तकनीकी संस्थानों में 8.5 लाख से ज्यादा सीटें खाली, AICTE के आंकड़ों से सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

punjabkesari.in Saturday, Aug 29, 2026 - 11:51 AM (IST)

नारी डेस्क : देश में तकनीकी शिक्षा को लेकर विद्यार्थियों के बीच इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले की होड़ रहती है। इसके बावजूद हर साल बड़ी संख्या में तकनीकी शिक्षा की सीटें खाली रह जाती हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में कुल 34.15 लाख स्वीकृत सीटों में से 25.57 लाख सीटों पर ही दाखिले हुए। यानी करीब 8.58 लाख सीटें खाली रह गईं। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब देश में AICTE से मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थानों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में फिर बढ़ रही है। हालांकि, संस्थानों की संख्या अभी भी 2020-21 के स्तर से कम है।

इंजीनियरिंग की 4 लाख से ज्यादा सीटें खाली

AICTE के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में इंजीनियरिंग के विभिन्न स्तरों पर कुल 25,52,440 सीटें निर्धारित थीं। इनमें से 21,37,342 सीटों पर ही दाखिले हुए। इस हिसाब से इंजीनियरिंग में करीब 4.15 लाख सीटें खाली रह गईं। यानी तकनीकी शिक्षा की कुल खाली सीटों में इंजीनियरिंग का बड़ा हिस्सा शामिल है।

कंप्यूटर एप्लीकेशन में भी हजारों सीटें खाली

कंप्यूटर एप्लीकेशन पाठ्यक्रम में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं। 2025-26 में इस क्षेत्र में कुल 1,45,639 सीटें थीं, जिनमें से 90,005 सीटों पर ही दाखिले हुए। इस तरह कंप्यूटर एप्लीकेशन की करीब 55,600 सीटें खाली रह गईं। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि तकनीकी शिक्षा के कुछ लोकप्रिय माने जाने वाले पाठ्यक्रमों में भी उपलब्ध सीटों और वास्तविक दाखिलों के बीच बड़ा अंतर है।

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होटल मैनेजमेंट की सीटों का भी यही हाल

होटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी सीटें पूरी तरह नहीं भर पाईं। AICTE से मान्यता प्राप्त होटल मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों में 11 हजार से कुछ अधिक सीटों में से करीब 4 हजार सीटों पर ही दाखिले हुए। इसका मतलब है कि इस क्षेत्र में भी लगभग 7 हजार सीटें खाली रह गईं।

तीन साल में 337 तकनीकी संस्थान बढ़े

AICTE के आंकड़ों के मुताबिक, देश में मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थानों की संख्या 2023-24 में 8,263 थी। यह संख्या बढ़कर 2026-27 में करीब 8,600 हो गई। यानी तीन वर्षों में तकनीकी संस्थानों की संख्या में 337 की बढ़ोतरी हुई है। प्रतिशत के हिसाब से यह वृद्धि करीब 4 फीसदी बैठती है। हालांकि, संस्थानों की संख्या में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद देश अभी भी 2020-21 के आंकड़े से पीछे है।

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2020-21 के मुकाबले अभी भी कम हैं संस्थान

AICTE के आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में देश में कुल 9,642 तकनीकी संस्थान थे। इसके बाद कुछ वर्षों तक संस्थानों की संख्या में लगातार गिरावट देखने को मिली। 2023-24 में यह संख्या घटकर 8,263 रह गई थी। इसके बाद फिर से संस्थानों की संख्या में बढ़ोतरी शुरू हुई और 2026-27 में यह करीब 8,600 तक पहुंच गई। इसका मतलब है कि हाल के तीन वर्षों में संस्थानों की संख्या बढ़ी जरूर है, लेकिन यह अभी भी 2020-21 के मुकाबले करीब 1,000 संस्थान कम है।

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सीटें बढ़ रही हैं, लेकिन दाखिले क्यों नहीं?

AICTE के आंकड़े तकनीकी शिक्षा के सामने एक अहम सवाल भी खड़ा करते हैं। एक तरफ नए संस्थान और सीटें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में सीटें खाली रह रही हैं। इसके पीछे विद्यार्थियों की पसंद में बदलाव, रोजगार की संभावनाएं, संस्थानों की गुणवत्ता, फीस, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विकल्प और कुछ तकनीकी पाठ्यक्रमों की मांग जैसे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, किसी एक कारण को इन आंकड़ों के आधार पर जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।

AICTE क्या करता है?

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) देश में तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर का वैधानिक निकाय है। यह शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है। AICTE इंजीनियरिंग, फार्मेसी, प्रबंधन, आर्किटेक्चर और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों से जुड़े मानक और नियम तय करता है। इसके अलावा नए तकनीकी संस्थानों और नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी देने तथा संस्थानों में सीटों से संबंधित नियमन में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। AICTE के आधिकारिक पोर्टल पर तकनीकी संस्थानों और संबंधित कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध है।

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क्या कहते हैं ये आंकड़े?

AICTE के आंकड़ों से तकनीकी शिक्षा की एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। संस्थानों की संख्या दोबारा बढ़ रही है, लेकिन सीटों को भरना अभी भी बड़ी चुनौती है। 2025-26 में 34.15 लाख सीटों में से करीब 8.58 लाख सीटों का खाली रहना बताता है कि केवल संस्थानों और सीटों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। शिक्षण की गुणवत्ता, पाठ्यक्रमों की बाजार की जरूरतों के अनुरूपता और विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


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Content Editor

Monika

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