधना करना विशेष फलदायी होता है।

बगलामुखी जयंती की पूजा विधि
इस दिन सुबह स्नान के बाद साफ और पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा स्थान को साफ करके वहां मां बगलामुखी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। देवी को पीले फूल, हल्दी और पीला चंदन अर्पित करें। साथ ही बेसन के लड्डू या पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान घी या तिल के तेल का दीपक जलाकर विधि-विधान से आराधना करें। हल्दी की माला से मां के मंत्रों का जप करना विशेष फलदायी माना गया है। मंत्र “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” अंत में आरती कर पूजा को पूर्ण करें।
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मां बगलामुखी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, Maa Baglamukhi को तंत्र-मंत्र और गुप्त साधना की देवी माना जाता है। उनका स्वरूप स्वर्ण के समान तेजस्वी बताया गया है। कथा के अनुसार, जब सृष्टि पर संकट आया था, तब भगवान विष्णु ने देवी की तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां बगलामुखी प्रकट हुईं और संसार की रक्षा की। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से की गई उनकी पूजा से शत्रु शांत होते हैं, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है।

पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान
मां बगलामुखी की पूजा करते समय मन की शुद्धता और एकाग्रता बेहद जरूरी है। इस पूजा को कभी भी किसी का अहित करने के उद्देश्य से नहीं करना चाहिए। भक्तों को हमेशा सकारात्मक भाव के साथ, अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने और आत्मबल बढ़ाने के लिए ही देवी की आराधना करनी चाहिए।

