अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक, लद्दाख लौटने से पहले करेंगे ये जरूरी काम
punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 02:37 PM (IST)
नारी डेस्क: क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सोमवार को बताया कि 26 दिनों की भूख हड़ताल के बाद बीमारी से उबरने पर उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। X पर एक पोस्ट में वांगचुक ने कहा कि लद्दाख स्थित अपने घर लौटने से पहले वे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट जाएंगे। यह जानकारी देते हुए वांगचुक ने लिखा- "और आखिरकार... मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट जाऊंगा और फिर पहाड़ों की ओर लौटूंगा"।
AND FINALLY....
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 27, 2026
I'm being discharged from the hospital. Will be going to Rajghat to pay tribute to Mahatma Gandhi and then back to the mountains.
Thank you all and BIG THANK YOU to the wonderful team of doctors and staff at Medanta Hospital Gurgaon. pic.twitter.com/BBp5k6JY9X
वांगचुक वीडियो में कहते हैं- "आप सभी का धन्यवाद और मेदांता अस्पताल गुड़गांव की डॉक्टरों और स्टाफ की शानदार टीम का बहुत-बहुत धन्यवाद।" उन्होंंने कहा- "आज मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। मैंने फिर से खाना शुरू कर दिया है और मेरी सेहत में सुधार हो रहा है। लद्दाख स्थित अपने घर लौटने से पहले, मैं बापू को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट जाऊंगा।" एक्टिविस्ट ने डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ और उन सभी लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने अस्पताल में रहने के दौरान उनके जल्द ठीक होने की कामना की थी। इलाज के लिए भर्ती होने के कुछ दिनों बाद ही उन्होंने यह घोषणा की है।
इससे पहले, शनिवार को वांगचुक ने NEET प्रश्न पत्र लीक होने के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत किया और भारत में छात्रों के व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बाद इसे "लोकतंत्र की जीत" बताया। प्रधान के पद छोड़ने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि केंद्र को अब शिक्षा प्रणाली और शासन, दोनों में सुधार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं अपने सभी देशवासियों को बधाई देता हूं; आज हमने लोकतंत्र की जीत देखी है।" साथ ही उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा जारी रखने का आग्रह किया।
वांगचुक ने आंदोलन में भाग लेने वाले छात्रों और स्वयंसेवकों को भी बधाई दी और कहा, "मैं देश के युवाओं को बधाई देना चाहता हूं और अपनी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) टीम और उन भाइयों-बहनों का धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया, साथ ही उन स्वयंसेवकों का भी जिन्होंने उनका समर्थन किया। मैं देश भर के उन सभी छात्रों, युवाओं और बुजुर्गों का सम्मान करता हूं जो लोकतंत्र के लिए खड़े हुए। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जहां ये विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे, वहां उन्होंने शांति बनाए रखी।"

