यह CEO अपनी गर्लफ्रेंड के पीरियड्स के खून को रखता है संभाल कर, डॉक्टर बोले- इसमें कुछ गलत नहीं

punjabkesari.in Friday, Jul 31, 2026 - 05:53 PM (IST)

नारी डेस्क: टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर और लंबी उम्र पाने के शौकीन ब्रायन जॉनसन एक बार फिर ऑनलाइन बहस के केंद्र में आ गए हैं। उन्होंने बताया  कि अपनी हेल्थ रिसर्च के तहत वे अपनी गर्लफ्रेंड के पीरियड्स के खून (मेंस्ट्रुअल ब्लड) को एक लैब फ्रीज़र में स्टोर करके रखते हैं। एंटी-एजिंग प्रयोगों पर हर साल लाखों डॉलर खर्च करने के लिए मशहूर जॉनसन ने सोशल मीडिया पर बताया कि वे अपनी गर्लफ्रेंड केट टोलो के पीरियड्स के खून का 10 ml सैंपल -80°C तापमान वाले फ्रीज़र में रखते हैं। यह पोस्ट तेज़ी से वायरल हो गई। 


खूब वायरल हुआ ये पोस्ट

कई यूज़र्स ने सवाल उठाया कि क्या लंबी उम्र पाने की उनकी कोशिश कुछ ज़्यादा ही आगे बढ़ गई है, जबकि दूसरों ने इस काम के पीछे की वैज्ञानिक जिज्ञासा का बचाव किया। जॉनसन, जिन्होंने बायोलॉजिकल एजिंग (जैविक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया) को धीमा करने की अपनी कोशिशों को सार्वजनिक रूप से दिखाकर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स बनाए हैं, ने कहा कि स्टोर किए गए सैंपल का मकसद रिसर्च है, न कि कोई असामान्य या सनसनीखेज काम। जॉनसन के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान निकलने वाला खून ऐसी जानकारी दे सकता है जो आम ब्लड टेस्ट से नहीं मिल सकती, क्योंकि यह सीधे गर्भाशय से आता है।


इस पर डॉक्टर की क्या है राय?

जॉनसन ने बताया कि रिसर्चर इस सैंपल से गर्भाशय की कोशिकाओं, इम्यून सेल्स और स्टेम सेल्स का अध्ययन कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस खून की जांच करके इसमें मौजूद हानिकारक चीज़ों का पता लगाया जा सकता है, जैसे कि माइक्रोप्लास्टिक्स, PFAS (जिन्हें अक्सर "हमेशा बने रहने वाले केमिकल" या "फ़ॉरेवर केमिकल्स" कहा जाता है) और एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स, जो इंसानी सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। इस चर्चा पर टिप्पणी करते हुए डॉक्टर ने कहा- इस विषय को जिस तरह से प्रस्तुत किया गया है, उससे लोग असहज महसूस कर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे का मूल विचार कोई नया नहीं है। मासिक धर्म से निकलने वाला द्रव शरीर का एकमात्र ऐसा ऊतक है जो हर महीने निकलता और फिर से बनता है, जिससे यह गर्भाशय की स्थिति को समझने का एक उपयोगी और गैर-आक्रामक तरीका बन जाता है। 


पहले भी होता रहा है ब्लड का यूज

दुनिया भर के शोध समूह पहले से ही इसका उपयोग लैप्रोस्कोपी के बिना एंडोमेट्रियोसिस का निदान करने के लिए कर रहे हैं, एक ऐसी स्थिति जिसकी पुष्टि में वर्तमान में सात से दस साल लगते हैं। इसे -80°C पर संग्रहित करना मानक शोध प्रक्रिया है, न कि कोई ऑपरेशन। डॉक्टर कहते हैं-  दो बातें ध्यान में रखनी चाहिए। किसी एक व्यक्ति के सैंपल सिर्फ़ एक अनुभव या किस्सा हो सकते हैं, कोई स्टडी नहीं और पीरियड्स के दौरान निकलने वाले खून को फ़्रीज़ करने से फ़र्टिलिटी सुरक्षित नहीं रहती, इसके लिए किसी मान्यता प्राप्त ART लैब में एग, एम्ब्रियो या ओवेरियन टिश्यू को फ़्रीज़ करना ज़रूरी होता है।


एक्सपर्ट ने समझाई ये बात

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि भले ही पीरियड्स के दौरान निकलने वाला खून रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी रिसर्च के लिए एक अहम ज़रिया बनकर उभर रहा है, लेकिन इस तरह की टेस्टिंग को रेगुलर क्लिनिकल केयर का हिस्सा बनाने से पहले और भी बड़ी स्टडीज़ की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि जॉनसन के पर्सनल एक्सपेरिमेंट को वैज्ञानिक जिज्ञासा के एक उदाहरण के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि इस बात के सबूत के तौर पर कि यह तरीका रोज़मर्रा के मेडिकल इस्तेमाल के लिए प्रमाणित हो चुका है।


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Content Writer

vasudha

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