‘पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप की कोशिश है…’ कोर्ट के पलट दिया वो विवादित बयान

punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 04:12 PM (IST)

नारी डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप की कोशिश का आरोप लगाने के लिए काफी नहीं है। दो NGO और पीड़िता की मां की याचिकाओं से पैदा हुई क्रिमिनल अपीलों सहित, खुद से लिए गए मामले का निपटारा करते हुए, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट का तर्क "क्रिमिनल न्यायशास्त्र के तय सिद्धांतों के साफ तौर पर गलत इस्तेमाल" पर आधारित था।
 

यह भी पढ़ें:  खतरे से बाहर हैं सलमान खान के पिता, डॉक्टरों ने बताया- उन्हें वेंटिलेटर से जल्द हटा देंगे 
 

विवादित निर्णय हुआ रद्द 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने  फैसले में कहा है कि पायजामे का नाड़ा खींचना और स्तन छूना साफ तौर पर दुष्कर्म की कोशिश है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का विवादित फैसला भी पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि नाड़ा खींचना या तोड़ना सिर्फ दुष्कर्म करने की तैयारी है। कोर्ट ने कहा कि "आरोपों के आधार पर हम हाईकोर्ट के इस निष्कर्ष से सहमत नहीं हो सकते कि आरोप केवल बलात्कार के अपराध को अंजाम देने की तैयारी के हैं, न कि रेप का प्रयास। आरोपियों की हरकत स्पष्ट निष्कर्ष निकलता है कि दुष्कर्म के प्रयास के प्रावधानों को लागू करने का मामला बनता है, विवादित निर्णय को रद्द किया जाना चाहिए। 
 

यह भी पढ़ें:  सिर से बाल हो रहे कम? कहीं हार्ड वॉटर तो नहीं इसका कारण
 

सुप्रीम कोर्ट ने माना नाबालिग पीड़िता के साथ हुआ गलत

CJI की अगुवाई वाली बेंच ने पहले के फैसले का हवाला देते हुए कह-, "किसी अपराध को करने की 'तैयारी' और 'कोशिश' के बीच एक साफ अंतर है। 'तैयारी' के स्टेज में सोच-विचार, उन तरीकों या उपायों को बनाना या अरेंज करना शामिल है, जो अपराध करने के लिए ज़रूरी होंगे। जबकि अपराध करने की 'कोशिश' तैयारी पूरी होने के तुरंत बाद शुरू होती है।" आरोपों की जांच करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि आरोपी कथित तौर पर नाबालिग पीड़िता को घर छोड़ने के बहाने मोटरसाइकिल पर ले गया था एक पुलिया के पास रुका, उसे घसीटा सेक्शुअली गलत काम किया और तभी भागा जब गवाह उसकी चीखें सुनकर मौके पर पहुंचे।सुप्रीम कोर्ट ने कहा- "इन आरोपों को देखने से कोई शक नहीं रह जाता कि जो मामला बनाया जा रहा है, वह यह है कि आरोपी व्यक्ति उस पर IPC की धारा 376 के तहत अपराध करने के पहले से तय इरादे से आगे बढ़े थे।" 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

vasudha

Related News

static