धन दौलत से भर जाएगा घर ! जब नवरात्रि में रसोई से लेकर मेन गेट से जुड़ा कर लेंगे ये काम

punjabkesari.in Tuesday, Oct 06, 2026 - 06:17 PM (IST)

नारी डेस्क: नवरात्रि का समय आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण होता है, जो मां दुर्गा और दैवीय शक्ति की पूजा को समर्पित है। इन नौ रातों के दौरान भक्त अपने घरों की साफ-सफाई और सजावट करते हैं, पूजा के लिए एक पवित्र स्थान बनाते हैं, रोजाना पूजा-अर्चना करते हैं और भक्ति व सकारात्मकता का माहौल बनाते हैं। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ-साथ, नवरात्रि के दौरान घर और पूजा-स्थल को सोच-समझकर व्यवस्थित करने के लिए वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना चाहिए। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से। 

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नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार को साफ़ रखें

वास्तु के नजरिए से घर का मुख्य द्वार एक अहम हिस्सा होता है। नवरात्रि शुरू होने से पहले मुख्य द्वार को अच्छी तरह साफ करें, टूटी-फूटी या बेकार चीजें हटा दें। जूते-चप्पल और बाकी सामान को व्यवस्थित ढंग से रखें। ध्यान रखें कि मुख्य द्वार पर अच्छी रोशनी हो। अगर चाहें, तो दरवाज़े को सादे पारंपरिक तोरण से सजाएं। साफ़ और स्वागत करने वाला मुख्य द्वार एक अच्छा पहला प्रभाव डालता है और त्योहार के दौरान घर को और भी शुभ लुक देता है।


नवरात्रि पूजा के लिए शांत जगह चुनें

बेहतर होगा कि नवरात्रि की पूजा घर की साफ-सुथरी, शांत और खास तौर पर पूजा के लिए तय जगह पर की जाए। पूजा वाली जगह के आस-पास फालतू सामान या गंदगी नहीं होनी चाहिए। अगर आपके घर में पहले से ही पूजा का कमरा है, तो नवरात्रि से पहले उसे साफ़ करके तैयार किया जा सकता है। अगर पूजा के लिए अलग कमरा नहीं है, तो मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर और कलश रखने के लिए घर के किसी साफ़ कोने का इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे जरूरी बातें हैं - साफ-सफाई, पवित्र जगह का सम्मान और रोज़ाना पूजा करने का नियम बनाए रखना।

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उत्तर-पूर्व दिशा पर ध्यान दें

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे पारंपरिक रूप से 'ईशान कोण' कहा जाता है, को आध्यात्मिकता, प्रार्थना और पवित्र कार्यों से जुड़ा माना जाता है। अगर आपके घर का लेआउट ऐसा है, तो उत्तर-पूर्व दिशा में शांतिपूर्ण ध्यान या प्रार्थना के लिए जगह बनाई जा सकती है। हालांकि, सिर्फ़ दिशा की वजह से पूजा की जगह को किसी ऐसी जगह पर न बनाएं जो इसके लिए सही न हो। घर की बनावट से जुड़ी मौजूदा सीमाओं का भी ध्यान रखना चाहिए।


कलश को सावधानी से रखें

नवरात्रि के दौरान कई भक्तों के लिए कलश स्थापना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। कलश को पूजा के लिए तय जगह पर एक साफ़ और स्थिर सतह पर रखना चाहिए। अगर आपका परिवार कलश स्थापना की किसी खास परंपरा का पालन करता है, तो अलग-अलग रीति-रिवाजों को मिलाने के बजाय उसी तरीके का पालन करें। कलश को रखते समय पूजा की पूरी व्यवस्था, उपलब्ध जगह और अपनाए जा रहे पारंपरिक तरीके का ध्यान रखना चाहिए। अनुष्ठान के सही समय के लिए, नवरात्रि के उपयुक्त मुहूर्त की भी जानकारी ली जा सकती है।


आध्यात्मिक और सुखद माहौल बनाने के लिए दीयों का इस्तेमाल करें

दीया जलाना हिंदू पूजा का एक अहम हिस्सा है। नवरात्रि के दौरान, परिवार की पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा की जगह पर दीया रखा जा सकता है। ध्यान रखें कि दीया किसी मज़बूत और स्थिर जगह पर रखा हो। इसे पर्दों और आसानी से आग पकड़ने वाली चीज़ों से दूर रखा जाए। बच्चे गलती से इसे गिरा न दें। आस-पास की जगह साफ़-सुथरी रखी जाए। इसका मकसद सुरक्षित और अनुशासित पूजा के साथ-साथ भक्ति-भाव को भी बनाए रखना है।


रसोई को साफ़ रखें

रसोई घर का एक अहम हिस्सा है और नवरात्रि के दौरान यह ज़्यादा व्यस्त रहती है क्योंकि कई परिवार व्रत का खाना और खास प्रसाद बनाते हैं।  रसोई को साफ़-सुथरा और व्यवस्थित रखें। अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो परिवार की परंपरा के अनुसार अलग और साफ़ बर्तन इस्तेमाल करें। ताज़ा बने प्रसाद को सम्मान के साथ रखें और रसोई में बेवजह चीजें न फैलाएं।


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vasudha

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