कहीं पेड़ों तो कहीं बैलों को बांधी जाती है राखी, भारत की 6 अनोखी परंपराएं
punjabkesari.in Thursday, Aug 27, 2026 - 04:13 PM (IST)
नारी डेस्क : भारत त्योहारों और परंपराओं का देश है। यही वजह है कि एक ही त्योहार अलग-अलग राज्यों में अलग रंग और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन भी ऐसा ही त्योहार है, जिसे आमतौर पर भाई की कलाई पर राखी बांधने, मिठाई खिलाने और उपहार देने से मनाया जाता है। लेकिन देश के कई हिस्सों में रक्षाबंधन से जुड़ी ऐसी परंपराएं भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। कहीं रक्षा सूत्र सबसे पहले देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है, तो कहीं पेड़ों और पशुओं को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया जाता है। आइए जानते हैं भारत के अलग-अलग हिस्सों में रक्षाबंधन मनाने की 6 अनोखी परंपराओं के बारे में।
उत्तराखंड: सबसे पहले देवताओं को अर्पित होता है रक्षा सूत्र
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व भी काफी खास है। कई स्थानों पर इस दिन रक्षा सूत्र सबसे पहले देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। पूजा-पाठ के बाद परिवार के सदस्यों को रक्षा सूत्र बांधा जाता है। इस परंपरा में भाई-बहन के रिश्ते के साथ धार्मिक आस्था और ईश्वर के प्रति श्रद्धा भी जुड़ी हुई है।

झारखंड-छत्तीसगढ़: सिर्फ भाई नहीं, पूरे समाज से जुड़ा त्योहार
झारखंड और छत्तीसगढ़ के कुछ आदिवासी समुदायों में रक्षाबंधन को केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं माना जाता। यहां राखी सामुदायिक एकता, भाईचारे और आपसी सुरक्षा का प्रतीक भी मानी जाती है। कई जगहों पर महिलाएं अपने सगे भाइयों के साथ परिवार और समुदाय के अन्य लोगों को भी रक्षा सूत्र बांधती हैं। इसके पीछे पूरे समाज में एक-दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश माना जाता है।
राजस्थान: पेड़ों को भी बांधी जाती है राखी
राजस्थान के कुछ इलाकों में रक्षाबंधन पर पेड़ों को भी रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा देखने को मिलती है। लोग पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हैं। इस परंपरा का संदेश बेहद खास है। जिस तरह भाई अपनी बहन की रक्षा का वादा करता है, उसी तरह पेड़ों की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज की है।
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महाराष्ट्र: राखी के साथ समुद्र की पूजा
महाराष्ट्र में रक्षाबंधन को नारली पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। खासतौर पर समुद्र से जुड़े कोली समुदाय के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर समुद्र की पूजा की जाती है और नारियल अर्पित किया जाता है। समुद्र में जाने वाले मछुआरे सुरक्षित रहें और उनकी आजीविका बनी रहे, ऐसी कामना के साथ यह परंपरा निभाई जाती है। कई परिवारों में भाई-बहन भी राखी का त्योहार मनाते हैं।

उत्तर प्रदेश: जवानों और पुलिसकर्मियों को भी राखी
उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर रक्षाबंधन के दौरान बहनें अपने भाइयों के साथ-साथ सेना के जवानों और पुलिसकर्मियों को भी राखी बांधती हैं। यह परंपरा देश और समाज की सुरक्षा में तैनात लोगों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का एक तरीका है। जवानों और पुलिसकर्मियों को राखी बांधकर उनकी सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी की जाती है।
ओडिशा: बैलों को बांधी जाती है राखी
ओडिशा में रक्षाबंधन को गम्हा पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कृषि प्रधान समाज में इस दिन खेती-किसानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बैलों को विशेष सम्मान दिया जाता है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में बैलों को नहलाकर और सजाकर उनके प्रति सम्मान जताया जाता है। कुछ परंपराओं में उन्हें रक्षा सूत्र भी बांधा जाता है। यह परंपरा किसानों और पशुओं के बीच जुड़े गहरे संबंध को दर्शाती है।
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रक्षाबंधन का संदेश सिर्फ भाई-बहन तक सीमित नहीं
भारत में रक्षाबंधन की इन अलग-अलग परंपराओं को देखें तो पता चलता है कि यह त्योहार सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में यह प्रकृति, समाज, पशुओं, देश की रक्षा करने वाले जवानों और धार्मिक आस्था से भी जुड़ जाता है। यही भारत की विविधता की खूबसूरती है कि एक ही त्योहार अलग-अलग जगहों पर अलग अंदाज में मनाया जाता है, लेकिन हर परंपरा के केंद्र में प्रेम, सुरक्षा, सम्मान और आपसी जुड़ाव की भावना रहती है।

